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Rajasthan: सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्यों का आभाव, दस महीने से 3800 पदोन्नत अफसरों को पोस्टिंग का इंतजार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
Published by: दौसा ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2026 01:51 PM IST
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सार
दौसा समेत राजस्थान में पदोन्नत 3800 से अधिक प्रधानाचार्य पिछले 10 महीनों से पदस्थापन का इंतजार कर रहे हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया बार-बार स्थगित होने से स्कूलों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
दौसा मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय।
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विस्तार
दौसा जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुधार और विद्यालयों में नेतृत्व मजबूत करने के उद्देश्य से की गई पदोन्नतियां अब अव्यवस्था का कारण बनती नजर आ रही है। राज्य में पदोन्नति के बाद 3 हजार 800 से अधिक प्रधानाचार्य पिछले करीब दस महीनों से पदस्थापन का इंतजार कर रहे है। शिक्षा विभाग अब तक उन्हें नई जगहों पर नियुक्त नहीं कर पाया है।
शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित
स्थिति यह है कि पदोन्नत प्रधानाचार्य काउंसलिंग का इंतजार करते हुए पुराने स्थानों पर ही कार्यरत है, जबकि राज्य के अनेक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद खाली पड़े हैं। इस पूरे मामले में अब पांचवीं बार प्राचार्य काउंसलिंग प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जबकि हर माह करीब 2.66 करोड़ का वेतन भुगतान किया जा रहा है।
आदेश के बाद लगी रोक
राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में दायर याचिकाओं में 16 जनवरी को पारित समेकित अंतरिम आदेश की अनुपालना में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को कार्रवाई करनी पड़ी। इसके बाद संयुक्त निदेशक (कार्मिक) ने 18 जनवरी को आदेश जारी कर 12 जनवरी को जारी काउंसलिंग आदेश को आगामी निर्देशों तक स्थगित कर दिया।
प्रशासनिक कार्यों पर असर.....
काउंसलिंग में देरी और तीन स्थानांतरण सूचियां जारी होने के बाद दूरस्थ जिलों के कई विद्यालयों से प्रधानाचार्य स्थानांतरित होकर जा चुके हैं, लेकिन नए प्रधानाचार्य अब तक नहीं पहुंचे। इससे विद्यालयों के शैक्षणिक प्रबंधन, प्रशासनिक कार्यों और राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारियों पर असर पड़ रहा है।
एक ही विद्यालय में कई प्रधानाचार्य
यथास्थान पदोन्नति की व्यवस्था से कई विद्यालयों में एक ही जगह पर एक से अधिक प्रधानाचार्य समकक्ष अधिकारी हो गए हैं। इससे कार्य समन्वय प्रभावित हो रहा है। कुछ स्थानों पर प्रधानाचार्य अपने पुराने अध्यापन कालांश लेने से भी बच रहे हैं, जिससे विद्यालयी अनुशासन और शिक्षण व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
दस माह बाद भी अधर में काउंसलिंग
शिक्षा विभाग के पदोन्नत प्रधानाचार्य लंबे समय से यथास्थान कार्यग्रहण कर काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं। ऑनलाइन काउंसलिंग कार्यक्रम कई बार तय हुआ, लेकिन हर बार अंतिम समय में स्थगित करना पड़ा। अब उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रक्रिया फिर अनिश्चितकाल के लिए टल गई है।
राज्य में प्रधानाचार्य पदों की स्थिति (1 मार्च के अनुसार)
पद
स्वीकृत
कार्यरत
रिक्त
प्राचार्य
19,408
13,576
5,832
राज्य के 41 जिलों में प्रधानाचार्यों के स्वीकृत एवं कार्यरत पदों का विवरण
जिला
स्वीकृत
कार्यरत
अजमेर
285
489
जैसलमेर
429
121
जालोर
448
404
अलवर
484
212
बालोतरा
420
163
झालावाड़
342
171
बांसबाड़ा
534
299
झुन्झुनू
520
501
बारां
326
165
जोधपुर
645
473
बाड़मेर
684
378
करौली
309
242
खैरथल
311
232
ब्यावर
256
208
भरतपुर
344
283
कोटा
342
275
भीलवाड़ा
654
432
बीकानेर
627
374
कोटपुतली-बहरोड़
336
306
बूंदी
295
193
नागौर
445
283
चित्तौड़गढ़
457
255
पाली
445
305
चूरू
605
499
फलोदी
265
92
दौसा
433
391
प्रतापगढ़
288
97
डीग
262
164
राजसमंद
374
205
धौलपुर
325
178
सवाई माधोपुर
336
262
डीडवाना-कुचामन
201
88
सीकर
675
601
डूंगरपुर
456
272
सिरोही
282
190
श्रीगंगानगर
529
407
टोंक
364
307
हनुमानगढ़
444
359
उदयपुर
694
442
जयपुर
924
909
फैक्ट फाइल
दौसा जिले में कुल उच्च माध्यमिक विद्यालय: 488
प्रधानाचार्य के पद स्वीकृत: 433
कार्यरत: 391
रिक्त पद: 42
ये भी पढ़ें- Delhi Fire: साध नगर में इमारत में लगी भीषण आग, तीन बच्चों समेत नौ लोगों की मौत; मजिस्ट्रियल जांच का आदेश
बिना काम मिल रहा वेतन
शिक्षक संघ रेसटा ने यथास्थान कार्यग्रहण की व्यवस्था का विरोध किया है। संघ का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण कई अधिकारी बिना पूर्ण दायित्व के ही वेतन ले रहे हैं, जिससे राजकोष पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ रहा है।
'जल्द समाधान निकालना चाहिए'
मोहरसिंह सलावद, (प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा) ने कहा कि उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के कारण प्राचार्य काउंसलिंग कार्यक्रम पांच बार स्थगित हो चुका है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को मिलकर जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि पदोन्नत प्रधानाचार्यों का शीघ्र पदस्थापन हो सके।
-मोहरसिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा
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शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित
स्थिति यह है कि पदोन्नत प्रधानाचार्य काउंसलिंग का इंतजार करते हुए पुराने स्थानों पर ही कार्यरत है, जबकि राज्य के अनेक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद खाली पड़े हैं। इस पूरे मामले में अब पांचवीं बार प्राचार्य काउंसलिंग प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जबकि हर माह करीब 2.66 करोड़ का वेतन भुगतान किया जा रहा है।
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आदेश के बाद लगी रोक
राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में दायर याचिकाओं में 16 जनवरी को पारित समेकित अंतरिम आदेश की अनुपालना में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को कार्रवाई करनी पड़ी। इसके बाद संयुक्त निदेशक (कार्मिक) ने 18 जनवरी को आदेश जारी कर 12 जनवरी को जारी काउंसलिंग आदेश को आगामी निर्देशों तक स्थगित कर दिया।
प्रशासनिक कार्यों पर असर.....
