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Jhunjhunu: गोवा में हादसे का शिकार हुए नौसेना जवान ने दम तोड़ा, डेढ़ साल की मासूम के सिर से उठा पिता का साया
Fri, 10 Jul 2026 06:19 PM IST
झुंझुनू ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनू
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Published by: झुंझुनू ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2026 06:19 PM IST
सार
तेज अंधड़ में पेड़ की डाल गिरने से घायल हुए भारतीय नौसेना के जवान कुलदीप दिवाच जिंदगी की जंग हार गए। चार दिन तक चले उपचार के बाद उनके निधन की खबर से गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
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नौसेना जवान कुलदीप दिवाच का निधन, सैनिक सम्मान से होगा अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के सूरजगढ़ क्षेत्र की धरड़ू की ढाणी में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब भारतीय नौसेना के जवान कुलदीप दिवाच के निधन की खबर गांव पहुंची। गोवा में ड्यूटी पर जाते समय हुए हादसे में गंभीर रूप से घायल कुलदीप ने 96 घंटे तक मौत से जंग लड़ने के बाद 9 जुलाई को दम तोड़ दिया। उनके निधन से परिवार के साथ पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
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जानकारी के अनुसार कुलदीप दिवाच 6 जुलाई को गोवा में ड्यूटी के लिए जा रहे थे। इसी दौरान तेज अंधड़ के कारण एक पेड़ की भारी डाल उनके ऊपर गिर गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लगातार चार दिन तक उपचार चला, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
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कुलदीप दिवाच 10 अगस्त 2018 को भारतीय नौसेना में भर्ती हुए थे और पूरी निष्ठा के साथ देश सेवा कर रहे थे। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण का प्रतीक रहा। बचपन में ही पिता सुभाषचंद्र के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां सुभिता पर आ गई थी। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में बच्चों का पालन-पोषण किया और उन्हें देश सेवा के योग्य बनाया। आज वही मां अपने जवान बेटे के निधन से गहरे सदमे में हैं।
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कुलदीप अपने पीछे पत्नी संगीता, 18 माह की बेटी हर्षिता, मां और अन्य परिजनों को छोड़ गए हैं। उनकी मासूम बेटी अभी इतनी छोटी है कि उसे यह भी एहसास नहीं कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। कुलदीप के बड़े भाई प्रदीप भी भारतीय वायुसेना में कार्यरत हैं और देश सेवा में लगे हुए हैं।
सैनिक कल्याण अधिकारी सुरेश जांगिड़ ने बताया कि शुक्रवार को कुलदीप दिवाच का उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार से पहले उनके सम्मान में तिरंगा यात्रा भी निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और आसपास के क्षेत्रों के लोग शामिल होंगे। परिवार और गांव के लोग नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देंगे।