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राजस्थान के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देगी पचपदरा रिफाइनरी: सीएम ने लिया तैयारियों का जायजा; पीएम मोदी आएंगे
Mon, 13 Apr 2026 10:34 PM IST
बालोतरा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
Published by: बालोतरा ब्यूरो
Updated Mon, 13 Apr 2026 10:34 PM IST
सार
पचपदरा रिफाइनरी अब अंतिम चरण में है और 21 अप्रैल को पीएम मोदी इसका लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को तैयारियों का निरीक्षण किया।
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पचपदरा रिफाइनरी का निरीक्षण किया
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाली पचपदरा रिफाइनरी अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। आगामी 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण करेंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बालोतरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी परिसर का दौरा कर तैयारियों का विस्तृत निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने इसे राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट और मुख्य कंट्रोल रूम का जायजा लिया। उन्होंने तकनीकी विशेषज्ञों से बातचीत कर परियोजना की प्रगति की जानकारी ली और संचालन से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की।
जनसभा और व्यवस्थाओं पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित जनसभा स्थल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी को देखते हुए पेयजल, छाया और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यातायात और पार्किंग व्यवस्था को लेकर पुलिस और परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल पर राजस्थान की पारंपरिक कला और संस्कृति की झलक दिखनी चाहिए, ताकि बाहर से आने वाले लोगों को प्रदेश की विरासत का अनुभव मिल सके।
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रोजगार और आर्थिक विकास की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिफाइनरी के शुरू होने से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके आसपास औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने आमजन और कार्यकर्ताओं से लोकार्पण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। यह रिफाइनरी “जीरो लिक्विड इफ्लुएंट डिस्चार्ज” तकनीक पर आधारित है, जिससे किसी प्रकार का तरल अपशिष्ट बाहर नहीं छोड़ा जाएगा। इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें- पंचायत-निकाय चुनाव टालने की मांग, सरकार पहुंची हाईकोर्ट; 15 दिसंबर तक का समय मांगा
क्षमता और तकनीकी विशेषताएं
इस परियोजना की सालाना रिफाइनिंग क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल की है। साथ ही 2 मिलियन टन क्षमता का पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी विकसित किया गया है। यह देश की आधुनिक बीएस-6 मानकों पर आधारित रिफाइनरी है। यहां रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन एक साथ किया जाएगा। यहां कच्चा तेल मुख्य रूप से अरब देशों से आयात किया जाएगा, जबकि राजस्थान में उत्पादित लगभग 1.5 मिलियन टन कच्चे तेल का भी उपयोग होगा।
परियोजना का सफर और लागत
इस परियोजना की नींव 2013 में रखी गई थी। 2018 में इसे दोबारा गति मिली। समय के साथ इसकी लागत बढ़कर लगभग 79 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह एचपीसीएल और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है।
प्रशासनिक तैयारियां तेज
मुख्यमंत्री ने बैठक कर सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत निर्देश दिए। हेलिपैड पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर कई मंत्री, सांसद और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री ने इसे राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट और मुख्य कंट्रोल रूम का जायजा लिया। उन्होंने तकनीकी विशेषज्ञों से बातचीत कर परियोजना की प्रगति की जानकारी ली और संचालन से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की।
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जनसभा और व्यवस्थाओं पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित जनसभा स्थल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी को देखते हुए पेयजल, छाया और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यातायात और पार्किंग व्यवस्था को लेकर पुलिस और परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल पर राजस्थान की पारंपरिक कला और संस्कृति की झलक दिखनी चाहिए, ताकि बाहर से आने वाले लोगों को प्रदेश की विरासत का अनुभव मिल सके।
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रोजगार और आर्थिक विकास की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिफाइनरी के शुरू होने से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके आसपास औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने आमजन और कार्यकर्ताओं से लोकार्पण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। यह रिफाइनरी “जीरो लिक्विड इफ्लुएंट डिस्चार्ज” तकनीक पर आधारित है, जिससे किसी प्रकार का तरल अपशिष्ट बाहर नहीं छोड़ा जाएगा। इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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क्षमता और तकनीकी विशेषताएं
इस परियोजना की सालाना रिफाइनिंग क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल की है। साथ ही 2 मिलियन टन क्षमता का पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी विकसित किया गया है। यह देश की आधुनिक बीएस-6 मानकों पर आधारित रिफाइनरी है। यहां रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन एक साथ किया जाएगा। यहां कच्चा तेल मुख्य रूप से अरब देशों से आयात किया जाएगा, जबकि राजस्थान में उत्पादित लगभग 1.5 मिलियन टन कच्चे तेल का भी उपयोग होगा।
परियोजना का सफर और लागत
इस परियोजना की नींव 2013 में रखी गई थी। 2018 में इसे दोबारा गति मिली। समय के साथ इसकी लागत बढ़कर लगभग 79 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह एचपीसीएल और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है।
प्रशासनिक तैयारियां तेज
मुख्यमंत्री ने बैठक कर सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत निर्देश दिए। हेलिपैड पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर कई मंत्री, सांसद और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।