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विदेश जाने का सपना, ठगी का जाल! पंजाब में फर्जी एजेंटों की ‘डंकी’ बढ़ी, 18 से 80 पहुंचीं शिकायतें
Mon, 17 Aug 2026 10:35 AM IST
Nivedita
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 17 Aug 2026 10:35 AM IST
सार
जाना था जापान, पहुंच गए चीन...यह गाना कभी हंसाता था लेकिन विदेश में नौकरी का सपना देखने वाले पंजाब के युवाओं के लिए अब इसकी तर्ज पर बनी हकीकत रुलाने लगी है। वर्क वीजा का सपना दिखाकर टूरिस्ट वीजा थमाया जा रहा है और लाखों रुपये लेकर युवाओं को ऐसे देशों में भेजा जा रहा है जहां वे फंसकर रह जाते हैं।
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विदेश के नाम पर हो रही ठगी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में विदेश भेजने के नाम पर लोगों से ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बेहतर भविष्य और अच्छी नौकरी का सपना दिखाकर एजेंट मोटी रकम वसूलते हैं। वर्क वीजा का वादा करने के बाद टूरिस्ट वीजा थमा दिया जाता है। विदेश पहुंचने पर धोखे का पता चलता है और लोग अवैध रूप से रहने या भारी परेशानी के बाद लौटने को मजबूर होते हैं।
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जालंधर के एक युवक को रूस का वर्क वीजा देने का भरोसा देकर टूरिस्ट वीजा पर भेज दिया गया। इसी तरह अमृतसर के एक युवक ने अमेरिका जाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए लेकिन उसे मोरक्को में करीब एक साल कैदी की तरह रहना पड़ा। ऐसे मामले फर्जी एजेंटों के जाल की गंभीरता बताते हैं।
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18 से बढ़कर 80 हुई शिकायतें
केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में गैरकानूनी भर्ती गतिविधियों से जुड़ी शिकायतें वर्ष 2024 में 18 थीं जो 2025 में बढ़कर 80 हो गईं। पुलिस ने 69 मामलों में कार्रवाई रिपोर्ट जमा की। हालांकि अभियोजन की मंजूरी के अनुरोध नहीं मिलने से ये मामले कानूनी कार्रवाई में आगे नहीं बढ़ सके। हरियाणा में भी शिकायतें दो से बढ़कर 33 हो गईं।
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बिना पंजीकरण एजेंट नहीं कर सकते भर्ती
प्रवासन अधिनियम 1983 की धारा 10 के तहत प्रवासी संरक्षक-जनरल से वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र के बिना कोई व्यक्ति या एजेंसी विदेश रोजगार के लिए भर्ती नहीं कर सकती। नियमों के उल्लंघन पर पंजीकरण रद्द या निलंबित किया जा सकता है। ई-माइग्रेट पोर्टल पर अब तक 3,505 बिना पंजीकरण वाले एजेंटों की जानकारी साझा की गई है।
कनाडा का सपना दिखाया, मॉरीशस भेजकर मुसीबत में फंसाया
लुधियाना के युवक जसविंदर सिंह को कनाडा भेजने का झांसा देकर ट्रैवल एजेंट ने जनवरी 2025 में टूरिस्ट वीजा पर मॉरीशस भेज दिया। वहां पहुंचने के बाद वह कानूनी और व्यावहारिक परेशानियों में फंस गया। करीब एक साल तक हिरासत और जेल में रहने के बाद जुलाई 2026 में भारत लौट सका।
जसविंदर ने आरोप लगाया कि कुछ ट्रैवल एजेंट युवाओं को कनाडा भेजने का सपना दिखाकर टूरिस्ट वीजा पर दूसरे देशों में भेज रहे हैं। वहां पहुंचने के बाद युवाओं को स्थानीय कानून और दूसरी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उसके मुताबिक मॉरीशस में भाषा की समस्या और स्थानीय नियमों की जानकारी न होने से मुश्किल बढ़ गई। टूरिस्ट वीजा पर रोजगार की अनुमति भी नहीं थी। उसने इस मामले को मानव तस्करी जैसे नेटवर्क से जोड़ते हुए एजेंटों पर गंभीर आरोप लगाए।
