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जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को फिर दो दिन की रिमांड पर भेजा गया; पूर्व सीएस पंत का लिया नाम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Mon, 13 Apr 2026 10:23 AM IST
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सार

जल जीवन मिशन घोटाले के मामले में आरोपी पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को एसीबी ने कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उनको दो दिन की रिमांड पर फिर एसीबी को सौंप दिया है। उनसे पूछताछ के लिए तीन दिन की रिमांड एसीबी ने कोर्ट से मांगी थी। 

Jal Jeevan Scam: Ex-IAS in Court, ACB Seeks Remand
सुबोध अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जल जीवन मिशन घोटाले के मामले में आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को सोमवार को एसीबी ने कोर्ट में पेश किया। इस दौरान एसीबी ने उनसे पूछताछ के लिए तीन दिन की रिमांड की मांग की, जिसका बचाव पक्ष ने कड़ा विरोध किया। इसके बाद कोर्ट ने आगे की कार्रवाई और पूछताछ के लिए दो दिन की रिमांड मंजूर की है। 

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बचाव पक्ष की दलील
सुबोध अग्रवाल के वकील ने कोर्ट में कहा कि रिमांड प्रार्थना पत्र की कॉपी उन्हें नहीं दी गई है, जबकि कानून के अनुसार आरोपी को यह दस्तावेज उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वह अपना सही बचाव कर सके।
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ACB का पक्ष
एसीबी की ओर से वकील ने दलील दी कि रिमांड आवेदन केस डायरी का हिस्सा होता है, इसलिए इसकी कॉपी देना जरूरी नहीं है।

कोर्ट की कार्यवाही
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने एसीबी को अपने तर्क के समर्थन में कानूनी प्रावधान या आदेश पेश करने के लिए 15 मिनट का समय दिया।

सुबोध अग्रवाल का बयान
कोर्ट में पेशी के दौरान सुबोध अग्रवाल ने मीडिया से कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है और एसीबी के सभी सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि फाइनेंस कमेटी के 37 मामलों में से केवल 4 मामले उनसे जुड़े हैं, जबकि बाकी 33 मामले पूर्व अधिकारियों के कार्यकाल के हैं, जिनमें करीब 600 करोड़ रुपये का मामला शामिल है।
 

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अग्रवाल ने यह भी आरोप लगाया कि जिन मामलों में वास्तविक भुगतान और गबन हुआ है, उनकी जांच पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गलत मामलों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, जबकि असली गड़बड़ी वाले मामलों की जांच नहीं हो रही है।
सुबोध अग्रवाल ने कहा, “मैंने पूछताछ में पूरा सहयोग किया है। जो भी सवाल मुझसे पूछे गए, मैंने बता दिए। फाइनेंस कमेटी के 37 प्रकरणों में से 4 मेरे हैं। बाकी 33 सुधांश पंत के समय के हैं, जिसमें 600 करोड़ का मामला है। मैंने एसीबी से बार-बार कहा कि जिसमें पैसा नहीं दिया गया उसका नाम ले रहे हो, उसकी जांच कर रहे हो। जिसमें पैसा देकर गबन हुआ उसकी जांच नहीं कर रहे।”


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