Chittorgarh: हरियाली तीज पर एक स्वरूप में दिखाई दिए सांवलिया सेठ, पहली बार एक जैसी पोशाक में तीनों प्रतिमाएं
हरियाली तीज पर रतलाम निवासी श्रद्धालु कांतिलाल पोरवाल ने सांवलिया सेठ की तीनों प्रतिमाओं के लिए एक जैसी धोती-कुर्ता पोशाक और मोरपंखी मुकुट भेंट किए। पहली बार तीनों प्रतिमाएं एक स्वरूप में नजर आईं, जिससे दर्शन अत्यंत आकर्षक हो गए।
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वैश्विक आस्था का केंद्र बने चित्तौड़गढ़ स्थित भगवान श्री सांवलिया सेठ की महिमा देश-विदेश तक फैली है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और अपनी भावनाएं प्रकट करते हैं। भगवान सांवलिया सेठ की कुल तीन प्रतिमाएं हैं, इनमें एक प्रतिमा सांवलियाजी (मंडफिया गांव), दूसरी भादसोड़ा चौराहा (बागुंड) और तीसरी भादसोड़ा गांव में स्थापित है। इन तीनों स्थलों पर दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हरियाली तीज के अवसर पर एक श्रद्धालु की ओर से भगवान सांवलिया सेठ की तीनों प्रतिमाओं का एक जैसी पोशाक में श्रृंगार करवाया गया। अपने गुरु की भावना को सम्मान देने के लिए श्रद्धालु ने एक जैसी पोशाक तैयार करवा कर पुजारियों को प्रदान की। परिणामस्वरूप, तीनों प्रतिमाएं एक जैसे स्वरूप में नजर आईं।
जानकारी के अनुसार, भगवान श्री सांवलिया सेठ के मंदिर में जन-जन की आस्था जुड़ी हुई है। यहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और कई बार एंटीक वस्तुएं भी भेंट स्वरूप चढ़ाते हैं। सावन के महीने में श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में भी लगातार वृद्धि हो रही है। सावन के रविवार को हरियाली तीज के अवसर पर तीनों प्रतिमाओं का श्रृंगार एक समान रूप में किया गया। तीनों प्रतिमाओं की पोशाक एक जैसी होने के कारण यह पहचान पाना कठिन हो गया कि कौन-सी प्रतिमा किस स्थान की है।
बताया गया कि रतलाम निवासी कांतिलाल पोरवाल (हींग व्यापारी) ने इन तीनों प्रतिमाओं के लिए एक जैसी पोशाकें तैयार करवाईं। उन्होंने मंदिर के पुजारियों से आग्रह किया, जिन्होंने श्रद्धा से तीनों प्रतिमाओं को यह पोशाक धारण करवाई। जो श्रद्धालु इन तीनों मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचे या सोशल मीडिया पर तस्वीरें देख रहे हैं, वे यह देखकर चकित हो गए कि सभी प्रतिमाएं एक जैसी पोशाक में एक जैसे स्वरूप में दिखाई दे रही हैं।
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धोती-कुर्ता पहने, मोर पंखी मुकुट बना आकर्षण
हरियाली तीज के अवसर पर भगवान के लिए विशेष रूप से धोती-कुर्ता की पोशाक तैयार की गई। साथ ही भगवान के लिए सफेद कलंगी वाला मुकुट भी बनवाया गया, जिसमें मोर पंख लगे हुए हैं, जो इसे और अधिक आकर्षक बना रहे हैं। कांतिलाल पोरवाल ने बताया कि उन्होंने भगवान की तीनों प्रतिमाओं की पोशाक बनवाने के लिए पहले लुधियाना में संपर्क किया था। वहां से विशेष पोशाक बनवाने की योजना थी, लेकिन प्रतिमाओं के आकार छोटे-बड़े होने के कारण कारीगर पोशाक तैयार नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने भादसोड़ा में ही पोशाक तैयार करवाई।
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गुरु की भावना का किया सम्मान
रतलाम निवासी कांतिलाल पोरवाल के गुरु, चित्तौड़गढ़ स्थित हजारेश्वर महादेव मंदिर के श्रीमहंत चंद्रभारती महाराज हैं। हाल ही में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जब वह गुरु पूजन के लिए पहुंचे, तब श्रीमहंत ने भावना व्यक्त की कि यदि सांवलिया सेठ की तीनों प्रतिमाएं एक जैसी पोशाक में सजाई जाएं तो वह अत्यंत सुंदर प्रतीत होंगी। अपने गुरु की इस भावना का सम्मान करते हुए पोरवाल ने यह कार्य किया। हरियाली तीज के एक दिन पूर्व कांतिलाल पोरवाल अपने पुत्र चेतन पोरवाल और परिवार के साथ सांवलियाजी पहुंचे और तीनों मंदिरों में पुजारियों को पोशाक भेंट की।