Ajmer: फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का खुलासा, अजमेर से लेकर भरतपुर तक फैला है नेटवर्क
Ajmer: पुलिस ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी लाभ दिलाने वाले गिरोह के चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से विभिन्न सरकारी और मेडिकल विभागों की फर्जी मुहरें बरामद हुई हैं। पुलिस अब गिरोह से जुड़े लोगों को पकड़ने में जुटी हुई है।
विस्तार
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाकर लोगों को सरकारी नौकरियों और सुविधाओं का लाभ दिलाने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने इस मामले में चौथे आरोपी, जेएलएन अस्पताल से सेवानिवृत्त कर्मचारी दिलीप वैष्णव को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से मेडिकल, शिक्षा, नगर निगम सहित विभिन्न विभागों की कुल 27 फर्जी मुहरें बरामद की गई हैं।
5 साल से अवैध धंधे में शामिल था कर्मचारी
सिविल लाइंस थानाप्रभारी शंभु सिंह ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया है कि दिलीप वैष्णव पिछले करीब पांच वर्षों से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र तैयार करने के अवैध धंधे में संलिप्त था। आरोपी के पास से ईएनटी विभाग के डॉ. महेश गुप्ता, डॉ. संजीव नैनीवाल, नेत्र रोग, मनोरोग, हड्डी रोग, आयुर्वेदिक विभाग, शिक्षा विभाग, मेडिकल कॉलेज, नगर निगम सहित अन्य संस्थानों की फर्जी मुहरें जब्त की गई हैं।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस यह जांच कर रही है कि ये फर्जी मुहरें कहां से और किसके माध्यम से बनवाई गई थीं। साथ ही इस पूरे नेटवर्क में और किन-किन लोगों की भूमिका रही है, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं।
पहले हो चुकी है तीन आरोपियों की गिरफ्तारी
इससे पहले पुलिस ने डेगाना (नागौर) निवासी अरुण शर्मा को गिरफ्तार किया था, जिसने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर आरपीएससी में तीन वर्षों तक स्टेनोग्राफर के पद पर नौकरी की। इसके अलावा ई-मित्र संचालक रामनिवास और उसके सहयोगी मोडूराम चौधरी को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। न्यायालय के आदेश पर अरुण शर्मा, रामनिवास और मोडूराम चौधरी को जेल भेज दिया गया है, जबकि दिलीप वैष्णव से फिलहाल गहन पूछताछ की जा रही है।
राजस्थान के कई शहरों में फैला है नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क अजमेर, नागौर, टोंक, भीलवाड़ा, जयपुर, कोटा, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर और भरतपुर सहित कई जिलों तक फैला हुआ है। आरोपियों ने अजमेर से अन्य जिलों के 300 से अधिक लोगों को विभिन्न प्रकार के फर्जी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए, जिनमें 20 से अधिक फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र शामिल हैं।
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पुलिस ने क्या बताया?
कई मामलों में सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा भी फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाकर अनुचित लाभ उठाने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए कितने लोगों को सरकारी नौकरी या अन्य शासकीय सुविधाओं का लाभ मिला। जांच के दायरे में कुछ और सरकारी कर्मचारियों और दलालों के नाम सामने आने की संभावना है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
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