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Ajmer: जमीन विवाद का बदला लेने के लिए बेटी से कराया दुष्कर्म का झूठा केस, मां दोषी; बयान से खुली साजिश की परत
Mon, 17 Aug 2026 06:49 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Mon, 17 Aug 2026 06:49 PM IST
सार
अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष ने दो गवाह और 16 दस्तावेज प्रस्तुत किए। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर माना कि परिवादी महिला ने पड़ोसी को अपमानित करने, धमकाने और जमीन विवाद को गंभीर बनाने के लिए अपनी नाबालिग बेटी को माध्यम बनाया।
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पॉक्सो कोर्ट संख्या-1
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 ने पड़ोसी से जमीन विवाद का बदला लेने के लिए अपनी नाबालिग बेटी के जरिए दुष्कर्म का झूठा मामला दर्ज कराने वाली मां को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी महिला पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड जमा न कराने की स्थिति में महिला को साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। पॉक्सो कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह ने यह फैसला सुनाया है।
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झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने का मामला
सरकारी वकील प्रशांत यादव ने बताया कि परिवादी महिला ने 26 सितंबर, 2024 को पुलिस थाने में रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी 17 साल की नाबालिग बेटी खेत में फसल की रखवाली कर रही थी। उसी दौरान पड़ोसी उसकी बेटी को अपने खेत में ले गया और दुष्कर्म किया। महिला ने यह दावा भी किया था कि बेटी के खून निकलने पर आरोपी ने घटना के संबंध में किसी को भी न बताने को लेकर धमकाया था। उसने नाबालिग को पैसे और खाने का लालच भी दिया था।
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जांच में खुली साजिश की पोल
पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो शुरुआती स्तर पर ही महिला के आरोप संदिग्ध प्रतीत हुए। पुलिस ने नाबालिग बेटी के अलग से बयान दर्ज किए। बयानों के दौरान नाबालिग ने दुष्कर्म की किसी भी घटना से इन्कार कर दिया। नाबालिग बेटी ने पुलिस के समक्ष खुलासा किया कि उनके परिवार का पड़ोसी के साथ जमीन तथा मवेशी चराने की जगह को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। पुलिस ने सच्चाई सामने आने पर मामले में एफआर पेश कर दी, जिसे अदालत ने 8 जनवरी, 2025 को स्वीकार कर लिया।
पॉक्सो एक्ट में सुनाई गई सजा
अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष ने दो गवाह और 16 दस्तावेज प्रस्तुत किए। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर माना कि परिवादी महिला ने पड़ोसी को अपमानित करने, धमकाने और जमीन विवाद को गंभीर बनाने के लिए अपनी नाबालिग बेटी को माध्यम बनाया। महिला ने पड़ोसी पर दुष्कर्म का झूठा और गंभीर आरोप लगाया था। अदालत ने महिला को पोक्सो एक्ट की धारा 22(1) के तहत दोषी ठहराया और उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।