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दर्दनाक: हाथ-पैर बांध 3 बच्चों को भाखड़ा नहर में फेंका, फिर दंपती खुद भी कूदे, बच्चों की मौत; इसलिए उठाया कदम
अमर उजाला नेटवर्क, पटियाला
Published by: Sharukh Khan
Updated Mon, 25 May 2026 11:05 AM IST
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सार
पटियाला में घरवालों से परेशान होकर पति-पत्नी ने हाथ-पैर बांध तीनों बच्चों को भाखड़ा नहर में फेंक दिया। इसके बाद खुद भी कूद गए, लेकिन पति तैरकर बाहर निकल आया, जबकि पत्नी को कुछ लोगों ने निकाल लिया। लेकिन तीनों बच्चों की मौत हो गई। आरोपी दंपती पहले बच्चों को लेकर ट्रैक पर लेटे, ट्रेन न आई तो नहर में कूदने की योजना बनाई।
patiala suicide
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
मोहाली के लांडरां क्षेत्र के गांव मौजपुर निवासी एक दंपती ने रविवार दोपहर अपने तीन बच्चों के हाथ-पैर चुनरी से बांधकर भाखड़ा नहर में फेंक दिया और खुद भी नहर में छलांग लगा दी। तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई। पिता तैरकर बच निकला जबकि मां को ग्रामीणों ने बचा लिया।
इससे पहले दंपती मरने के लिए रेल पटरी पर लेटे, मगर ट्रेन नहीं आई। दंपती ने कूदने से पहले सवा मिनट का वीडियो बनाकर इस कदम के लिए अपने परिजन को जिम्मेदार ठहराया। वीडियो में आरोप लगाया कि उनके साथ रोजाना क्लेश किया जाता था, जिससे वह तंग आ चुका था। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
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इससे पहले दंपती मरने के लिए रेल पटरी पर लेटे, मगर ट्रेन नहीं आई। दंपती ने कूदने से पहले सवा मिनट का वीडियो बनाकर इस कदम के लिए अपने परिजन को जिम्मेदार ठहराया। वीडियो में आरोप लगाया कि उनके साथ रोजाना क्लेश किया जाता था, जिससे वह तंग आ चुका था। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
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हरप्रभजोत सिंह (40) बिजली मिस्त्री है और उसकी दुकान भी गांव में ही है। उसकी तीन बहनें हैं। परिजन के अनुसार, हरप्रभजोत की पत्नी जसविंदर कौर की सास-ससुर से नहीं बनती थी, घर में रोज क्लेश होता था।
रविवार सुबह ही हरप्रभजोत, पत्नी और तीन बच्चों एकमजोत सिंह (14), मुस्कान (12) और राजवीर कौर (8) के साथ मोटरसाइकिल से सलेटा गांव के पास पटरियों पर मरने के लिए लेट गए। काफी देर तक लेटे रहे, पर ट्रेन नहीं आई।
इसके बाद उन्होंने भाखड़ा पुल से कूदने का फैसला किया। पुल पर बाइक खड़ी कर पहले तीनों बच्चों के हाथ-पैर चुनरी से बांधे और नहर में धकेल दिया, फिर खुद भी कूद गए।
पानी का तेज बहाव था, जिससे तीनों बच्चे बह गए। बाद में गोताखोरों ने शव निकाल लिए। थाना गंडा खेड़ी पुलिस मामले की जांच कर रही है। सरकारी अस्पताल की डॉ. तरनजीत कौर ने तीनों शवों के अस्पताल लाए जाने की पुष्टि की।
गोताखोर राजीव कुमार ने बताया कि टीम मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन बहाव तेज होने के कारण बच्चों को नहीं बचाया जा सका। घटना के बाद पुलिस दंपती को थाने ले गई है। अधिकारियों के अनुसार, यह भी पता लगाया जा रहा है कि परिवार पर कोई दबाव या धमकी तो नहीं थी।
शोक में डूबा मौजपुर गांव, मां बोली- कभी नहीं सोचा था कि बेटा ऐसा कदम उठा लेगा
गांव मौजपुर में रविवार को हर घर के लोगों की आंखें नम थीं। जिस आंगन में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा है। तीन बच्चों को खो चुके 70 वर्षीय सरवण सिंह चारपाई पर बेसुध बैठे हैं जबकि 65 वर्षीय गुरमेल कौर बार-बार विलाप करते हुए कह रही हैं अगर मारना ही था तो हमें मार देते, बच्चों ने क्या बिगाड़ा था।
गांव मौजपुर में रविवार को हर घर के लोगों की आंखें नम थीं। जिस आंगन में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा है। तीन बच्चों को खो चुके 70 वर्षीय सरवण सिंह चारपाई पर बेसुध बैठे हैं जबकि 65 वर्षीय गुरमेल कौर बार-बार विलाप करते हुए कह रही हैं अगर मारना ही था तो हमें मार देते, बच्चों ने क्या बिगाड़ा था।
सरवण सिंह के बेटे हरप्रभजोत सिंह और उसकी पत्नी जसबिंदर कौर के तीन बच्चों के साथ राजपुरा के नजदीक से गुजर रही भाखड़ा नहर में कूदने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पति-पत्नी को तो बचा लिया गया लेकिन एक पोते और दो पोतियों की मौत ने परिवार का सब कुछ छीन लिया।
हरप्रभजोत सिंह और जसबिंदर कौर पुलिस हिरासत में हैं। सरवण सिंह व गुरमेल कौर ने लड़खड़ाती आवाज में कहा कि मेरी बहू अक्सर पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी देती थी।
कभी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा भी ऐसा कदम उठा लेगा। बीमारी के कारण वर्षों से बिस्तर पर पड़े सरवण सिंह की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। रिश्तेदार और ग्रामीण लगातार परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।