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जयपुर में शिक्षकों का महापड़ाव: तबादलों के लिए शहीद स्मारक पर डटे, शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग
Thu, 06 Aug 2026 02:34 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Thu, 06 Aug 2026 02:34 PM IST
सार
बरसों से तबादलों का इंतजार कर रहे तृतीय श्रेणी शिक्षकों का आक्रोश अब सड़कों पर उतर आया है। शहीद स्मारक पर धरना दे रहे शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो पंचायत राज चुनाव में इसका जवाब मिलेगा।
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तबादलों की मांग को लेकर जयपुर में शिक्षकों का हल्लाबोल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के वर्षों से लंबित तबादलों की मांग को लेकर राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक पर आंदोलन तेज हो गया है। बड़ी संख्या में शिक्षक धरने पर बैठे हैं और सरकार से जल्द स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द तबादले नहीं किए गए तो आगामी पंचायत राज चुनाव में सरकार को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
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धरने पर बैठे शिक्षकों का कहना है कि कई शिक्षकों को अपने घर-परिवार से दूर 15 से 20 वर्ष हो चुके हैं। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्होंने अपने घर लौटने की उम्मीद तक छोड़ दी है। उनका कहना है कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले होने से न केवल शिक्षकों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
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वरिष्ठता छोड़ने को भी तैयार
तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे आंदोलन में कई शिक्षक अपने साथ वरिष्ठता त्यागने के शपथ पत्र लेकर पहुंचे। उनका कहना है कि यदि वरिष्ठता तबादलों में बाधा बन रही है तो वे इसे छोड़ने के लिए भी तैयार हैं लेकिन सरकार तुरंत स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करे।
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शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें
धरने पर मौजूद शिक्षकों ने साफ कहा कि जब तक तबादले शुरू नहीं होते या शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि धरना स्थल की बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी बाधित की गईं। रात के समय शिक्षकों ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर भजन-कीर्तन करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखा।
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महिला शिक्षिकाओं ने बयां किया दर्द
आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाएं भी शामिल हुईं। कई शिक्षिकाएं अपने छोटे बच्चों के साथ धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि वर्षों से परिवार से दूर रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाना बेहद कठिन हो गया है।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
संघर्ष समिति के संयोजक सुनील महला ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में 100 दिनों के भीतर पारदर्शी तबादला नीति लागू करने का वादा किया था लेकिन ढाई वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले शुरू नहीं हुए। उन्होंने कहा कि अन्य संवर्गों में तबादले किए जा रहे हैं, जबकि तृतीय श्रेणी शिक्षकों की लगातार अनदेखी की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 2018 के बाद बड़े स्तर पर तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले नहीं हुए हैं। इस दौरान हजारों नई नियुक्तियां हुईं, लेकिन लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत शिक्षकों को अब तक राहत नहीं मिली।
डोटासरा ने सरकार को घेरा
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार को तृतीय श्रेणी शिक्षकों के आंदोलन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षकों की बात सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। डोटासरा ने कहा कि सरकार को तुरंत शिक्षकों के प्रतिनिधियों से वार्ता कर इस मुद्दे का सकारात्मक समाधान निकालना चाहिए।