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चित्तौड़गढ़ दुर्ग में एएसआई का बड़ा एक्शन: सुबह चार बजे गरजे बुलडोजर, दो मंजिला अवैध निर्माण ध्वस्त

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़ Published by: चित्तौड़गढ़ ब्यूरो Updated Sun, 14 Jun 2026 07:48 PM IST
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सार

चित्तौड़गढ़ दुर्ग में एएसआई की भूमि पर बने दो मंजिला अवैध कमर्शियल निर्माण को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। नौ जेसीबी और पांच ट्रैक्टरों की मदद से 0.14 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई गई। अधिकारियों ने इसे एएसआई भूमि पर हुई सबसे बड़ी कार्रवाई बताया है।

Rajasthan ASI Executes Biggest Anti-Encroachment Operation at Chittorgarh Fort Illegal Complex Demolished
अतिक्रमण ध्वस्त करने की कार्रवाई - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग में रविवार को प्रशासन ने बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की भूमि पर बने दो मंजिला अवैध कमर्शियल निर्माण को ध्वस्त कर दिया। जिला कलेक्टर डॉ. मंजू के निर्देश पर नगर परिषद, पुलिस और एएसआई की संयुक्त टीम ने करीब 0.14 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। अधिकारियों का दावा है कि राजस्थान में एएसआई की भूमि से अतिक्रमण हटाने की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।


सुबह चार बजे शुरू हुई कार्रवाई
संवेदनशील माने जा रहे इस अभियान को पूरी गोपनीयता और सुरक्षा के साथ अंजाम दिया गया। रविवार तड़के करीब चार बजे नगर परिषद, पुलिस और एएसआई की संयुक्त टीम भारी पुलिस बल के साथ दुर्ग क्षेत्र में पहुंची। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए रामपोल से राणा रतन सिंह महल तक के मार्ग को बंद कर दिया गया और वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। सभी तैयारियां पूरी होने के बाद अवैध निर्माण को हटाने का काम शुरू किया गया।
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नौ जेसीबी और पांच ट्रैक्टरों से ढहाया गया निर्माण
करीब 0.14 हेक्टेयर भूमि पर फैले मजबूत दो मंजिला निर्माण को हटाने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कार्रवाई में नौ जेसीबी मशीनें और पांच ट्रैक्टर लगाए गए। कई घंटे चले अभियान के दौरान पूरे ढांचे को चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त कर मलबे में तब्दील कर दिया गया। अधिकारियों की निगरानी में मलबे को ट्रैक्टरों के जरिए निर्धारित स्थान पर पहुंचाया गया।
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ऐतिहासिक पत्थरों के उपयोग का आरोप
जांच में सामने आया कि निर्माण के दौरान पुरातात्विक नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि निर्माणकर्ताओं ने खुदाई से निकले पत्थरों के साथ-साथ दुर्ग क्षेत्र के आसपास मौजूद ऐतिहासिक पत्थरों का भी उपयोग किया। बताया गया कि इस अवैध कमर्शियल परिसर में एक आलीशान स्विमिंग पूल बनाने की तैयारी भी चल रही थी। इसके लिए जमीन में गहरा गड्ढा खोदा गया था।

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2024 से चल रहा था विवाद
यह मामला वर्ष 2024 में सामने आया था, जब एएसआई की आपत्तियों के बावजूद निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। विभाग की ओर से कई बार चेतावनी और नोटिस जारी किए गए, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रोका गया। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में नीमच निवासी नीलेश भटनागर और अंकुर नामक व्यक्ति इस निर्माण से जुड़े हुए थे। एएसआई के उप अधीक्षक मनोज द्विवेदी ने बताया कि संबंधित पक्षों को कानूनी नोटिस देकर सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया था। इसके बावजूद निर्माण जारी रहा। बाद में दिल्ली स्थित महानिदेशक कार्यालय से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद कार्रवाई की गई।

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अतिक्रमण के आंकड़ों ने भी खड़े किए सवाल
कार्रवाई के दौरान एएसआई की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2005 में दुर्ग परिसर में 64 कमर्शियल अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे, जबकि 2026 तक यह संख्या बढ़कर 69 हो गई। स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में कई नए व्यावसायिक निर्माण खड़े हुए हैं, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में उनकी संख्या सीमित दिखाई गई है। हालांकि एएसआई ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 1992 से पहले बने पुराने आवासीय मकानों को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन नए व्यावसायिक निर्माणों और अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

भारी पुलिस बल रहा तैनात
पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा, उपखंड अधिकारी बिनू देवल, पुलिस उपाधीक्षक बृजेश सिंह, कोतवाली थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत, सदर थानाधिकारी प्रेमचंद, नगर परिषद आयुक्त रविंद्र सिंह यादव सहित पुलिस, नगर परिषद और एएसआई के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद दुर्ग क्षेत्र में अवैध निर्माण करने वालों और भू-माफियाओं में हड़कंप का माहौल है।
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