जसविंदर की घर वापसी के लिए राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने हस्तक्षेप किया। भारतीय दूतावास की मदद से आवश्यक प्रक्रिया पूरी हुई और जुलाई 2026 में वह परिवार के पास लौट सका। मामले ने टूरिस्ट वीजा पर युवाओं को दूसरे देशों में भेजने वाले कथित नेटवर्क पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रवासन अधिनियम 1983 की धारा 10 के तहत प्रवासी संरक्षक-जनरल से वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र के बिना कोई व्यक्ति या एजेंसी विदेश रोजगार के लिए भर्ती नहीं कर सकती। नियमों के उल्लंघन पर पंजीकरण रद्द या निलंबित किया जा सकता है। ई-माइग्रेट पोर्टल पर अब तक 3,505 बिना पंजीकरण वाले एजेंटों की जानकारी साझा की गई है।
कनाडा का सपना दिखाया, मॉरीशस भेजकर मुसीबत में फंसाया
लुधियाना के युवक जसविंदर सिंह को कनाडा भेजने का झांसा देकर ट्रैवल एजेंट ने जनवरी 2025 में टूरिस्ट वीजा पर मॉरीशस भेज दिया। वहां पहुंचने के बाद वह कानूनी और व्यावहारिक परेशानियों में फंस गया। करीब एक साल तक हिरासत और जेल में रहने के बाद जुलाई 2026 में भारत लौट सका।
जसविंदर ने आरोप लगाया कि कुछ ट्रैवल एजेंट युवाओं को कनाडा भेजने का सपना दिखाकर टूरिस्ट वीजा पर दूसरे देशों में भेज रहे हैं। वहां पहुंचने के बाद युवाओं को स्थानीय कानून और दूसरी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उसके मुताबिक मॉरीशस में भाषा की समस्या और स्थानीय नियमों की जानकारी न होने से मुश्किल बढ़ गई। टूरिस्ट वीजा पर रोजगार की अनुमति भी नहीं थी। उसने इस मामले को मानव तस्करी जैसे नेटवर्क से जोड़ते हुए एजेंटों पर गंभीर आरोप लगाए।
जसविंदर की घर वापसी के लिए राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने हस्तक्षेप किया। भारतीय दूतावास की मदद से आवश्यक प्रक्रिया पूरी हुई और जुलाई 2026 में वह परिवार के पास लौट सका। मामले ने टूरिस्ट वीजा पर युवाओं को दूसरे देशों में भेजने वाले कथित नेटवर्क पर सवाल खड़े किए हैं।
नौकरी का झांसा देकर रूस भेजा, सेना में भर्ती का बनाया दबाव
विदेश में नौकरी का सपना लेकर रूस गए जालंधर के रामनगर निवासी आकाशदीप ने ट्रैवल एजेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आकाशदीप के अनुसार एजेंट ने वर्क वीजा पर फूड पैकेजिंग की नौकरी, अच्छा वेतन और रहने-खाने की सुविधा का भरोसा दिया था लेकिन टूरिस्ट वीजा पर रूस भेज दिया। वहां फूड पैकेजिंग की जगह कंस्ट्रक्शन का काम करवाया गया। विरोध करने पर कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल होने का विकल्प दिया गया और लाखों रुपये मिलने का लालच दिया गया। इनकार करने पर एजेंट ने मदद से हाथ खींच लिए। पुलिस कार्रवाई के बाद कई दिन जंगल में छिपकर भूखे-प्यासे रहना पड़ा। भारत लौटने की प्रक्रिया में करीब आठ लाख रुपये खर्च हुए।
कजाखस्तान में भी युवकों से ठगी
कजाखस्तान में फंसे पंजाब के सात-आठ युवकों के मामले ने भी विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी का खुलासा किया। आरोप है कि स्थानीय एजेंट ने ड्राइवर की नौकरी और अच्छी कमाई का भरोसा देकर प्रत्येक युवक से करीब 1.5 लाख रुपये लिए। वहां पहुंचने पर ड्राइवर की नौकरी नहीं मिली। इसके बजाय उनसे कठिन शारीरिक मजदूरी कराई गई। बर्फीले पहाड़ी इलाकों में भारी सामान उठवाया गया।
