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राजस्थान: डीग कांग्रेस में फिर घमासान, विश्वेंद्र सिंह ने जिलाध्यक्ष पर साधा निशाना; यशवीर सूरा का पलटवार
Thu, 01 Oct 2026 03:50 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर-
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर-
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Thu, 01 Oct 2026 03:50 PM IST
सार
भरतपुर-डीग नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान बढ़ती दिख रही है। वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी पर टिकट वितरण को लेकर सवाल उठाए और पांच वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों के खराब प्रदर्शन का जिक्र किया।
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह। फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
नगरीय निकाय चुनाव के परिणामों के बाद भरतपुर और डीग जिले में कांग्रेस संगठन के भीतर शुरू हुआ आंतरिक घमासान और तेज हो गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह ने डीग कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी पर टिकट वितरण को लेकर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीग के पांच वार्डों में गलत प्रत्याशियों को उतारने के कारण पार्टी की अत्यंत शर्मनाक हार हुई है। विश्वेंद्र सिंह के अनुसार, इस लचर प्रदर्शन पर आत्ममंथन और समीक्षा करने के बजाय डीग जिलाध्यक्ष संगठन के शीर्ष नेताओं की जी-हुजूरी में व्यस्त हैं।
चुनावी नतीजों और प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर उठे सवाल
पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से डीग के 40 में से पांच वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों के प्रदर्शन के आंकड़े सार्वजनिक किए। उन्होंने बताया कि वार्ड एक से पार्टी प्रत्याशी हेमराज सैनी को केवल 243 मत प्राप्त हुए। वहीं वार्ड 10 से प्रियकेश को मात्र 14 वोट मिले। वार्ड 12 से मैदान में उतरे बच्चू सिंह मीणा को सिर्फ 56 मत हासिल हो सके। इसी तरह वार्ड 34 से उम्मीदवार बनाए गए राजेंद्र प्रसाद को 86 वोट और वार्ड 37 से चुनाव लड़े सोहन लाल भारती को महज 10 मत ही मिले। विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि संगठन के असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल पसंदीदा लोगों को टिकट बांटे गए, जिससे जनता ने पार्टी प्रत्याशियों को खारिज कर दिया।
युवा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार
विश्वेंद्र सिंह के हमलावर बयानों के बाद राजस्थान युवा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष यशवीर सूरा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में पराजय की पूरी जिम्मेदारी जिलाध्यक्षों पर डाल देना आसान काम है, लेकिन दूसरों की जवाबदेही तय करने से पहले वरिष्ठ नेताओं को स्वयं की भूमिका भी स्पष्ट करनी चाहिए।
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उन्होंने भरतपुर नगर निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी विचित्रा सिंह का नामांकन वापस करा दिया गया, जिससे भारतीय जनता पार्टी की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर निर्वाचित हो गईं। उन्होंने मीडिया बयानों के हवाले से कहा कि नामांकन वापस लेने का यह कदम पूर्व मंत्री के निर्देशों पर ही उठाया गया था। उन्होंने सवाल किया कि जब बोर्ड बनाने के लिए 36 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन उपलब्ध था, तब विरोधी दल के निर्विरोध मेयर बनने की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। उन्होंने पूर्व मंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र डीग-कुम्हेर में भी निकाय स्तर पर पार्टी का बोर्ड न बनने पर सवाल उठाए।
प्रदेश नेतृत्व और प्रशासनिक भर्ती पर गंभीर आरोप
विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा, डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में संगठन को मजबूत होना चाहिए था, परंतु जिलाध्यक्षों के फैसलों ने पार्टी को गर्त में धकेल दिया। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा भर्ती परीक्षा 2016 और 2018 में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
ये भी पढ़ें- राजस्थान: छात्रवृत्ति और स्कूटी योजनाओं के आवेदन शुरू, 30 नवंबर तक मौका; जन आधार जरूरी
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया का चयन 2016 की परीक्षा में हुआ, जबकि उनकी पुत्रवधू के भाई गौरव पूनिया और बहन प्रज्ञा पूनिया का चयन 2018 की परीक्षा में हुआ। उन्होंने दावा किया कि साक्षात्कार में सभी रिश्तेदारों को समान 80-80 अंक दिए गए। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के पुत्र अविनाश सिंह और समधी रमेश चंद पूनिया के परिवार पर नियम विरुद्ध अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र बनाकर आरक्षण का लाभ लेने के आरोप लगाते हुए मामले की गहन जांच की मांग की।
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चुनावी नतीजों और प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर उठे सवाल
पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से डीग के 40 में से पांच वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों के प्रदर्शन के आंकड़े सार्वजनिक किए। उन्होंने बताया कि वार्ड एक से पार्टी प्रत्याशी हेमराज सैनी को केवल 243 मत प्राप्त हुए। वहीं वार्ड 10 से प्रियकेश को मात्र 14 वोट मिले। वार्ड 12 से मैदान में उतरे बच्चू सिंह मीणा को सिर्फ 56 मत हासिल हो सके। इसी तरह वार्ड 34 से उम्मीदवार बनाए गए राजेंद्र प्रसाद को 86 वोट और वार्ड 37 से चुनाव लड़े सोहन लाल भारती को महज 10 मत ही मिले। विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि संगठन के असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल पसंदीदा लोगों को टिकट बांटे गए, जिससे जनता ने पार्टी प्रत्याशियों को खारिज कर दिया।
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युवा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार
विश्वेंद्र सिंह के हमलावर बयानों के बाद राजस्थान युवा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष यशवीर सूरा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में पराजय की पूरी जिम्मेदारी जिलाध्यक्षों पर डाल देना आसान काम है, लेकिन दूसरों की जवाबदेही तय करने से पहले वरिष्ठ नेताओं को स्वयं की भूमिका भी स्पष्ट करनी चाहिए।
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उन्होंने भरतपुर नगर निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी विचित्रा सिंह का नामांकन वापस करा दिया गया, जिससे भारतीय जनता पार्टी की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर निर्वाचित हो गईं। उन्होंने मीडिया बयानों के हवाले से कहा कि नामांकन वापस लेने का यह कदम पूर्व मंत्री के निर्देशों पर ही उठाया गया था। उन्होंने सवाल किया कि जब बोर्ड बनाने के लिए 36 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन उपलब्ध था, तब विरोधी दल के निर्विरोध मेयर बनने की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। उन्होंने पूर्व मंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र डीग-कुम्हेर में भी निकाय स्तर पर पार्टी का बोर्ड न बनने पर सवाल उठाए।
प्रदेश नेतृत्व और प्रशासनिक भर्ती पर गंभीर आरोप
विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा, डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में संगठन को मजबूत होना चाहिए था, परंतु जिलाध्यक्षों के फैसलों ने पार्टी को गर्त में धकेल दिया। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा भर्ती परीक्षा 2016 और 2018 में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया का चयन 2016 की परीक्षा में हुआ, जबकि उनकी पुत्रवधू के भाई गौरव पूनिया और बहन प्रज्ञा पूनिया का चयन 2018 की परीक्षा में हुआ। उन्होंने दावा किया कि साक्षात्कार में सभी रिश्तेदारों को समान 80-80 अंक दिए गए। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के पुत्र अविनाश सिंह और समधी रमेश चंद पूनिया के परिवार पर नियम विरुद्ध अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र बनाकर आरक्षण का लाभ लेने के आरोप लगाते हुए मामले की गहन जांच की मांग की।