निकाय चुनाव: भीलवाड़ा में भाजपा का दबदबा, 45 वार्ड जीते; मेयर की कुर्सी के लिए इन तीन नामों पर नजर
भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 70 में से 45 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है और नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना तय हो गया है। चुनाव में कई बड़े राजनीतिक चेहरों को हार का सामना करना पड़ा।
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भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव के नतीजों ने शहर की राजनीति में कई नए समीकरण बना दिए हैं। 70 वार्डों के परिणाम सामने आने के बाद भाजपा ने 45 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना तय हो गया है। चुनाव परिणामों में कई बड़े चेहरों को भी झटका लगा है और ऐसे कई नेता चुनाव हार गए, जिनकी जीत को लेकर पहले से चर्चा थी। अब नतीजों के बाद सबसे ज्यादा नजर महापौर पद को लेकर है।
इस बार भीलवाड़ा नगर निगम का महापौर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में भाजपा की महिला पार्षदों के बीच महापौर पद की दावेदारी तेज हो गई है। फिलहाल वार्ड 61 से जीतीं पूर्णिमा जैन, वार्ड 60 से विजयी सुमन ओझा और वार्ड 31 से निर्वाचित ममता बाहेती के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
महापौर की दावेदार मानी जा रहीं खुशबू शुक्ला चुनाव हारीं
नगर निगम चुनाव में भाजपा की ओर से महापौर पद की दावेदार मानी जा रहीं खुशबू शुक्ला को बड़ा झटका लगा है। वार्ड 35 से चुनाव मैदान में उतरीं खुशबू शुक्ला को निर्दलीय प्रत्याशी उदय लाल ने हरा दिया। उनकी हार के बाद भाजपा में महापौर पद के समीकरण भी बदल गए हैं। इसी तरह भाजपा प्रवक्ता विनोद झूर्रानी की पत्नी प्रीति झूर्रानी को भी वार्ड 41 में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी ममता ठाकुर ने शिकस्त दी।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष की पत्नी और कई बड़े नेता भी हारे
चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए भी झटकों से भरे रहे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष जीपी खटीक की पत्नी समदू देवी खटीक वार्ड 52 से चुनाव हार गईं। उन्हें भाजपा प्रत्याशी रमेश खोईवाल ने पराजित किया। वहीं, चार बार लगातार कांग्रेस से पार्षद रह चुकीं और महापौर पद की दावेदार मानी जा रहीं मंजू पोखरना को वार्ड 26 में भाजपा के शंकर लाल जाट ने हरा दिया। कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष धर्मेंद्र पारीक को भी भाजपा प्रत्याशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की लीला नारानीवाल भी चुनाव जीतने में सफल नहीं रहीं।
45 वार्ड जीतकर भाजपा ने बोर्ड बनाने का रास्ता साफ किया
70 वार्डों के नतीजे सामने आने के बाद भाजपा ने 45 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। ऐसे में नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना तय माना जा रहा है। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती महापौर के नाम पर सहमति बनाने की है। महापौर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के कारण भाजपा की निर्वाचित महिला पार्षदों में से ही किसी एक को यह जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। पार्टी के भीतर संभावित नामों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
पूर्णिमा जैन का नाम सबसे आगे
वार्ड 61 से चुनाव जीतने वाली पूर्णिमा जैन को महापौर पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। पूर्णिमा जैन भाजपा के पूर्व प्रवक्ता विजय पोखरना की पत्नी हैं। उन्होंने पहली बार नगर निगम चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है। विजय पोखरना को भाजपा के पूर्व विधायक विठ्ठल शंकर अवस्थी का करीबी माना जाता है। पार्टी और संघ से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं के साथ भी उनके अच्छे संबंध बताए जाते हैं। इसी वजह से पूर्णिमा जैन की दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है।
सुमन ओझा के पास पार्षद रहने का अनुभव
वार्ड 60 से निर्वाचित सुमन ओझा भी महापौर पद की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। वह सांसद दामोदर अग्रवाल और पूर्व महापौर राकेश पाठक के करीबी माने जाने वाले राकेश ओझा की भाभी हैं। सुमन ओझा इससे पहले वर्ष 2016 में भी पार्षद रह चुकी हैं। ऐसे में उनके पास नगर निगम के कामकाज का अनुभव भी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर उनके नाम पर सहमति बनती है तो उनकी दावेदारी मजबूत हो सकती है।
ममता बाहेती भी महापौर की दौड़ में
वार्ड 31 से जीत दर्ज करने वाली ममता बाहेती का नाम भी महापौर पद की दौड़ में शामिल है। वह भाजपा नेता सुबोध बाहेती की पत्नी हैं। सुबोध बाहेती को संघ और विचार परिवार से जुड़े लोगों के बीच मजबूत पकड़ रखने वाला माना जाता है।
भाजपा नेताओं के साथ-साथ संघ और विभिन्न हिंदू संगठनों में उनकी सक्रियता और संपर्कों को देखते हुए ममता बाहेती की दावेदारी को भी अहम माना जा रहा है।
अब भाजपा नेतृत्व के फैसले पर टिकी नजर
भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण बोर्ड गठन में फिलहाल कोई बड़ी राजनीतिक अड़चन नजर नहीं आ रही है। अब सबसे ज्यादा दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि पार्टी महापौर की कुर्सी के लिए किस महिला पार्षद के नाम पर मुहर लगाती है।