राजस्थान: प्रसूता की मौत के बाद जनाना अस्पताल में तीन घंटे हंगामा, शव ले जाने पर पुलिस-परिजनों में हुई नोकझोंक
जिला अस्पताल के जनाना अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए करीब तीन घंटे तक हंगामा किया। शव को मोर्चरी ले जाने को लेकर पुलिस और परिजनों के बीच नोकझोंक हुई। अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही से इनकार करते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है।
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विस्तार
बूंदी जिला अस्पताल परिसर स्थित जनाना अस्पताल में रविवार को प्रसूता की मौत के बाद जमकर हंगामा हो गया। धनातरी गांव निवासी प्रसूता निशा मीणा की प्रसव के दौरान मौत होने के बाद परिजनों ने अस्पताल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। परिजन जिम्मेदार चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़ गए और काफी देर तक लेबर रूम से शव नहीं उठाने दिया। स्थिति बिगड़ने की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा परिजनों से समझाइश का प्रयास किया।
मामला बढ़ने पर कोतवाली थाना पुलिस के साथ अन्य थानों से भी पुलिस बल मौके पर बुलाया गया। अस्पताल परिसर और मुख्य गेट के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। डीएसपी अनिल जोशी, तहसीलदार सहित पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार परिजनों से बातचीत करते रहे।
प्रसव के दौरान बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, धनातरी गांव निवासी निशा मीणा को प्रसव के लिए 7 अगस्त को जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, प्रसव के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। परिजनों का आरोप है कि गंभीर स्थिति के बावजूद समय पर उचित उपचार नहीं मिला। उनका कहना था कि निशा काफी देर तक दर्द और परेशानी में रहीं तथा उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद प्रसूता की मौत हो गई।
निशा की मौत की सूचना मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया। परिजनों का कहना था कि यदि समय पर उचित उपचार और चिकित्सकीय सहायता मिलती तो प्रसूता की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, राहत की बात यह रही कि नवजात बच्चे को बचा लिया गया। बच्चे की स्थिति को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
शव उठाने को लेकर बढ़ा विवाद
प्रसूता की मौत के बाद परिजन काफी देर तक लेबर रूम से शव नहीं उठाने पर अड़े रहे। प्रशासन की ओर से शव को एंबुलेंस के जरिए मोर्चरी में शिफ्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन परिजनों ने एंबुलेंस को रोक दिया। इसके बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। एंबुलेंस को रोकने के दौरान पुलिस और परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
आक्रोशित परिजनों ने कार्रवाई की मांग दोहराते हुए शव को ले जाने का विरोध किया। इस दौरान कुछ परिजन काफी आक्रोशित नजर आए। आरोप है कि हंगामे के दौरान एंबुलेंस पर पत्थर से हमला करने की कोशिश भी की गई। वहीं, एक महिला ने पुलिसकर्मियों के पास मौजूद रिपोर्ट संबंधी दस्तावेज को लेकर भी आपत्ति जताई। महिला का आरोप था कि पुलिस द्वारा फर्जी रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की जा रही है। इस पर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने संबंधित कागजात दिखाकर स्पष्ट किया कि किसी प्रकार की फर्जी रिपोर्ट तैयार नहीं की गई है।
करीब 20 मिनट तक एंबुलेंस रोकी
शव को मोर्चरी ले जाने के दौरान एंबुलेंस को करीब 20 मिनट तक रोके रखा गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार परिजनों को समझाने का प्रयास किया। बाद में मीणा समाज के जिला अध्यक्ष भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने परिजनों से बातचीत कर समझाइश की। काफी प्रयासों के बाद परिजन शांत हुए और शव को एंबुलेंस के जरिए मोर्चरी ले जाने दिया गया।
हालांकि, शव मोर्चरी पहुंचने के बाद भी अस्पताल के बाहर गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। परिजन इलाज में लापरवाही के आरोप में कार्रवाई की मांग करते रहे। मौके पर मौजूद तहसीलदार, डीएसपी अनिल जोशी सहित अन्य अधिकारी परिजनों से बातचीत कर उन्हें समझाते रहे।
अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार
इधर, पूरे मामले को लेकर जनाना अस्पताल के सह प्रभारी गोविंद गुप्ता ने अस्पताल प्रशासन की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही से इनकार किया। गोविंद गुप्ता के अनुसार, निशा मीणा को 7 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय बच्चेदानी का मुंह पूरी तरह खुला नहीं था। उनके अनुसार, अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने परिजनों को स्थिति के बारे में समझाते हुए सीजेरियन डिलीवरी यानी ऑपरेशन की सलाह दी थी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि परिजन लगातार सामान्य प्रसव कराने पर जोर दे रहे थे।
सह प्रभारी ने बताया कि इस संबंध में विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओर से सरकारी पर्ची पर भी परामर्श दिया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस डॉक्टर पर परिजनों की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी रविवार को ड्यूटी नहीं थी। उनकी जगह दो अन्य डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी और उनके द्वारा समय पर उपचार किया जा रहा था।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, प्रथम दृष्टया लापरवाही जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। हालांकि, मामले की जांच कराने की बात कही गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
तीन घंटे तक चला हंगामा
प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल परिसर में करीब तीन घंटे तक हंगामे की स्थिति बनी रही। शुरुआत में परिजन लेबर रूम के बाहर जमा रहे। इसके बाद शव को मोर्चरी ले जाने के प्रयास के दौरान विवाद और बढ़ गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार परिजनों से समझाइश की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली के अलावा अन्य पुलिस थानों से भी पुलिस बल मौके पर बुलाया गया। अस्पताल परिसर में पुलिसकर्मी तैनात रहे। अधिकारियों का प्रयास था कि किसी भी स्थिति में विवाद हिंसक रूप न ले और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
परिजन लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि जिस डॉक्टर की ड्यूटी के दौरान उपचार हुआ, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें मामले की जांच कराने और जांच के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बिजली व्यवस्था को लेकर भी उठे सवाल
हंगामे के दौरान अस्पताल की बिजली व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए। परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान कई बार बिजली गुल हुई। इससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। प्रसूता की मौत के बाद पहले से ही तनावपूर्ण माहौल के बीच बिजली व्यवस्था बाधित होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई।
घटना के बाद एक ओर जहां परिजन अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रशासन ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। ऐसे में अब पूरे मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसूता की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उपचार के दौरान किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।
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जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की ओर से मामले को शांत कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। परिजनों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी चिकित्सक या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। वहीं, अस्पताल प्रशासन ने भी जांच कराने की बात कही है।
ऐसे में अब जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। प्रसूता की मौत के वास्तविक कारण, प्रसव के दौरान सामने आई जटिलताओं, उपचार की प्रक्रिया और चिकित्सकीय निर्णयों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रसव के दौरान गंभीर मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रसूता की मौत से आहत परिजन।

बूंदी जनाना अस्पताल में प्रसूता की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप।