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Bus Accident: हंस ट्रैवल्स की बसों का हादसों से पुराना नाता, फायर सेफ्टी में फेल, छेड़छाड़ में पकड़ाए ड्राइवर
Wed, 01 Jul 2026 11:04 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Wed, 01 Jul 2026 11:04 AM IST
सार
इंदौर की ट्रैवल कंपनी 'हंस ट्रैवल्स' लगातार हादसों, अवैध पार्किंग और आपराधिक गतिविधियों के कारण विवादों में घिरी हुई है। हाल ही में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण हादसे में 8 यात्रियों की मौत सहित पूर्व में भी कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
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दौसा में दर्दनाक हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर की प्रमुख ट्रैवल कंपनियों में शुमार हंस ट्रैवल्स पिछले कुछ समय से लगातार विभिन्न कारणों से चर्चा में बनी हुई है। आलीशान और आरामदायक सफर का दावा करने वाली इस एजेंसी का नाम हाल ही में कई बड़े सड़क हादसों, आपराधिक गतिविधियों और शहर में अवैध रूप से बसें खड़ी करने के विवादों से जुड़ा है। इन घटनाओं ने न केवल यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी को भी कटघरे में ला दिया है।
भीषण सड़क हादसे और यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल
हंस ट्रैवल्स की बसों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं का ग्राफ चिंताजनक रहा है। सबसे हालिया और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर राजस्थान के दौसा जिले में सामने आई है, जहां ऋषिकेश (उत्तराखंड) से इंदौर आ रही हंस ट्रैवल्स की एक स्लीपर बस अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस में तुरंत आग लग गई और वह धूं-धूं कर जल उठी। इस दर्दनाक हादसे में 8 यात्रियों की जलने व गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई और 24 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह हादसा हुआ तब अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे और उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।
पहले भी हो चुके कई हादसे
इसके अलावा भी पूर्व में इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य रूटों पर हंस ट्रैवल्स की बसों के पलटने या ओवरटेक करने के चक्कर में दुर्घटनाग्रस्त होने के कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें ड्राइवरों की लापरवाही और तेज गति को मुख्य वजह बताया गया है।
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फायर सेफ्टी जांच में आरटीओ ने जप्त की थी बसें
कुछ समय पहले स्वयं आरटीओ प्रदीप शर्मा ने हंस ट्रेवल्स की बसों में अनियमितताएं मिलने पर दो बसें जब्त कर लीं थी। रिंग रोड पर हुई इस कार्रवाई के दौरान आरटीओ प्रदीप शर्मा अपनी टीम के साथ मौजूद थे। वाहनों के परमिट, फिटनेस, बीमा सहित सभी दस्तावेज चेक किए गए। फायर सेफ्टी उपकरण, स्पीड गवर्नर भी चेक किए गए। सभी बसों पर मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
छेड़छाड़ में गिरफ्तार हुए ड्राइवर और क्लीनर
पिछले दिनों मुंबई से इंदौर लौट रही एक युवती के साथ बस में छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने ड्राइवर और क्लीनर को गिरफ्तार किया था। मामला सिर्फ साधारण छेड़छाड़ का नहीं था बल्कि उसके साथ अश्लील हरकतें की गई थी। बस में सवार यात्रियों ने उसे बचाने का प्रयास किया तो उन्हें भी धमकाया गया था। इसमें ड्राइवर और क्लीनर के साथ में एक युवक भी शामिल था, जिसे रास्ते में बस में बैठाया गया था।
अवैध पार्किंग और शहर की यातायात व्यवस्था में बाधा
