Bundi: आवारा कुत्ते ने सात साल के मासूम की नाक नोची, तीन घंटे की सर्जरी से बची जान; डॉक्टरों ने किया कमाल
बूंदी में आवारा कुत्ते के हमले में सात वर्षीय कौशल गुर्जर की नाक गंभीर रूप से घायल हो गई। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टरों ने तीन घंटे तक चली प्लास्टिक सर्जरी में 150 टांके लगाकर नाक का सफल पुनर्निर्माण किया। बच्चे की हालत स्थिर है।
बूंदी में आवारा कुत्ते के हमले में सात वर्षीय कौशल गुर्जर की नाक गंभीर रूप से घायल हो गई। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टरों ने तीन घंटे तक चली प्लास्टिक सर्जरी में 150 टांके लगाकर नाक का सफल पुनर्निर्माण किया। बच्चे की हालत स्थिर है।
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राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बूंदी के डॉक्टरों ने सात साल के एक बच्चे की जटिल प्लास्टिक सर्जरी कर उसकी नाक को फिर से ठीक कर दिया। जहाजपुर क्षेत्र के उराना गांव निवासी कौशल गुर्जर पर एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया था। हमले में उसकी नाक बुरी तरह फट गई थी। करीब तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में डॉक्टरों ने 150 टांके लगाकर उसकी नाक को दोबारा जोड़ दिया। फिलहाल बच्चे की हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर है।
जानकारी के अनुसार, कौशल अपनी मां के साथ कहीं जा रहा था। तभी एक आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। हमले में उसकी नाक का बाहरी और अंदरूनी हिस्सा बुरी तरह जख्मी हो गया। चोट इतनी गहरी थी कि त्वचा, नाक की हड्डी (कार्टिलेज) और अंदर की परत तक फट गई। बताया गया कि इसी कुत्ते ने इलाके के कई अन्य लोगों को भी घायल किया था। बाद में ग्रामीणों ने उसे मार दिया। घटना के बाद बच्चे को तुरंत राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बूंदी के ट्रॉमा सेंटर लाया गया। यहां डॉ. अमर शर्मा ने प्राथमिक इलाज किया और एंटी-रेबीज वैक्सीन सहित जरूरी उपचार शुरू किया।
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बच्चे की हालत देखते हुए प्लास्टिक सर्जन डॉ. आशीष व्यास ने तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला लिया। करीब तीन घंटे तक चली सर्जरी डॉ. आशीष व्यास और डॉ. शुभम व्यास ने की। इस दौरान डॉ. सीमा मीणा और डॉ. ममता शर्मा ने एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी संभाली, जबकि नर्सिंग अधिकारी मुकेश सैनी ने ऑपरेशन में सहयोग किया।डॉक्टरों ने नाक की सभी क्षतिग्रस्त परतों को सावधानी से जोड़कर उसकी बनावट को पहले जैसा करने की कोशिश की। ऑपरेशन के दौरान करीब 150 टांके लगाए गए।
डॉ. आशीष व्यास ने बताया कि बच्चे की हालत अब ठीक है और एक सप्ताह में घाव भरने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि निजी अस्पताल में इस तरह की सर्जरी पर करीब एक लाख रुपये तक खर्च आ सकता था, लेकिन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बूंदी में यह पूरा इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मुफ्त किया।