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चित्तौड़गढ़ में प्यार की 'सजा': अपनी मर्जी से शादी करने वाली सगी बहनों को पिता ने माना मृत; छपवाई शोक पत्रिका

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़ Published by: चित्तौड़गढ़ ब्यूरो Updated Sat, 30 May 2026 10:46 PM IST
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सार

चित्तौड़गढ़ के कपासन क्षेत्र में प्रेम विवाह करने वाली दो सगी बहनों को उनके पिता ने सामाजिक रूप से मृत घोषित कर दिया। परिवार ने दोनों जीवित बेटियों की शोक पत्रिका छपवाकर 4 जून को ‘पीहर गोरनी’ कार्यक्रम रखने की घोषणा की है। मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Chittorgarh  Angry Father Holds Death Rituals for Daughters Alive After Inter-Caste Marriage
दो सगी बहनों को पिता ने माना मृत - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक परंपराओं, पारिवारिक भावनाओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। परिवार की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह करने वाली दो सगी बहनों को उनके पिता ने सामाजिक रूप से मृत मान लिया है। इतना ही नहीं, दोनों बेटियों के नाम से शोक पत्रिका तक छपवा दी गई है और 4 जून को उनके नाम पर ‘पीहर गोरनी’ कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई है।


अपनी पसंद से बहनों ने की थी शादी
जानकारी के अनुसार, कपासन थाना क्षेत्र के देवरिया गांव की दो सगी बहनों ने अलग-अलग समय पर अपनी पसंद से विवाह किया। बड़ी बेटी करीब डेढ़ वर्ष पहले परिवार की इच्छा के विरुद्ध विवाह कर अपने पति के साथ रहने लगी थी। वहीं हाल ही में छोटी बेटी भी घर छोड़कर अपनी पसंद के युवक के साथ विवाह कर उसके साथ रहने लगी। परिजनों ने छोटी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। हालांकि पुलिस के समक्ष पेश होने पर युवती ने बालिग होने और अपनी इच्छा से विवाह कर पति के साथ रहने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने नियमानुसार उसके बयान दर्ज कर लिए। बताया जा रहा है कि दोनों बेटियों के फैसले से आहत परिवार ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पिता और परिजनों ने दोनों बेटियों को सामाजिक रूप से मृत घोषित करते हुए उनकी शोक पत्रिका छपवा दी, जिसे गांव और समाज में वितरित किया जा रहा है।
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घर के बाहर रखी शोक बैठक
शोक पत्रिका में 4 जून को ‘पीहर गोरनी’ कार्यक्रम आयोजित करने का उल्लेख भी किया गया है। गांव में परिवार के घर के बाहर शोक बैठक जैसी व्यवस्था की गई है, जहां समाज के लोग पहुंचकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। यह घटनाक्रम पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर कानून बालिग युवक-युवतियों को अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार देता है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक परंपराएं और पारिवारिक मान्यताएं कई बार ऐसे फैसलों को स्वीकार नहीं कर पातीं। कपासन का यह मामला इसी सामाजिक और भावनात्मक टकराव की एक अनोखी मिसाल बनकर सामने आया है।
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