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Dausa: 12 करोड़ के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश, सिलिकोसिस सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉक्टर और रेडियोग्राफर गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
Published by: दौसा ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2026 07:28 PM IST
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सार
राजस्थान के दौसा जिले में सिलिकोसिस के फर्जी सर्टिफिकेट बनाने का बड़ा घोटाला सामने आया है। इसमें फर्जी सिलिकोसिस सर्टिफिकेट जारी करने वाले 2 सरकारी डॉक्टर और 1 रेडियोग्राफर गिरफ्तार किया गया है।
2 सरकारी डॉक्टर और रेडियोग्राफर गिरफ्तार
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान के दौसा जिले में सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के मामले में पुलिस ने करीब दो साल बाद बड़ी कार्रवाई की। सोमवार शाम को दो सरकारी डॉक्टर और एक रेडियोग्राफर को गिरफ्तार किया गया। मंगलवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए गिरफ्तारी के आदेश दे दिए।
दरअसल, यह मामला साल 2024 में कोतवाली थाना में दर्ज हुआ था। जांच में साइबर सेल की मदद ली गई और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। सिलिकोसिस कार्ड बनाने की ऑनलाइन प्रक्रिया नवंबर 2022 में शुरू हुई थी, जिसके 10 महीनों में 2,755 फर्जी कार्ड बनाए गए, जो प्रदेश के कुल कार्ड का करीब 46 प्रतिशत थे।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि जिन मरीजों को सिलिकोसिस नहीं था, उन्हें भी प्रमाण पत्र जारी किए गए। वहीं, वास्तविक मरीजों के कार्ड रिजेक्ट कर दिए गए। रेडियोग्राफर द्वारा अपलोड किए गए एक्स-रे में भी गड़बड़ी मिली। इसके परिणामस्वरूप 413 मामलों में ऑटो अप्रूवल प्रक्रिया के तहत 12.39 करोड़ रुपए का गलत भुगतान हुआ।
इनको गिरफ्तार किया गया
पुलिस ने डॉ. मनोज ऊंचवाल, डॉ. डीएन शर्मा और रेडियोग्राफर मनोहर लाल को गिरफ्तार किया। सभी पर फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने और सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं। इस मामले की जांच के लिए दो अलग-अलग कमेटियां बनाई गई थीं – एक जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज की ओर से और दूसरी दौसा जिला कलेक्टर की। जांच में साफ हुआ कि दौसा में सबसे ज्यादा फर्जी कार्ड बनाए गए और कुछ चिकित्सा अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई।
सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई
चिकित्सा विभाग के निदेशक ने दौसा जिला अस्पताल के 8 मेडिकल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। पहले भी महुवा जिला हॉस्पिटल के कुछ डॉक्टर और रेडियोलॉजिस्ट को निलंबित किया जा चुका था। इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच भी जारी है।
सिलिकोसिस और सरकारी मदद
सिलिकोसिस खदानों में काम करने वाले श्रमिकों में अधिक देखने को मिलती है। राज्य सरकार ने 2019 में सिलिकोसिस नीति लागू की थी, जिसके तहत कार्ड धारकों को 3 लाख रुपए आर्थिक सहायता, मासिक पेंशन 1,500 रुपए, और मृत्यु होने पर परिवार को अतिरिक्त राशि दी जाती है।
ये भी पढ़ें- LPG Crisis: एक पंप, पूरा शहर और एक किलोमीटर लंबी लाइन; अजमेर में भूखे-प्यासे घंटों खड़े रहे ऑटो चालक
एक्स-रे का इस्तेमाल करके कई बार फर्जी कार्ड बनाए गए
जांच में सामने आया कि सरकारी अनुदान का लाभ लेने के लिए दौसा में फर्जी सिलिकोसिस सर्टिफिकेट बनाए गए। सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर और कर्मचारी भी इस घोटाले में शामिल थे। एक ही एक्स-रे का कई बार इस्तेमाल कर फर्जी कार्ड बनाए गए, जिससे सरकार को करीब 12 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच भी जारी है।
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दरअसल, यह मामला साल 2024 में कोतवाली थाना में दर्ज हुआ था। जांच में साइबर सेल की मदद ली गई और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। सिलिकोसिस कार्ड बनाने की ऑनलाइन प्रक्रिया नवंबर 2022 में शुरू हुई थी, जिसके 10 महीनों में 2,755 फर्जी कार्ड बनाए गए, जो प्रदेश के कुल कार्ड का करीब 46 प्रतिशत थे।
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कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि जिन मरीजों को सिलिकोसिस नहीं था, उन्हें भी प्रमाण पत्र जारी किए गए। वहीं, वास्तविक मरीजों के कार्ड रिजेक्ट कर दिए गए। रेडियोग्राफर द्वारा अपलोड किए गए एक्स-रे में भी गड़बड़ी मिली। इसके परिणामस्वरूप 413 मामलों में ऑटो अप्रूवल प्रक्रिया के तहत 12.39 करोड़ रुपए का गलत भुगतान हुआ।
इनको गिरफ्तार किया गया
पुलिस ने डॉ. मनोज ऊंचवाल, डॉ. डीएन शर्मा और रेडियोग्राफर मनोहर लाल को गिरफ्तार किया। सभी पर फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने और सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं। इस मामले की जांच के लिए दो अलग-अलग कमेटियां बनाई गई थीं – एक जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज की ओर से और दूसरी दौसा जिला कलेक्टर की। जांच में साफ हुआ कि दौसा में सबसे ज्यादा फर्जी कार्ड बनाए गए और कुछ चिकित्सा अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई।
सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई
चिकित्सा विभाग के निदेशक ने दौसा जिला अस्पताल के 8 मेडिकल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। पहले भी महुवा जिला हॉस्पिटल के कुछ डॉक्टर और रेडियोलॉजिस्ट को निलंबित किया जा चुका था। इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच भी जारी है।
सिलिकोसिस और सरकारी मदद
सिलिकोसिस खदानों में काम करने वाले श्रमिकों में अधिक देखने को मिलती है। राज्य सरकार ने 2019 में सिलिकोसिस नीति लागू की थी, जिसके तहत कार्ड धारकों को 3 लाख रुपए आर्थिक सहायता, मासिक पेंशन 1,500 रुपए, और मृत्यु होने पर परिवार को अतिरिक्त राशि दी जाती है।
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एक्स-रे का इस्तेमाल करके कई बार फर्जी कार्ड बनाए गए
जांच में सामने आया कि सरकारी अनुदान का लाभ लेने के लिए दौसा में फर्जी सिलिकोसिस सर्टिफिकेट बनाए गए। सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर और कर्मचारी भी इस घोटाले में शामिल थे। एक ही एक्स-रे का कई बार इस्तेमाल कर फर्जी कार्ड बनाए गए, जिससे सरकार को करीब 12 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच भी जारी है।