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जयपुर में बिना अनुमति नहीं बजेगा डीजे-लाउडस्पीकर: रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रोक
Thu, 01 Oct 2026 04:42 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Thu, 01 Oct 2026 04:42 PM IST
सार
जयपुर में डीजे और तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर पर पुलिस ने सख्ती की है। बिना अनुमति इस्तेमाल नहीं होगा। रात 10 से सुबह 6 बजे तक मंजूरी नहीं मिलेगी।
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डीजे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जयपुर में अब सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में डीजे या तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर बजाने के लिए पुलिस की अनुमति लेना जरूरी होगा। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी भी तरह के ध्वनि विस्तारक यंत्र के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जयपुर पुलिस आयुक्तालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट डॉ. राजीव पचार की ओर से जारी आदेश 4 अक्टूबर से 2 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसे इससे पहले भी निरस्त किया जा सकता है।
दिन में भी अनुमति जरूरी
आदेश के अनुसार किसी सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में डीजे, लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाने से पहले संबंधित पुलिस उपायुक्त से अनुमति लेनी होगी। रात 10 बजे के बाद से सुबह 6 बजे तक इसकी मंजूरी नहीं दी जाएगी।
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अनुमति मिलने के बाद भी ध्वनि का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक नहीं रखा जा सकेगा। इसके लिए ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 की अनुसूची में तय मानकों की पालना करनी होगी।
डीजे वाहन बनाए तो हो सकता है जब्त
पुलिस आदेश में वाहनों को डीजे वाहन में बदलने पर भी रोक लगाई गई है। किसी वाहन में जनरेटर, स्पीकर और दूसरे ध्वनि उपकरण लगाकर उसे डीजे वाहन का रूप देना मोटर वाहन अधिनियम के तहत अवैध बताया गया है।
बिना अनुमति ऐसे डीजे वाहन का इस्तेमाल किए जाने पर वाहन जब्त किया जा सकता है। वाहन मालिक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे परिवर्तित वाहनों के संचालन की अनुमति नहीं होगी।
यह भी पढें- राजस्थान: क्रॉस वोटिंग और फ्लोर मैनेजमेंट पर जांच का इंतजार, वेणुगोपाल के निर्देश के बाद भी कमेटी नहीं बनी
बुजुर्गों, मरीजों और विद्यार्थियों का हवाला
आदेश में कहा गया है कि सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में तेज आवाज वाले डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। इससे बुजुर्गों, बीमार लोगों और छोटे बच्चों को परेशानी हो सकती है। साथ ही विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों की पढ़ाई प्रभावित होने तथा आम लोगों को असुविधा होती है।
उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई
निषेधाज्ञा का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडनीय होगा। पुलिस आयुक्तालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आदेश की प्रतियां पुलिस महानिदेशक, गृह विभाग के अधिकारियों, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, पुलिस उपायुक्तों, सहायक पुलिस आयुक्तों और थानाधिकारियों को भेजी गई हैं। पुलिस कंट्रोल रूम को मॉनिटरिंग और जनसंपर्क अधिकारी को आदेश का प्रचार-प्रसार कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
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जयपुर पुलिस आयुक्तालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट डॉ. राजीव पचार की ओर से जारी आदेश 4 अक्टूबर से 2 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसे इससे पहले भी निरस्त किया जा सकता है।
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दिन में भी अनुमति जरूरी
आदेश के अनुसार किसी सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में डीजे, लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाने से पहले संबंधित पुलिस उपायुक्त से अनुमति लेनी होगी। रात 10 बजे के बाद से सुबह 6 बजे तक इसकी मंजूरी नहीं दी जाएगी।
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अनुमति मिलने के बाद भी ध्वनि का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक नहीं रखा जा सकेगा। इसके लिए ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 की अनुसूची में तय मानकों की पालना करनी होगी।
डीजे वाहन बनाए तो हो सकता है जब्त
पुलिस आदेश में वाहनों को डीजे वाहन में बदलने पर भी रोक लगाई गई है। किसी वाहन में जनरेटर, स्पीकर और दूसरे ध्वनि उपकरण लगाकर उसे डीजे वाहन का रूप देना मोटर वाहन अधिनियम के तहत अवैध बताया गया है।
बिना अनुमति ऐसे डीजे वाहन का इस्तेमाल किए जाने पर वाहन जब्त किया जा सकता है। वाहन मालिक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे परिवर्तित वाहनों के संचालन की अनुमति नहीं होगी।
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बुजुर्गों, मरीजों और विद्यार्थियों का हवाला
आदेश में कहा गया है कि सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में तेज आवाज वाले डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। इससे बुजुर्गों, बीमार लोगों और छोटे बच्चों को परेशानी हो सकती है। साथ ही विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों की पढ़ाई प्रभावित होने तथा आम लोगों को असुविधा होती है।
उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई
निषेधाज्ञा का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडनीय होगा। पुलिस आयुक्तालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आदेश की प्रतियां पुलिस महानिदेशक, गृह विभाग के अधिकारियों, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, पुलिस उपायुक्तों, सहायक पुलिस आयुक्तों और थानाधिकारियों को भेजी गई हैं। पुलिस कंट्रोल रूम को मॉनिटरिंग और जनसंपर्क अधिकारी को आदेश का प्रचार-प्रसार कराने की जिम्मेदारी दी गई है।