Dausa Accident: अब जले शवों की पहचान के लिए DNA रिपोर्ट का इंतजार, अस्पताल में टकटकी लगाए बैठे परिजन; आंखें नम
Dausa Bus Accident: दौसा बस हादसे के बाद जिला अस्पताल में परिजन डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। कोई पिता, कोई पत्नी, तो कोई बेटी के अंतिम दर्शन की आस लगाए बैठा है। इसी इंतजार में हर किसी की आंखें नम हो रही है।
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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण बस हादसे के बाद भी कई परिवारों का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। जिला अस्पताल में परिजन अपनों के शवों की पहचान के लिए डीएनए रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। किसी को अपने पिता का अंतिम दर्शन करना है तो किसी को पत्नी या बेटी के शव की पहचान का इंतजार है। अस्पताल परिसर में हर वाहन के पहुंचते ही परिजनों की निगाहें उसी ओर उठ जाती हैं, मानो कोई उन्हें अपने प्रियजन की खबर देने आया हो।
12 विसरा सैंपल जयपुर लैब भेजे गए
हादसे में कई शव इतनी बुरी तरह जल गए कि उनकी पहचान संभव नहीं हो सकी। कुछ शव कई हिस्सों में बंट गए थे। ऐसे में जिला प्रशासन ने पहचान के लिए 12 विसरा सैंपल डीएनए जांच हेतु जयपुर स्थित एफएसएल भेजे हैं।

क्या बोलीं जिला कलेक्टर?
जिला कलेक्टर सौम्या झा ने बताया कि मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए परिजनों के रक्त नमूने भी लिए जा रहे हैं। बुधवार शाम प्रियंका, वंशराम, अभिनव पांडे और भारत भौर के रक्त नमूने लिए गए, जबकि गुरुवार सुबह शिवम ठाकुर और दीपक जाटव के ब्लड सैंपल लेकर जयपुर भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलते ही शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।बस में सवार 26 यात्रियों में से अधिकांश को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि दो घायलों का इलाज अभी भी दौसा जिला अस्पताल में चल रहा है।
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'मां, तू रो मत... पापा जरूर आएंगे'
अस्पताल में एक मार्मिक दृश्य हर किसी की आंखें नम कर रहा है। करीब चार वर्षीय मासूम अपनी मां दिव्या को सांत्वना देते हुए कहता है, "मां, तू रो मत... मैं हूं ना। पापा जरूर आएंगे।" पति दीपक को खो चुकी दिव्या कभी बेसुध हो जाती हैं तो कभी अस्पताल के गेट की ओर टकटकी लगाए बैठ जाती हैं, मानो कोई उनके पति की खबर लेकर आने वाला हो। परिवार हरिद्वार और देहरादून घूमने के बाद इंदौर लौट रहा था, तभी यह हादसा हो गया।

अस्थियां विसर्जित कर लौट रहा बेटा, खुद बन गया हादसे का शिकार
सीहोर निवासी देवेंद्र सिंह (45) कुछ दिन पहले दिवंगत हुए अपने पिता नरपत सिंह की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित कर लौट रहे थे। परिवार पहले ही शोक में डूबा था, लेकिन लौटते समय बस हादसे में देवेंद्र की जिंदा जलकर मौत हो गई। अब उनके परिजन जिला अस्पताल में डीएनए रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि अंतिम संस्कार कर सकें।
हादसे का सबसे दर्दनाक मंजर 12 वर्षीय अभिनव पांडे की आंखों में आज भी ताजा है। उसने अपनी मां प्रियंका पांडे को आग की लपटों में घिरते देखा। उस भयावह दृश्य को याद कर वह अब भी सहम जाता है। परिवार उनकी पहचान के लिए डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
मृतकों की पहचान के लिए भेजे गए सैंपल
- भूमि भौर (20), निवासी इंदौर
- प्रियंका पांडे (35), निवासी खरगोन
- दीपक तंवर (29), निवासी खरगोन
- देवेंद्र सिंह (45), निवासी सीहोर
- निर्मला गुप्ता, निवासी इंदौर
- धर्मसिंह (31), निवासी झाबुआ
- बस चालक रामावतार (हंस ट्रेवल्स)
- परिचालक कुलदीप

भूमि के पिता बोले- जवाब का इंतजार करते-करते थक गए
मृतका भूमि भौर के पिता भारत भौर ने बताया कि उन्होंने बुधवार शाम ही डीएनए जांच के लिए रक्त का नमूना दे दिया था। प्रशासन ने उन्हें ठहरने की व्यवस्था भी कराई, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आई है। उन्होंने कहा कि सुबह से अस्पताल में बैठे हैं। बार-बार अधिकारियों से रिपोर्ट के बारे में पूछ रहे हैं, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही। बस बेटी के अंतिम दर्शन का इंतजार है।
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