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Ajmer News: अजमेर दरगाह केस में सुनवाई पर कानूनी रोक नहीं, 18 अप्रैल को कोर्ट के सामने पेश होंगे पक्षकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अजमेर ब्यूरो Updated Fri, 27 Feb 2026 04:36 PM IST
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सार

Ajmer News: अजमेर शरीफ दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई स्थगन आदेश नहीं है। नए पक्षकारों के आवेदन स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उनकी प्रतियां संबंधित पक्षों को देने के निर्देश दिए और अगली सुनवाई 18 अप्रैल 2026 तय की।

Hearing on claim of existence of Shiva temple in Ajmer Dargah next date fixed for April 18
अजमेर शरीफ - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

अजमेर शरीफ दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता और महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार द्वारा दायर याचिका पर आज अदालत में सुनवाई हुई। विष्णु गुप्ता की ओर से अधिवक्ता संदीप कुमार ने अदालत के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकरण पर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोई स्थगन आदेश (स्टे) जारी नहीं किया गया है, जिससे सुनवाई पर कोई कानूनी रोक नहीं है।

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पक्षकार बनाए जाने की सुनवाई में हुई देरी
अधिवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि मूल रूप से सुनवाई इस बिंदु पर होनी थी कि क्या सुप्रीम कोर्ट का कोई ऐसा आदेश है, जिसके कारण इस मामले की कार्यवाही रोकी जाए। उन्होंने कहा कि अब तक सुप्रीम कोर्ट से ऐसा कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है, जो इस प्रकरण को प्रभावित करता हो। हालांकि, अन्य पक्षकारों तथा कुछ नए व्यक्तियों द्वारा स्वयं को पक्षकार बनाए जाने हेतु प्रार्थना पत्र दाखिल किए जाने के कारण सुनवाई में विलंब हुआ।
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कोर्ट ने सुनवाई के लिए तय की तारीख
न्यायालय ने सभी नए प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उनकी प्रतियां संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब इस पर आपत्तियां दर्ज की जाएंगी कि संबंधित आवेदक पक्षकार बनाए जाने योग्य हैं या नहीं। इसके साथ ही अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 18 अप्रैल 2026 निर्धारित की है।

अजमेर शरीफ दरगाह में त्रिशूल जैसे चिन्ह 
अधिवक्ता संदीप कुमार ने अदालत में यह भी बताया कि दरगाह परिसर से संबंधित कुछ फोटो और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर चिश्ती समुदाय के लोगों द्वारा साझा किए गए हैं। इनका अवलोकन करने पर लगभग 25 से 26 स्थानों पर त्रिशूल जैसे चिन्ह दिखाई देने का दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि इन वीडियो और फोटो की सत्यता का निर्धारण माननीय न्यायालय करेगा तथा दरगाह कमेटी को इस पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।

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'स्मारक किसका यह कोर्ट तय करेगा'
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि ये चिन्ह वास्तव में प्राचीन हैं और किसी धातु की शीट पर बनाए गए हैं, तो उन्हें काटने या हटाने का उद्देश्य क्या है। उन्होंने कहा कि यह स्मारक हिंदू है या मुस्लिम, इसका निर्णय न्यायालय करेगा। किंतु किसी भी स्थिति में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करना न्यायालय की गरिमा और न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान है। अधिवक्ता ने आगे कहा कि सौ वर्ष से अधिक पुराने किसी भी स्मारक को प्राचीन स्मारक की श्रेणी में रखा जाता है और यदि उसके साथ किसी प्रकार की तोड़फोड़ या हेरफेर की जाती है, तो यह कानूनन अपराध है। आवश्यकता पड़ने पर इस विषय में संबंधित मंत्रालय को भी पत्र लिखा जाएगा। फिलहाल, पूरे मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल 2026 को होगी, जिसमें सभी पक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।



 

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