इंदौर शहर के भीतर हंस ट्रैवल्स की मनमानी और अवैध पार्किंग को लेकर स्थानीय निवासियों और यातायात पुलिस में लगातार आक्रोश देखा जाता रहा है। सरवटे, विजयनगर, भवरकुआं और चोइथराम मंडी जैसे व्यस्त इलाकों में स्थित कंपनी के कार्यालयों के बाहर बसों को सड़कों पर ही अवैध रूप से खड़ा कर दिया जाता है। मुख्य सड़कों पर इन विशालकाय स्लीपर बसों के खड़े रहने के कारण सुबह और शाम के समय पीक ऑवर्स में भयंकर जाम की स्थिति बन जाती है। हालांकि इंदौर नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस ने कई बार इन बसों पर चालानी कार्रवाई की है और क्रेन से बसों को जब्त भी किया है, लेकिन कुछ दिनों के बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। रसूख के दम पर नो-पार्किंग जोन में बसें खड़ी करना इनकी आदत बन चुका है।
आपराधिक गतिविधियों और सामानों की अवैध तस्करी में संलिप्तता
केवल हादसे या ट्रैफिक उल्लंघन ही नहीं, बल्कि हंस ट्रैवल्स का नाम कई बार संदिग्ध और आपराधिक गतिविधियों में भी सामने आया है। लंबी दूरी की इन बसों का उपयोग कई बार अवैध रूप से महंगे सामान, बिना बिल के सोने-चांदी के आभूषण, हवाला की राशि और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाता रहा है।
इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच और आरटीओ (RTO) विभाग ने समय-समय पर हंस ट्रैवल्स की बसों को रोककर औचक चेकिंग की है, जिसमें बिना कागजात के लाखों रुपयों का कमर्शियल पार्सल जब्त किया गया है। नियमानुसार यात्री बसों में इस तरह के भारी और व्यावसायिक पार्सल ले जाना प्रतिबंधित है, लेकिन अधिक मुनाफे के लालच में नियमों को ताक पर रखकर यह खेल धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, यात्रियों के साथ बदसलूकी और बुकिंग के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायतें भी उपभोक्ता फोरम तक पहुंचती रही हैं।
यात्रियों की जान जोखिम में डालकर कमा रहे मुनाफा
हंस ट्रैवल्स से जुड़ी ये तमाम कड़ियां यह दर्शाती हैं कि यात्रियों की जान को जोखिम में डालकर और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन करके परिवहन व्यवसाय चलाया जा रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी घटनाओं के बाद अब समय आ गया है कि परिवहन विभाग (RTO) और इंदौर जिला प्रशासन ऐसे बड़े बस ऑपरेटरों के फिटनेस सर्टिफिकेट, ड्राइवरों के वर्किंग ऑवर्स और शहर के भीतर उनके अवैध अड्डों पर कड़ा शिकंजा कसे, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
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भीषण सड़क हादसे और यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल
हंस ट्रैवल्स की बसों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं का ग्राफ चिंताजनक रहा है। सबसे हालिया और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर राजस्थान के दौसा जिले में सामने आई है, जहां ऋषिकेश (उत्तराखंड) से इंदौर आ रही हंस ट्रैवल्स की एक स्लीपर बस अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस में तुरंत आग लग गई और वह धूं-धूं कर जल उठी। इस दर्दनाक हादसे में 8 यात्रियों की जलने व गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई और 24 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह हादसा हुआ तब अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे और उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।
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पहले भी हो चुके कई हादसे
इसके अलावा भी पूर्व में इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य रूटों पर हंस ट्रैवल्स की बसों के पलटने या ओवरटेक करने के चक्कर में दुर्घटनाग्रस्त होने के कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें ड्राइवरों की लापरवाही और तेज गति को मुख्य वजह बताया गया है।
