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सिलिकोसिस जाली प्रमाण पत्र घोटाला: एक और सरकारी डॉक्टर गिरफ्तार, 12.39 करोड़ की जालसाजी में अब तक चार पकड़े

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: दौसा ब्यूरो Updated Thu, 02 Apr 2026 08:19 PM IST
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सार

Dausa News: दौसा में सिलिकोसिस घोटाले में एक और सरकारी डॉक्टर गिरफ्तार हुआ है, अब तक 4 आरोपी पकड़े गए हैं। जांच में 413 फर्जी सर्टिफिकेट और 12.39 करोड़ की जालसाजी सामने आई। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

Silicosis Fake Certificate Scam: Another Govt Doctor Arrested; Four Caught So Far in ₹12.39 Crore Fraud Case
साइबर क्राइम पुलिस कार्रवाई में जुटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दौसा में सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण पत्र मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए एक और सरकारी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। मंगलवार रात गिरफ्तार किए गए आरोपी डॉ. प्रेम कुमार मीना (45) हैं, जो कनिष्ठ विशेषज्ञ (मेडिसिन) के पद पर कार्यरत हैं और संबंधित बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं। इस मामले में अब तक कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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कोर्ट में पेशी, जांच जारी
साइबर थाना प्रभारी डीएसपी बृजेश कुमार के अनुसार, डॉ. मीना को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया है और उनके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें शामिल अन्य आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
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पहले भी तीन आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
इससे पहले 30 मार्च को पुलिस ने इस मामले में डॉ. मनोज ऊंचवाल, डॉ. डीएन शर्मा और रेडियोग्राफर मनोहर लाल यादव को गिरफ्तार किया था। इन सभी के खिलाफ 29 जनवरी 2024 को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई थी, जिसके बाद जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
 
दौसा में सबसे अधिक बने सिलिकोसिस कार्ड
जांच में सामने आया कि नवंबर 2022 से सिलिकोसिस कार्ड ऑनलाइन बनाए जाने शुरू हुए थे। इसके बाद मात्र 10 महीनों में अकेले दौसा जिले में 2453 कार्ड बनाए गए, जो पूरे प्रदेश के आंकड़े का लगभग 46 प्रतिशत थे। इस असामान्य संख्या के सामने आने पर प्रदेश स्तर पर संदेह हुआ और जांच कमेटी गठित की गई।
 
कमेटियों की जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा
जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज की एक समिति, जिसमें डॉ. सीपी सावरकर, डॉ. मुकेश मित्तल और डॉ. सुनील जाखड़ शामिल थे, ने इस मामले की जांच की। इसके अलावा तत्कालीन दौसा कलेक्टर की ओर से भी एक अलग कमेटी बनाई गई। दोनों कमेटियों की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि दौसा में बड़े पैमाने पर फर्जी प्रमाण पत्र बनाए गए और सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

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जाली प्रमाण पत्र से असली मरीजों के साथ अन्याय
जांच में यह भी सामने आया कि जिन मरीजों को सिलिकोसिस नहीं था, उन्हें भी प्रमाण पत्र जारी किए गए, जबकि वास्तविक पीड़ितों के आवेदन खारिज कर दिए गए। इससे न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हुआ, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को राहत से वंचित रहना पड़ा।
 
एक ही एक्स-रे का बार-बार उपयोग
मामले में यह भी उजागर हुआ कि रेडियोग्राफर द्वारा अपलोड किए गए एक्स-रे का कई बार उपयोग कर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए गए। जिला अस्पताल के पीएमओ की शिकायत पर करौली, चूरू, सीकर, भीलवाड़ा, चौमूं, अलवर और दौसा में कुल 22 डॉक्टरों और रेडियोग्राफरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें से 13 आरोपी अकेले दौसा जिले से हैं।
 
413 फर्जी सर्टिफिकेट, करोड़ों का नुकसान
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने मिलकर सिलिकोसिस के 413 फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए, जिससे राज्य सरकार को करीब 12.39 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
 

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