विदेश में नौकरी का सपना लेकर रूस गए जालंधर के रामनगर निवासी आकाशदीप ने ट्रैवल एजेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आकाशदीप के अनुसार एजेंट ने वर्क वीजा पर फूड पैकेजिंग की नौकरी, अच्छा वेतन और रहने-खाने की सुविधा का भरोसा दिया था लेकिन टूरिस्ट वीजा पर रूस भेज दिया। वहां फूड पैकेजिंग की जगह कंस्ट्रक्शन का काम करवाया गया। विरोध करने पर कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल होने का विकल्प दिया गया और लाखों रुपये मिलने का लालच दिया गया। इनकार करने पर एजेंट ने मदद से हाथ खींच लिए। पुलिस कार्रवाई के बाद कई दिन जंगल में छिपकर भूखे-प्यासे रहना पड़ा। भारत लौटने की प्रक्रिया में करीब आठ लाख रुपये खर्च हुए।
कजाखस्तान में भी युवकों से ठगी
कजाखस्तान में फंसे पंजाब के सात-आठ युवकों के मामले ने भी विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी का खुलासा किया। आरोप है कि स्थानीय एजेंट ने ड्राइवर की नौकरी और अच्छी कमाई का भरोसा देकर प्रत्येक युवक से करीब 1.5 लाख रुपये लिए। वहां पहुंचने पर ड्राइवर की नौकरी नहीं मिली। इसके बजाय उनसे कठिन शारीरिक मजदूरी कराई गई। बर्फीले पहाड़ी इलाकों में भारी सामान उठवाया गया।
19 लाख खर्चे... मोरक्को में एक साल कैदी जैसा रहा
तरनतारन के गांव पंजवड़ निवासी कर्मजीत सिंह औलख ने बताया कि वर्ष 2018 में डंकी रूट से अमेरिका जाने के लिए एजेंट को 19 लाख रुपये दिए थे। 20 जनवरी 2018 को एजेंट ने उन्हें दिल्ली बुलाकर अफ्रीका की फ्लाइट करवा दी। इसके बाद करीब 25 दिन पैदल चलने के बाद उन्हें माली के जंगलों में ले जाया गया। वहां से मोरक्को पहुंचाया गया। एजेंट रोजाना समुद्र पार करवाने का प्रयास करता रहा।
औलख के अनुसार उन्होंने चार-पांच महीने मोरक्को में गुजारे। इसके बाद डोंकर ने आगे ले जाने में असमर्थता जताई और एक कमरा दिलाकर दूसरे डोंकर के आने की बात कहकर चला गया। कमरे में लगातार रहने से उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने दिसंबर में माता-पिता को बताए बिना गांव के दोस्त अमरजीत सिंह से संपर्क किया और टिकट करवाने को कहा। दोस्त ने एक जनवरी 2019 की टिकट करवा दी। इस तरह 19 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद उन्हें करीब एक साल मोरक्को में कैदी की तरह गुजारना पड़ा।
गांव लौटने पर उन्होंने पिता जगीर सिंह को पूरी बात बताई। औलख ने कहा कि विदेश जाकर काम करना गलत नहीं है लेकिन कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए। गैरकानूनी तरीके से विदेश जाने पर पैसे और समय दोनों बर्बाद होते हैं।
विदेश जाने से पहले एजेंट की करें पूरी जांच
इमिग्रेशन विशेषज्ञ एवं वीजा सलाहकार मनीत सिंह खुराना ने कहा कि विदेश जाने की चाह रखने वाले लोग फर्जी इमिग्रेशन एजेंसियों और झूठे वादे करने वाले एजेंटों से सावधान रहें। कई एजेंट कम समय में विदेश भेजने, पक्की नौकरी या वीजा की गारंटी देकर मोटी रकम वसूल लेते हैं। ऐसे झांसे में आने से पहले एजेंसी और एजेंट की पूरी जानकारी जांचना जरूरी है। केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध अधिकृत इमिग्रेशन एजेंटों की सूची से ही एजेंट का सत्यापन करें। विदेश जाने संबंधी सलाह भी अधिकृत एजेंट से ही लें। बिना दस्तावेज पढ़े किसी समझौते पर हस्ताक्षर न करें और भुगतान की रसीद जरूर लें। पासपोर्ट, वीजा या अन्य जरूरी दस्तावेज अनजान व्यक्ति को न सौंपें। सही जानकारी और अधिकृत माध्यम से ही विदेश जाने की प्रक्रिया पूरी करें।
ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी
मानव तस्करी और अवैध एजेंटों के नेटवर्क की गहन जांच होनी चाहिए। कई एजेंट युवाओं की कमाई और बैंक खातों पर कब्जा कर लेते हैं जिससे उनके परिवार आर्थिक और मानसिक संकट झेलते हैं। रूस में कुछ भारतीय युवाओं को जानबूझकर कानूनी और प्रशासनिक पेचों में फंसाने के बाद हिरासत या दबाव में रखकर रूसी सेना में भर्ती के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई। इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। -संत बलबीर सिंह सीचेवाल, राज्यसभा सांसद
तरनतारन के गांव पंजवड़ निवासी कर्मजीत सिंह औलख ने बताया कि वर्ष 2018 में डंकी रूट से अमेरिका जाने के लिए एजेंट को 19 लाख रुपये दिए थे। 20 जनवरी 2018 को एजेंट ने उन्हें दिल्ली बुलाकर अफ्रीका की फ्लाइट करवा दी। इसके बाद करीब 25 दिन पैदल चलने के बाद उन्हें माली के जंगलों में ले जाया गया। वहां से मोरक्को पहुंचाया गया। एजेंट रोजाना समुद्र पार करवाने का प्रयास करता रहा।
औलख के अनुसार उन्होंने चार-पांच महीने मोरक्को में गुजारे। इसके बाद डोंकर ने आगे ले जाने में असमर्थता जताई और एक कमरा दिलाकर दूसरे डोंकर के आने की बात कहकर चला गया। कमरे में लगातार रहने से उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने दिसंबर में माता-पिता को बताए बिना गांव के दोस्त अमरजीत सिंह से संपर्क किया और टिकट करवाने को कहा। दोस्त ने एक जनवरी 2019 की टिकट करवा दी। इस तरह 19 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद उन्हें करीब एक साल मोरक्को में कैदी की तरह गुजारना पड़ा।
गांव लौटने पर उन्होंने पिता जगीर सिंह को पूरी बात बताई। औलख ने कहा कि विदेश जाकर काम करना गलत नहीं है लेकिन कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए। गैरकानूनी तरीके से विदेश जाने पर पैसे और समय दोनों बर्बाद होते हैं।
विदेश जाने से पहले एजेंट की करें पूरी जांच
इमिग्रेशन विशेषज्ञ एवं वीजा सलाहकार मनीत सिंह खुराना ने कहा कि विदेश जाने की चाह रखने वाले लोग फर्जी इमिग्रेशन एजेंसियों और झूठे वादे करने वाले एजेंटों से सावधान रहें। कई एजेंट कम समय में विदेश भेजने, पक्की नौकरी या वीजा की गारंटी देकर मोटी रकम वसूल लेते हैं। ऐसे झांसे में आने से पहले एजेंसी और एजेंट की पूरी जानकारी जांचना जरूरी है। केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध अधिकृत इमिग्रेशन एजेंटों की सूची से ही एजेंट का सत्यापन करें। विदेश जाने संबंधी सलाह भी अधिकृत एजेंट से ही लें। बिना दस्तावेज पढ़े किसी समझौते पर हस्ताक्षर न करें और भुगतान की रसीद जरूर लें। पासपोर्ट, वीजा या अन्य जरूरी दस्तावेज अनजान व्यक्ति को न सौंपें। सही जानकारी और अधिकृत माध्यम से ही विदेश जाने की प्रक्रिया पूरी करें।
ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी
मानव तस्करी और अवैध एजेंटों के नेटवर्क की गहन जांच होनी चाहिए। कई एजेंट युवाओं की कमाई और बैंक खातों पर कब्जा कर लेते हैं जिससे उनके परिवार आर्थिक और मानसिक संकट झेलते हैं। रूस में कुछ भारतीय युवाओं को जानबूझकर कानूनी और प्रशासनिक पेचों में फंसाने के बाद हिरासत या दबाव में रखकर रूसी सेना में भर्ती के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई। इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। -संत बलबीर सिंह सीचेवाल, राज्यसभा सांसद