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Nagaur News: बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड में 11 साल बाद आया फैसला, कोर्ट ने सभी 40 आरोपियों को बरी किया
Thu, 06 Aug 2026 11:12 AM IST
नागौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 11:12 AM IST
सार
बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड में मेड़ता के एससी/एसटी विशिष्ट न्यायालय ने 11 साल बाद फैसला सुनाते हुए सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। यह मामला वर्ष 2015 में भूमि विवाद के दौरान हुई छह लोगों की मौत से जुड़ा था।
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डांगावास हत्याकांड में सभी 40 आरोपी बरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वर्ष 2015 के बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड में बुधवार को मेड़ता स्थित एससी/एसटी विशिष्ट न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। करीब 11 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने पूरे नागौर जिले और आसपास के क्षेत्रों में नई चर्चा छेड़ दी है। यह मामला भूमि विवाद के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा था, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी। इस प्रकरण की जांच सीबीआई ने की थी और 40 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
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11 साल बाद आया फैसला
मई 2015 में जिले के डांगावास गांव में खेत के मालिकाना हक को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद हिंसक झड़प में बदल गया था। इस घटना में पांच लोगों के साथ ग्रामीण रामपाल पुरी की भी मौत हो गई थी। घटना के बाद मामला पूरे राजस्थान में सुर्खियों में रहा और इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।
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करीब 11 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद बुधवार को मेड़ता के एससी/एसटी विशिष्ट न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। फैसले के बाद डांगावास गांव में खुशी का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कर निर्णय का स्वागत किया।
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बचाव पक्ष ने फैसले का किया स्वागत
फैसले के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता कमल आचार्य, महिपाल लटियाल, महेंद्र चौधरी और बाबूलाल गोरा ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। अधिवक्ताओं ने कहा कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष फैसला सुनाया है।
अधिवक्ता कमल आचार्य ने बताया कि यह मामला वर्ष 2015 का था, जिसमें भूमि विवाद के चलते छह लोगों की हत्या हुई थी। सीबीआई ने 40 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी लेकिन लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय ने सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। उन्होंने बताया कि अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 82 गवाह और कई दस्तावेज प्रस्तुत किए, जबकि बचाव पक्ष ने आठ गवाह तथा 35-36 दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए। मामले का मुख्य आधार भूमि विवाद ही था।
क्या था पूरा मामला?
मई 2015 में डांगावास गांव में खेत के मालिकाना हक को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद हिंसक रूप ले बैठा। इस दौरान छह लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने जांच पूरी कर 40 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। करीब 11 साल तक चली सुनवाई के बाद मेड़ता के एससी/एसटी विशिष्ट न्यायालय ने बुधवार को सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। इस फैसले के बाद क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे इस चर्चित मामले का कानूनी पटाक्षेप हो गया है।