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उद्योगों की राह में टूटी सड़कें सबसे बड़ी बाधा: सीआईसीयू ने सरकार से किया हस्तक्षेप का आग्रह
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। पंजाब के औद्योगिक क्षेत्र बुनियादी ढांचे और नीतिगत सुधारों की बढ़ती जरूरत को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) लुधियाना के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता तथा आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां से मुलाकात की। बैठक में औद्योगिक सड़कों की बदहाली, भूमि उपयोग संबंधी समस्याओं और लंबित नीतिगत विसंगतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सीआईसीयू के अध्यक्ष उपकार सिंह आहूजा ने कहा कि खराब सड़क कनेक्टिविटी उद्योग, व्यापार और आम जनता के लिए सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है। उन्होंने रामगढ़–चंडीगढ़ रोड से साहनेवाल एयरपोर्ट तक, जीटी रोड के विभिन्न हिस्सों और चंडीगढ़ रोड से पहरूवाल तक की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इन मार्गों पर औद्योगिक वाहनों, एयरपोर्ट ट्रैफिक, श्रमिकों, छात्रों और स्थानीय निवासियों की भारी आवाजाही रहती है, लेकिन सड़कें संकरी, टूटी और जलभराव से प्रभावित हैं।
महासचिव हनी सेठी और उपाध्यक्ष गौतम मल्होत्रा ने कहा कि बार-बार की अस्थायी मरम्मत कुछ ही महीनों में बेकार हो जाती है। उन्होंने उच्च गुणवत्ता निर्माण और सख्त निगरानी के साथ स्थायी समाधान की मांग की।
भूमि नीति और प्लॉट बंटवारा भी चिंता का विषय एपेक्स चैंबर के कन्वीनर राहुल आहूजा ने नई सरकारी नीतियों के तहत सड़क चौड़ाई मानकों पर चिंता जताई। उन्होंने 100 फीट के बजाय कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में 80 फीट की व्यावहारिक व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया। बलदेव सिंह ने मिश्रित भूमि उपयोग नीति में पुराने उद्योगों के लिए पर्याप्त राहत की कमी पर सवाल उठाया। एशियन क्रेन्स एंड एलीवेटर्स के भूपिंदर सिंह और जसबीर सिंह ने औद्योगिक प्लॉटों के बंटवारे और विभाजन की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने का अनुरोध किया।
सरकार का आश्वासन
मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि सरकार संतुलित विकास, बेहतर बुनियादी ढांचा और उद्योग अनुकूल नीतियों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी मुद्दों को संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर समाधान करने का आश्वासन दिया। सीआईसीयू ने स्पष्ट किया कि यह संवाद औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के व्यापक लक्ष्य से प्रेरित है। चैंबर ने पंजाब में मजबूत, प्रगतिशील और समावेशी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सरकार को सहयोग देने का भरोसा भी जताया।
मुख्य सुझाव: -टूटी सड़कें और संकरी मार्ग सुधारें।
-पुराने औद्योगिक प्लॉटों और भूमि उपयोग नीति में राहत।
-स्थायी निर्माण और सख्त निगरानी।
-सड़क चौड़ाई 80 फीट पर व्यावहारिक समायोजन।
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सीआईसीयू के अध्यक्ष उपकार सिंह आहूजा ने कहा कि खराब सड़क कनेक्टिविटी उद्योग, व्यापार और आम जनता के लिए सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है। उन्होंने रामगढ़–चंडीगढ़ रोड से साहनेवाल एयरपोर्ट तक, जीटी रोड के विभिन्न हिस्सों और चंडीगढ़ रोड से पहरूवाल तक की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इन मार्गों पर औद्योगिक वाहनों, एयरपोर्ट ट्रैफिक, श्रमिकों, छात्रों और स्थानीय निवासियों की भारी आवाजाही रहती है, लेकिन सड़कें संकरी, टूटी और जलभराव से प्रभावित हैं।
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महासचिव हनी सेठी और उपाध्यक्ष गौतम मल्होत्रा ने कहा कि बार-बार की अस्थायी मरम्मत कुछ ही महीनों में बेकार हो जाती है। उन्होंने उच्च गुणवत्ता निर्माण और सख्त निगरानी के साथ स्थायी समाधान की मांग की।
भूमि नीति और प्लॉट बंटवारा भी चिंता का विषय एपेक्स चैंबर के कन्वीनर राहुल आहूजा ने नई सरकारी नीतियों के तहत सड़क चौड़ाई मानकों पर चिंता जताई। उन्होंने 100 फीट के बजाय कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में 80 फीट की व्यावहारिक व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया। बलदेव सिंह ने मिश्रित भूमि उपयोग नीति में पुराने उद्योगों के लिए पर्याप्त राहत की कमी पर सवाल उठाया। एशियन क्रेन्स एंड एलीवेटर्स के भूपिंदर सिंह और जसबीर सिंह ने औद्योगिक प्लॉटों के बंटवारे और विभाजन की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने का अनुरोध किया।
सरकार का आश्वासन
मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि सरकार संतुलित विकास, बेहतर बुनियादी ढांचा और उद्योग अनुकूल नीतियों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी मुद्दों को संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर समाधान करने का आश्वासन दिया। सीआईसीयू ने स्पष्ट किया कि यह संवाद औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के व्यापक लक्ष्य से प्रेरित है। चैंबर ने पंजाब में मजबूत, प्रगतिशील और समावेशी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सरकार को सहयोग देने का भरोसा भी जताया।
मुख्य सुझाव: -टूटी सड़कें और संकरी मार्ग सुधारें।
-पुराने औद्योगिक प्लॉटों और भूमि उपयोग नीति में राहत।
-स्थायी निर्माण और सख्त निगरानी।
-सड़क चौड़ाई 80 फीट पर व्यावहारिक समायोजन।