काउंसलिंग में देरी और तीन स्थानांतरण सूचियां जारी होने के बाद दूरस्थ जिलों के कई विद्यालयों से प्रधानाचार्य स्थानांतरित होकर जा चुके हैं, लेकिन नए प्रधानाचार्य अब तक नहीं पहुंचे। इससे विद्यालयों के शैक्षणिक प्रबंधन, प्रशासनिक कार्यों और राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारियों पर असर पड़ रहा है।
एक ही विद्यालय में कई प्रधानाचार्य
यथास्थान पदोन्नति की व्यवस्था से कई विद्यालयों में एक ही जगह पर एक से अधिक प्रधानाचार्य समकक्ष अधिकारी हो गए हैं। इससे कार्य समन्वय प्रभावित हो रहा है। कुछ स्थानों पर प्रधानाचार्य अपने पुराने अध्यापन कालांश लेने से भी बच रहे हैं, जिससे विद्यालयी अनुशासन और शिक्षण व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
दस माह बाद भी अधर में काउंसलिंग
शिक्षा विभाग के पदोन्नत प्रधानाचार्य लंबे समय से यथास्थान कार्यग्रहण कर काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं। ऑनलाइन काउंसलिंग कार्यक्रम कई बार तय हुआ, लेकिन हर बार अंतिम समय में स्थगित करना पड़ा। अब उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रक्रिया फिर अनिश्चितकाल के लिए टल गई है।
राज्य में प्रधानाचार्य पदों की स्थिति (1 मार्च के अनुसार)
पद
स्वीकृत
कार्यरत
रिक्त
प्राचार्य
19,408
13,576
5,832
राज्य के 41 जिलों में प्रधानाचार्यों के स्वीकृत एवं कार्यरत पदों का विवरण
जिला
स्वीकृत
कार्यरत
अजमेर
285
489
जैसलमेर
429
121
जालोर
448
404
अलवर
484
212
बालोतरा
420
163
झालावाड़
342
171
बांसबाड़ा
534
299
झुन्झुनू
520
501
बारां
326
165
जोधपुर
645
473
बाड़मेर
684
378
करौली
309
242
खैरथल
311
232
ब्यावर
256
208
भरतपुर
344
283
कोटा
342
275
भीलवाड़ा
654
432
बीकानेर
627
374
कोटपुतली-बहरोड़
336
306
बूंदी
295
193
नागौर
445
283
चित्तौड़गढ़
457
255
पाली
445
305
चूरू
605
499
फलोदी
265
92
दौसा
433
391
प्रतापगढ़
288
97
डीग
262
164
राजसमंद
374
205
धौलपुर
325
178
सवाई माधोपुर
336
262
डीडवाना-कुचामन
201
88
सीकर
675
601
डूंगरपुर
456
272
सिरोही
282
190
श्रीगंगानगर
529
407
टोंक
364
307
हनुमानगढ़
444
359
उदयपुर
694
442
जयपुर
924
909
फैक्ट फाइल
दौसा जिले में कुल उच्च माध्यमिक विद्यालय: 488
प्रधानाचार्य के पद स्वीकृत: 433
कार्यरत: 391
रिक्त पद: 42
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बिना काम मिल रहा वेतन
शिक्षक संघ रेसटा ने यथास्थान कार्यग्रहण की व्यवस्था का विरोध किया है। संघ का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण कई अधिकारी बिना पूर्ण दायित्व के ही वेतन ले रहे हैं, जिससे राजकोष पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ रहा है।
'जल्द समाधान निकालना चाहिए'
मोहरसिंह सलावद, (प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा) ने कहा कि उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के कारण प्राचार्य काउंसलिंग कार्यक्रम पांच बार स्थगित हो चुका है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को मिलकर जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि पदोन्नत प्रधानाचार्यों का शीघ्र पदस्थापन हो सके।
-मोहरसिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा