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Barmer News: खेजड़ी पेड़ों को बचाने के लिए विधायक भाटी की पहल, किस कानून के लिए विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर Published by: बाड़मेर ब्यूरो Updated Mon, 01 Sep 2025 07:50 PM IST
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सार

Barmer News: शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को विस्तृत पत्र लिखा है। विधायक भाटी ने आगामी विधानसभा सत्र में इस विषय पर विशेष चर्चा करवाने और प्रदेश में शीघ्र ही 'खेजड़ी संरक्षण कानून' लागू करने की मांग की है।

Barmer News: MLA Ravindra Bhati's initiative to save Khejri trees, wrote a letter to Speaker of Assembly
विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
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विस्तार

राजस्थान की मरुस्थलीय पारिस्थितिकी और ग्रामीण संस्कृति की धुरी मानी जाने वाली खेजड़ी वृक्ष के संरक्षण को लेकर शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने बड़ा कदम उठाया है। भाटी ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को पत्र लिखकर आगामी विधानसभा सत्र में इस विषय पर विशेष चर्चा की मांग की है। उन्होंने प्रदेश में शीघ्र ही ‘खेजड़ी संरक्षण कानून’ लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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‘खेजड़ी: मरुस्थल की जीवनरेखा और संस्कृति का प्रतीक’
अपने पत्र में विधायक भाटी ने लिखा कि खेजड़ी वृक्ष सदियों से मरुस्थलीय जीवन का सहारा रहा है। यह केवल एक पेड़ नहीं बल्कि ग्रामीणों की आजीविका, पशुपालन और पारिस्थितिक संतुलन का मजबूत स्तंभ है। पशुओं के लिए चारे, भूमि की नमी बनाए रखने और जैव विविधता को संजोए रखने में इसकी अहम भूमिका है। यही कारण है कि 31 अक्तूबर 1983 को इसे राजस्थान का राज्य वृक्ष घोषित किया गया था।
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भाटी ने कहा कि खेजड़ी और ओरण भूमि ग्रामीण समाज के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से भी जुड़ी रही है। पीढ़ियों से लोग इन्हें पवित्र मानकर संरक्षित करते आए हैं, लेकिन आज औद्योगिक गतिविधियों और सरकारी लापरवाही के कारण यह परंपरा कमजोर होती जा रही है।
 
अवैध कटाई और औद्योगिक अतिक्रमण से संकट गहराया
विधायक भाटी ने पत्र में उल्लेख किया कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य औद्योगिक विस्तार की वजह से खेजड़ी वृक्षों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हो रही है। खासकर जैसलमेर और बीकानेर जिलों में हजारों पेड़ों की कटाई से न केवल पर्यावरणीय संकट बढ़ा है, बल्कि भूजल स्तर भी खतरनाक स्तर तक गिर गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक सोलर प्लांट के निर्माण में लगभग 26 वर्ग किलोमीटर भूमि पर हजारों खेजड़ी वृक्ष नष्ट कर दिए गए। इससे पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ा और ग्रामीणों को चारा, ईंधन और अन्य संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।



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‘धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर पर भी मंडरा रहा खतरा’
भाटी ने कहा कि खेजड़ी वृक्ष सिर्फ पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी राजस्थान की आत्मा से जुड़ा है। बिश्नोई समाज के बलिदान और ग्रामीण समुदाय की आस्था से यह हमेशा संरक्षण और समर्पण का प्रतीक रहा है। लेकिन आज अंधाधुंध कटाई और ओरण भूमि पर अतिक्रमण के चलते यह सांस्कृतिक धरोहर मिटने के कगार पर पहुंच चुकी है।
 
खेजड़ी संरक्षण कानून की सख्त जरूरत
विधायक भाटी ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक आदेश या अस्थायी कदम पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए विधानसभा द्वारा ठोस और ‘स्थायी खेजड़ी संरक्षण कानून’ लागू करना अनिवार्य है। इस कानून में अवैध कटाई और अतिक्रमण पर कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिए, साथ ही स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं आवश्यक हैं, लेकिन इन्हें पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन के साथ ही संचालित किया जाना चाहिए। हर परियोजना से पहले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और स्थानीय निवासियों की सहमति लेना जरूरी है।
 
सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान
विधायक भाटी ने यह भी कहा कि खेजड़ी संरक्षण का यह मुद्दा उनकी व्यक्तिगत पहल नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की सामूहिक आवश्यकता है। उन्होंने सभी विधायकों से आग्रह किया कि विधानसभा सत्र में इस पर गहन चर्चा हो और ऐसा मजबूत कानून बने, जो मरुस्थल की पारिस्थितिकी, ओरण भूमि और खेजड़ी वृक्षों की रक्षा कर सके।

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