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Patiala News: पंजाब में औद्योगिक प्लॉटों का आरक्षित मूल्य 10 से 15% कम करने की तैयारी
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-पीएसआईईसी संपत्तियों की ई-नीलामी में सुधार, बोलीदाता न मिलने पर आरक्षित मूल्य कम होगा
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने औद्योगिक प्लॉटों और शेडों की नीलामी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब उन संपत्तियों का आरक्षित मूल्य घटाया जाएगा, जिनके लिए बोलीदाता नहीं मिल रहे हैं। नई नीति के तहत आरक्षित मूल्य 10 से 15 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यह बदलाव पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम (पीएसआईईसी) के खाली पड़े औद्योगिक और व्यावसायिक प्लॉटों की नीलामी को सुचारू बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
नीति के अनुसार, सभी प्लॉटों, शेडों, आवासीय और संस्थागत स्थलों को दो बार नीलामी में रखा जाएगा। इसके बावजूद यदि बोलीदाता रुचि नहीं दिखाते, तो राष्ट्रीय बैंकों और आयकर विभाग से सूचीबद्ध तीन स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता संपत्तियों का मूल्यांकन करेंगे। ये मूल्यांकनकर्ता पिछली दो नीलामियों और वर्तमान बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए आरक्षित मूल्य तय करेंगे।
पीएसआईईसी हर वर्ष 31 दिसंबर तक आरक्षित मूल्य निर्धारित करेगा, जबकि इस वर्ष यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2026 तक पूरी की जाएगी। यदि किसी क्षेत्र या सेक्टर में 50% से अधिक प्लॉट बिक जाते हैं, तो अगले वर्ष के लिए औसत बिक्री दर के आधार पर आरक्षित मूल्य तय होगा।
आरक्षित मूल्य घटाने की प्रक्रिया
यदि संपत्ति दो नीलामियों में बिकती नहीं है, तो निदेशक मंडल की मंजूरी के बाद आरक्षित मूल्य 10% घटाया जाएगा। फिर भी नीलामी असफल होने पर यह और 5% घटाया जाएगा। इसके बाद भी बोलीदाता नहीं आते हैं, तो संपत्तियों को पुनः स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं के पास भेजा जाएगा।
व्यावसायिक पॉकेट पर भी लागू
अनियोजित व्यावसायिक पॉकेट की नीलामी भी इसी नीति के तहत होगी। असफल होने पर मूल्यांकनकर्ता द्वारा तय आरक्षित मूल्य पर नीलामी होगी, और यदि फिर भी बोलीदाता रुचि नहीं दिखाते हैं, तो पीएसआईईसी एससीओ और बूथ योजना के तहत आगे बढ़ेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने औद्योगिक प्लॉटों और शेडों की नीलामी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब उन संपत्तियों का आरक्षित मूल्य घटाया जाएगा, जिनके लिए बोलीदाता नहीं मिल रहे हैं। नई नीति के तहत आरक्षित मूल्य 10 से 15 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यह बदलाव पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम (पीएसआईईसी) के खाली पड़े औद्योगिक और व्यावसायिक प्लॉटों की नीलामी को सुचारू बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
नीति के अनुसार, सभी प्लॉटों, शेडों, आवासीय और संस्थागत स्थलों को दो बार नीलामी में रखा जाएगा। इसके बावजूद यदि बोलीदाता रुचि नहीं दिखाते, तो राष्ट्रीय बैंकों और आयकर विभाग से सूचीबद्ध तीन स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता संपत्तियों का मूल्यांकन करेंगे। ये मूल्यांकनकर्ता पिछली दो नीलामियों और वर्तमान बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए आरक्षित मूल्य तय करेंगे।
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पीएसआईईसी हर वर्ष 31 दिसंबर तक आरक्षित मूल्य निर्धारित करेगा, जबकि इस वर्ष यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2026 तक पूरी की जाएगी। यदि किसी क्षेत्र या सेक्टर में 50% से अधिक प्लॉट बिक जाते हैं, तो अगले वर्ष के लिए औसत बिक्री दर के आधार पर आरक्षित मूल्य तय होगा।
आरक्षित मूल्य घटाने की प्रक्रिया
यदि संपत्ति दो नीलामियों में बिकती नहीं है, तो निदेशक मंडल की मंजूरी के बाद आरक्षित मूल्य 10% घटाया जाएगा। फिर भी नीलामी असफल होने पर यह और 5% घटाया जाएगा। इसके बाद भी बोलीदाता नहीं आते हैं, तो संपत्तियों को पुनः स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं के पास भेजा जाएगा।
व्यावसायिक पॉकेट पर भी लागू
अनियोजित व्यावसायिक पॉकेट की नीलामी भी इसी नीति के तहत होगी। असफल होने पर मूल्यांकनकर्ता द्वारा तय आरक्षित मूल्य पर नीलामी होगी, और यदि फिर भी बोलीदाता रुचि नहीं दिखाते हैं, तो पीएसआईईसी एससीओ और बूथ योजना के तहत आगे बढ़ेगा।