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Rajasthan: चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर एएसआई का बड़ा एक्शन, 209 अवैध निर्माण चिन्हित; भू-माफियाओं में मचा हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
Published by: चित्तौड़गढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jun 2026 03:22 PM IST
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सार
यूनेस्को विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में एएसआई ने 209 से अधिक अवैध निर्माण और अतिक्रमण चिन्हित किए हैं। जिला प्रशासन ने 2020 के बाद बने निर्माणों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय मंजूरी मिलते ही होटल, रेस्टोरेंट समेत कई अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चल सकता है।
अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने की तैयारी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग में वर्षों से जारी अवैध निर्माण और अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की हालिया रिपोर्ट में दुर्ग क्षेत्र के भीतर 209 से अधिक आवासीय और व्यावसायिक अतिक्रमणों की पहचान की गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने कार्रवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं।
अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश
जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए वर्ष 2020 के बाद हुए सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एएसआई के सर्वे में सामने आया है कि दुर्ग की प्राचीर के भीतर नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए गए हैं।
होटल-रेस्टोरेंट समेत कई व्यावसायिक निर्माण निशाने पर
सर्वे में चिन्हित अतिक्रमणों में कई पक्के व्यावसायिक निर्माण शामिल हैं। इनमें अवैध रूप से संचालित होटल, रेस्टोरेंट, हैंडीक्राफ्ट शोरूम और अन्य व्यावसायिक भवन प्रमुख हैं। इनमें से कई निर्माण इतने ऊंचे हो चुके हैं कि वे शहर के निचले हिस्सों से भी स्पष्ट दिखाई देते हैं।
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मरम्मत कार्य भी सामने आए
इसके अलावा बड़ी संख्या में कच्चे अतिक्रमण, आवासीय विस्तार और बिना अनुमति कराए गए मरम्मत कार्य भी सामने आए हैं। प्रशासन के अनुसार दुर्ग क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति के नाम भूमि का स्वामित्व या पट्टा नहीं है और यहां जमीन की रजिस्ट्री भी नहीं की जा सकती। ऐसे में सभी नए निर्माण अवैध माने जाएंगे।
निर्माण और मरम्मत कार्य तत्काल रोकने के निर्देश
कलेक्टर ने अधिकारियों की बैठक लेकर दुर्ग क्षेत्र में चल रहे सभी प्रकार के निर्माण और मरम्मत कार्य तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों और भू-माफियाओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने को कहा गया है। पुरातत्व विभाग द्वारा पूर्व में जारी नोटिसों पर भी त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिन मामलों में अब तक ध्वस्तीकरण के आदेश जारी नहीं हुए हैं, उनकी फाइलों की समीक्षा कर कार्रवाई तेज करने को कहा गया है।
2020 के बाद बने 7-8 बड़े कमर्शियल अतिक्रमण रडार पर
राजस्व विभाग के सत्यापन में वर्ष 2020 के बाद करीब 7 से 8 बड़े व्यावसायिक अतिक्रमण सामने आए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता इन्हीं निर्माणों के खिलाफ सबसे पहले कार्रवाई करने की है। उल्लेखनीय है कि अकेले वर्ष 2024 में एएसआई ने ऐसे मामलों में 67 नोटिस जारी किए थे।
ये भी पढ़ें- NEET Paper Leak: कोटा, प्रयागराज, पटना और दिल्ली..., नीट पेपर लीक के खिलाफ कांग्रेस चलाएगी देशव्यापी अभियान
कानून के तहत संरक्षित है पूरा दुर्ग क्षेत्र
चित्तौड़गढ़ दुर्ग का पूरा क्षेत्र 'प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958' के तहत संरक्षित है। केंद्र सरकार और एएसआई की पूर्व अनुमति के बिना यहां किसी भी प्रकार का नया निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत या विस्तार कार्य प्रतिबंधित है। नियमों के उल्लंघन पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना हो सकता है। अवैध निर्माण हटाने में आने वाला खर्च भी संबंधित अतिक्रमणकारी से वसूला जाएगा।
केंद्रीय मंजूरी के बाद शुरू होगा ध्वस्तीकरण अभियान