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फायर सेफ्टी जांच में आरटीओ ने जप्त की थी बसें
कुछ समय पहले स्वयं आरटीओ प्रदीप शर्मा ने हंस ट्रेवल्स की बसों में अनियमितताएं मिलने पर दो बसें जब्त कर लीं थी। रिंग रोड पर हुई इस कार्रवाई के दौरान आरटीओ प्रदीप शर्मा अपनी टीम के साथ मौजूद थे। वाहनों के परमिट, फिटनेस, बीमा सहित सभी दस्तावेज चेक किए गए। फायर सेफ्टी उपकरण, स्पीड गवर्नर भी चेक किए गए। सभी बसों पर मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
छेड़छाड़ में गिरफ्तार हुए ड्राइवर और क्लीनर
पिछले दिनों मुंबई से इंदौर लौट रही एक युवती के साथ बस में छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने ड्राइवर और क्लीनर को गिरफ्तार किया था। मामला सिर्फ साधारण छेड़छाड़ का नहीं था बल्कि उसके साथ अश्लील हरकतें की गई थी। बस में सवार यात्रियों ने उसे बचाने का प्रयास किया तो उन्हें भी धमकाया गया था। इसमें ड्राइवर और क्लीनर के साथ में एक युवक भी शामिल था, जिसे रास्ते में बस में बैठाया गया था।
अवैध पार्किंग और शहर की यातायात व्यवस्था में बाधा
इंदौर शहर के भीतर हंस ट्रैवल्स की मनमानी और अवैध पार्किंग को लेकर स्थानीय निवासियों और यातायात पुलिस में लगातार आक्रोश देखा जाता रहा है। सरवटे, विजयनगर, भवरकुआं और चोइथराम मंडी जैसे व्यस्त इलाकों में स्थित कंपनी के कार्यालयों के बाहर बसों को सड़कों पर ही अवैध रूप से खड़ा कर दिया जाता है। मुख्य सड़कों पर इन विशालकाय स्लीपर बसों के खड़े रहने के कारण सुबह और शाम के समय पीक ऑवर्स में भयंकर जाम की स्थिति बन जाती है। हालांकि इंदौर नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस ने कई बार इन बसों पर चालानी कार्रवाई की है और क्रेन से बसों को जब्त भी किया है, लेकिन कुछ दिनों के बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। रसूख के दम पर नो-पार्किंग जोन में बसें खड़ी करना इनकी आदत बन चुका है।
आपराधिक गतिविधियों और सामानों की अवैध तस्करी में संलिप्तता
केवल हादसे या ट्रैफिक उल्लंघन ही नहीं, बल्कि हंस ट्रैवल्स का नाम कई बार संदिग्ध और आपराधिक गतिविधियों में भी सामने आया है। लंबी दूरी की इन बसों का उपयोग कई बार अवैध रूप से महंगे सामान, बिना बिल के सोने-चांदी के आभूषण, हवाला की राशि और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाता रहा है।
इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच और आरटीओ (RTO) विभाग ने समय-समय पर हंस ट्रैवल्स की बसों को रोककर औचक चेकिंग की है, जिसमें बिना कागजात के लाखों रुपयों का कमर्शियल पार्सल जब्त किया गया है। नियमानुसार यात्री बसों में इस तरह के भारी और व्यावसायिक पार्सल ले जाना प्रतिबंधित है, लेकिन अधिक मुनाफे के लालच में नियमों को ताक पर रखकर यह खेल धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, यात्रियों के साथ बदसलूकी और बुकिंग के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायतें भी उपभोक्ता फोरम तक पहुंचती रही हैं।
यात्रियों की जान जोखिम में डालकर कमा रहे मुनाफा
हंस ट्रैवल्स से जुड़ी ये तमाम कड़ियां यह दर्शाती हैं कि यात्रियों की जान को जोखिम में डालकर और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन करके परिवहन व्यवसाय चलाया जा रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी घटनाओं के बाद अब समय आ गया है कि परिवहन विभाग (RTO) और इंदौर जिला प्रशासन ऐसे बड़े बस ऑपरेटरों के फिटनेस सर्टिफिकेट, ड्राइवरों के वर्किंग ऑवर्स और शहर के भीतर उनके अवैध अड्डों पर कड़ा शिकंजा कसे, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
