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क्या आप नहीं चाहते कि आपके बच्चे ताजी हवा में सांस लें: हाईकोर्ट
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-पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक पर सवाल उठाया
-विकास की आड़ में पर्यावरण की बलि स्वीकार्य नहीं: चीफ जस्टिस शील नागू
-राज्य से पूछा, कौन-से पेड़ हैं हेरिटेज और किन्हें काटने की अनुमति चाहिए
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वीरवार को पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों से भावनात्मक सवाल पूछा कि क्या आप नहीं चाहते कि आपके बच्चे और पोते-पोती ताजी हवा में सांस लें? यह टिप्पणी चीफ जस्टिस शील नागू ने मोहाली में शॉपिंग मॉल और अन्य परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विकास की आड़ में पर्यावरण का नुकसान स्वीकार नहीं है। चीफ जस्टिस ने कहा कि निर्माण कार्य इंतजार कर सकता है लेकिन पेड़ और पर्यावरण नहीं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह स्पष्ट करे कि कौन-से पेड़ हेरिटेज हैं और किन्हें काटने की अनुमति मांगी जा रही है।
हाईकोर्ट ने 24 दिसंबर 2025 को पंजाब में किसी भी पेड़ को अदालत की अनुमति के बिना काटने पर पूर्ण रोक लगा दी थी। अब राज्य सरकार ने इस आदेश में संशोधन या हटाने की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि ब्लैंकेट बैन से कई विकास परियोजनाएं ठप हो गई हैं। राज्य ने बताया कि कुछ मंज़ूरशुदा सड़क और शॉपिंग मॉल परियोजनाओं को आगे बढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। एनएचएआई ने भी अबोहर-फाजिल्का सड़क परियोजना के लिए राहत मांगी जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया। परियोजना का 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और 15 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिपूरक वनीकरण किया जा चुका है।
पर्यावरणीय संतुलन पर जोर
अदालत को बताया गया कि पंजाब की कुल वन और वृक्ष भूमि मात्र 5.92 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत 25.17 प्रतिशत से कम है। राज्य का लक्ष्य इसे 2030 तक 7.5 प्रतिशत तक बढ़ाना है। अदालत ने कहा कि पेड़ काटने की अनुमति केवल रेयरेस्ट ऑफ रेयर यानी अत्यंत अपवादात्मक मामलों में दी जा सकती है, जबकि शॉपिंग मॉल इसका उदाहरण नहीं है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि पर्यावरणीय संतुलन के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मामला शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वीरवार को पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों से भावनात्मक सवाल पूछा कि क्या आप नहीं चाहते कि आपके बच्चे और पोते-पोती ताजी हवा में सांस लें? यह टिप्पणी चीफ जस्टिस शील नागू ने मोहाली में शॉपिंग मॉल और अन्य परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विकास की आड़ में पर्यावरण का नुकसान स्वीकार नहीं है। चीफ जस्टिस ने कहा कि निर्माण कार्य इंतजार कर सकता है लेकिन पेड़ और पर्यावरण नहीं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह स्पष्ट करे कि कौन-से पेड़ हेरिटेज हैं और किन्हें काटने की अनुमति मांगी जा रही है।
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हाईकोर्ट ने 24 दिसंबर 2025 को पंजाब में किसी भी पेड़ को अदालत की अनुमति के बिना काटने पर पूर्ण रोक लगा दी थी। अब राज्य सरकार ने इस आदेश में संशोधन या हटाने की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि ब्लैंकेट बैन से कई विकास परियोजनाएं ठप हो गई हैं। राज्य ने बताया कि कुछ मंज़ूरशुदा सड़क और शॉपिंग मॉल परियोजनाओं को आगे बढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। एनएचएआई ने भी अबोहर-फाजिल्का सड़क परियोजना के लिए राहत मांगी जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया। परियोजना का 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और 15 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिपूरक वनीकरण किया जा चुका है।
पर्यावरणीय संतुलन पर जोर
अदालत को बताया गया कि पंजाब की कुल वन और वृक्ष भूमि मात्र 5.92 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत 25.17 प्रतिशत से कम है। राज्य का लक्ष्य इसे 2030 तक 7.5 प्रतिशत तक बढ़ाना है। अदालत ने कहा कि पेड़ काटने की अनुमति केवल रेयरेस्ट ऑफ रेयर यानी अत्यंत अपवादात्मक मामलों में दी जा सकती है, जबकि शॉपिंग मॉल इसका उदाहरण नहीं है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि पर्यावरणीय संतुलन के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मामला शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।