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Dausa: 100 करोड़ के जिला अस्पताल में एक साल में दरारें, एल्युमिनियम प्लेटों से छिपाने की कोशिश नाकाम

Sun, 12 Jul 2026 04:06 PM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: दौसा ब्यूरो Updated Sun, 12 Jul 2026 04:06 PM IST
सार

दौसा के लालसोट में 100 करोड़ रुपये की लागत से बने जिला अस्पताल भवन में उद्घाटन के एक साल के भीतर दरारें सामने आई हैं। एल्युमिनियम प्लेटों से दरारें छिपाने का प्रयास भी विफल रहा। मामले में जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठी है।

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Cracks appeared within just a year in the new district hospital built at a cost of ₹100 crore
दिखने लगी दरारें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दौसा जिले के लालसोट उपखंड मुख्यालय स्थित श्यामपुरा रोड पर करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक जिला अस्पताल भवन में उद्घाटन के महज एक साल बाद ही बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। भवन में आई इन दरारों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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बताया जा रहा है कि भवन के निचले हिस्से में आई दरारों को छिपाने के लिए ठेकेदार ने एल्युमिनियम प्लेटें लगाकर पैबंद लगाने का प्रयास किया था। हालांकि समय के साथ ये प्लेटें कई स्थानों से उखड़ गईं, जिससे अंदर की गहरी दरारें साफ दिखाई देने लगीं। स्थानीय लोगों ने इसकी तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई।

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गौरतलब है कि जयपुर के एसएमएस अस्पताल की तर्ज पर बनाए गए इस 200 बेड के आधुनिक जिला अस्पताल और 50 बेड के मदर एंड चाइल्ड विंग का उद्घाटन मई 2025 में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने किया था। अस्पताल परिसर में चिकित्सकों के लिए आवासीय क्वार्टर भी बनाए गए हैं। लेकिन उद्घाटन के एक साल के भीतर ही भवन में दरारें सामने आने से लोगों में चिंता बढ़ गई है।

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इस मामले पर जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. राजकुमार सेहरा ने बताया कि करीब सात-आठ महीने पहले भी इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को पत्र भेजा गया था। उस समय विभाग की ओर से बताया गया था कि दरारें ड्रेनेज पाइपलाइन के प्लास्टर से संबंधित हैं और मुख्य भवन पूरी तरह सुरक्षित है। अब दोबारा मामला सामने आने पर एनएचएम को फिर से लिखित रूप में अवगत कराया गया है।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि जनता के टैक्स के करीब 100 करोड़ रुपये से बने अस्पताल भवन की इतनी जल्दी खराब स्थिति चिंता का विषय है। उनका आरोप है कि यदि निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता का होता तो एक साल के भीतर ऐसी स्थिति नहीं बनती। क्षेत्रवासियों ने पूरे निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी एजेंसी से जांच कराने तथा दोषी ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

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