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Alwar: पुलिस हिरासत में टॉर्चर से परेशान होकर युवक ने की आत्महत्या, नाबालिग साथी ने लगाए गंभीर आरोप; जानें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 15 Jul 2025 07:43 PM IST
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सार

Alwar: नाबालिग साथी ने बताया कि वह 7 जुलाई को शाम 6 बजे घर से बिस्किट लेने निकला था तभी पुलिसकर्मी उसे गाड़ी में बैठाकर ले गए। पुलिस ने उसे टेल्को सर्किल के पास एक निर्माणाधीन मकान पर ले जाकर कबाड़ चोरी के बारे में पूछताछ की। करीब तीन घंटे बाद अमित को भी लाकर लॉकअप में बंद कर दिया गया।

Alwar: Frustrated by torture in police custody youth commits suicide news in hindi
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अलवर के शिवाजी पार्क थाना क्षेत्र के रहने वाले अमित सैनी (21) ने चोरी के मामले में पुलिस हिरासत से छूटने के बाद आत्महत्या कर ली। मृतक के नाबालिग साथी ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने लॉकअप में दोनों को बुरी तरह टॉर्चर किया और उन पर चोरी के 16 मामलों को कबूल करने का दबाव बनाया गया।

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नाबालिग के मुताबिक, पुलिस ने अमित को चार बार दूसरे कमरे में ले जाकर पीटा और उसके प्राइवेट पार्ट्स के बाल तक उखाड़ दिए। बाहर आने के बाद मानसिक दबाव में आकर अमित ने 9 जुलाई को जहर खाकर जान दे दी।

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नाबालिग साथी ने बताया कि वह 7 जुलाई को शाम 6 बजे घर से बिस्किट लेने निकला था तभी पुलिसकर्मी उसे गाड़ी में बैठाकर ले गए। पुलिस ने उसे टेल्को सर्किल के पास एक निर्माणाधीन मकान पर ले जाकर कबाड़ चोरी के बारे में पूछताछ की। करीब तीन घंटे बाद अमित को भी लाकर लॉकअप में बंद कर दिया गया।

नाबालिग का आरोप है कि उसने पुलिस को बताया कि वह नाबालिग है, लेकिन फिर भी उसकी उम्र 19 साल लिखकर लॉकअप में रखा गया। उसे भी बारी-बारी से दूसरे कमरे में ले जाकर पीटा गया। 8 जुलाई को उसकी नानी ने जमानत कराई। इसके बाद पुलिस ने दोनों को फिर थाने बुलाया। नाबालिग तो अपना सामान लेकर आ गया लेकिन अमित को उसका पर्स और मोबाइल पुलिस ने वापस नहीं किया। पुलिस ने उसे अगले दिन आने को कहा था। अगले दिन अमित ने जहर खा लिया।


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परिजनों ने आरोप लगाया कि थाने पहुंचने पर पुलिस ने FIR से दोषी पुलिसकर्मियों के नाम हटाने का दबाव भी बनाया। अमित की दादी ने कहा कि पुलिस ने पोते का मोबाइल, पर्स और बाइक तक नहीं लौटाई। नाबालिग ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे शांतिभंग के आरोप में SDM कोर्ट में पेश किया, जबकि किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश करना चाहिए था। किसी नाबालिग को पुलिस लॉकअप में रखना और टॉर्चर करना कानून का उल्लंघन है।

एडिशनल SP ग्रामीण डॉ. प्रियंका ने कहा कि नाबालिग को लॉकअप में रखना नियमों के खिलाफ है। आरोपों की जांच थाने के CCTV कैमरों से कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

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