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Ajmer News: राहुल गांधी ने वादा निभाया, बस बॉडी बनाने वाले कारीगरों के बीच पहुंचे, गहलोत ने साझा किया वीडियो

Mon, 06 Jul 2026 10:33 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: प्रिया वर्मा Updated Mon, 06 Jul 2026 10:33 PM IST
सार

पुष्कर दौरे के दौरान बस बॉडी निर्माण इकाई में राहुल गांधी की कारीगरों से हुई बातचीत का वीडियो अब सामने आया है। कारीगरों ने राहुल से बातचीत में स्थानीय उद्योग को संरक्षण, बसों की सुरक्षा और सरकारी नीतियों को लेकर अपनी चिंताएं खुलकर रखीं।

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Ajmer News: Rahul Gandhi Keeps His Promise, Visits Bus Body Makers; Gehlot Shares Video
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 1 जून को राजस्थान के पुष्कर दौरे के दौरान गंगवाना स्थित एक बस बॉडी निर्माण इकाई के दौरे का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो के साथ वहां मौजूद बस बॉडी निर्माताओं और कारीगरों से हुई बातचीत का विवरण भी सामने आया है, जिसमें उद्योग की चुनौतियों, सुरक्षा मानकों और सरकारी नीतियों पर चर्चा की गई।

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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह वीडियो साझा करते हुए बताया कि राहुल गांधी ने मार्च 2026 में संसद भवन में बस बॉडी मेकर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उनके कारखाने का दौरा करने का वादा किया था। उसी वादे के तहत 1 जून को पुष्कर से लौटते समय उन्होंने गंगवाना स्थित फैक्ट्री का दौरा किया। करीब आधे घंटे तक फैक्ट्री में रहे राहुल गांधी ने बस बॉडी निर्माण की पूरी प्रक्रिया को देखा और कारीगरों व उद्योग से जुड़े लोगों की समस्याएं सुनीं।

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बातचीत के दौरान बस बॉडी निर्माताओं ने बताया कि वाहन निर्माता कंपनियां केवल बस या ट्रक का चेसिस उपलब्ध कराती हैं, जबकि पूरी बॉडी स्थानीय स्तर पर तैयार की जाती है। उनका कहना था कि कई बार बसों में आग लगने की घटनाओं के लिए स्थानीय बॉडी बिल्डर्स को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, जबकि उनके अनुसार कई मामलों में आग लगने का कारण वाहन निर्माता कंपनियों की इलेक्ट्रिकल वायरिंग होती है। कारीगरों ने यह भी दावा किया कि वे मजबूत लोहे की बॉडी तैयार करते हैं, जबकि कई कंपनियों की फैक्ट्री-निर्मित बॉडी में फाइबर फ्रंट का उपयोग किया जाता है, जो दुर्घटना की स्थिति में अपेक्षाकृत जल्दी क्षतिग्रस्त हो सकता है।

बस बॉडी मेकर्स ने सरकारी नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विदेशी कंपनियों, विशेषकर वोल्वो को अधिक प्रोत्साहन मिलता है। उनका कहना था कि यदि स्थानीय उद्योग को भी समान अवसर और संरक्षण मिले तो भारतीय बस बॉडी निर्माण उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि पर्याप्त सरकारी समर्थन नहीं मिलने पर यह पारंपरिक उद्योग भविष्य में संकट का सामना कर सकता है। बातचीत के दौरान बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। कारीगरों ने बताया कि उनके यहां तैयार होने वाली प्रत्येक बस में दो से तीन इमरजेंसी एग्जिट दिए जाते हैं, ताकि दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

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