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई अवैध निर्माणों पर नोटिस चस्पा कर संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने की अंतिम चेतावनी दी जा चुकी है। निर्धारित समय में निर्माण नहीं हटाने पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
चूंकि पक्के निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय स्तर की स्वीकृति आवश्यक होती है, इसलिए एएसआई ने संबंधित फाइलें जोधपुर क्षेत्रीय कार्यालय और दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेज दी हैं। अंतिम मंजूरी मिलते ही दुर्ग क्षेत्र में बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जाएगा। जिला प्रशासन और एएसआई के सख्त रुख के बाद अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश
जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए वर्ष 2020 के बाद हुए सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एएसआई के सर्वे में सामने आया है कि दुर्ग की प्राचीर के भीतर नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए गए हैं।
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होटल-रेस्टोरेंट समेत कई व्यावसायिक निर्माण निशाने पर
सर्वे में चिन्हित अतिक्रमणों में कई पक्के व्यावसायिक निर्माण शामिल हैं। इनमें अवैध रूप से संचालित होटल, रेस्टोरेंट, हैंडीक्राफ्ट शोरूम और अन्य व्यावसायिक भवन प्रमुख हैं। इनमें से कई निर्माण इतने ऊंचे हो चुके हैं कि वे शहर के निचले हिस्सों से भी स्पष्ट दिखाई देते हैं।
मरम्मत कार्य भी सामने आए
इसके अलावा बड़ी संख्या में कच्चे अतिक्रमण, आवासीय विस्तार और बिना अनुमति कराए गए मरम्मत कार्य भी सामने आए हैं। प्रशासन के अनुसार दुर्ग क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति के नाम भूमि का स्वामित्व या पट्टा नहीं है और यहां जमीन की रजिस्ट्री भी नहीं की जा सकती। ऐसे में सभी नए निर्माण अवैध माने जाएंगे।
निर्माण और मरम्मत कार्य तत्काल रोकने के निर्देश
कलेक्टर ने अधिकारियों की बैठक लेकर दुर्ग क्षेत्र में चल रहे सभी प्रकार के निर्माण और मरम्मत कार्य तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों और भू-माफियाओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने को कहा गया है। पुरातत्व विभाग द्वारा पूर्व में जारी नोटिसों पर भी त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिन मामलों में अब तक ध्वस्तीकरण के आदेश जारी नहीं हुए हैं, उनकी फाइलों की समीक्षा कर कार्रवाई तेज करने को कहा गया है।
2020 के बाद बने 7-8 बड़े कमर्शियल अतिक्रमण रडार पर
राजस्व विभाग के सत्यापन में वर्ष 2020 के बाद करीब 7 से 8 बड़े व्यावसायिक अतिक्रमण सामने आए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता इन्हीं निर्माणों के खिलाफ सबसे पहले कार्रवाई करने की है। उल्लेखनीय है कि अकेले वर्ष 2024 में एएसआई ने ऐसे मामलों में 67 नोटिस जारी किए थे।
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कानून के तहत संरक्षित है पूरा दुर्ग क्षेत्र
चित्तौड़गढ़ दुर्ग का पूरा क्षेत्र 'प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958' के तहत संरक्षित है। केंद्र सरकार और एएसआई की पूर्व अनुमति के बिना यहां किसी भी प्रकार का नया निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत या विस्तार कार्य प्रतिबंधित है। नियमों के उल्लंघन पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना हो सकता है। अवैध निर्माण हटाने में आने वाला खर्च भी संबंधित अतिक्रमणकारी से वसूला जाएगा।
केंद्रीय मंजूरी के बाद शुरू होगा ध्वस्तीकरण अभियान
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई अवैध निर्माणों पर नोटिस चस्पा कर संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने की अंतिम चेतावनी दी जा चुकी है। निर्धारित समय में निर्माण नहीं हटाने पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
चूंकि पक्के निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय स्तर की स्वीकृति आवश्यक होती है, इसलिए एएसआई ने संबंधित फाइलें जोधपुर क्षेत्रीय कार्यालय और दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेज दी हैं। अंतिम मंजूरी मिलते ही दुर्ग क्षेत्र में बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जाएगा। जिला प्रशासन और एएसआई के सख्त रुख के बाद अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।