Rajasthan OBC Report: 900 पन्नों की रिपोर्ट से तय होगा पंचायतों का भविष्य,किस वार्ड में किसकी दावेदारी बदलेगी?
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि किन वार्डों या पंचायतों को ओबीसी आरक्षित किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय राज्य सरकार और प्रशासन करेंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से पहले ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। करीब 900 पन्नों की रिपोर्ट में पहली बार प्रदेश में ओबीसी की 92 जातियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विस्तृत आकलन किया गया है। इसी आधार पर स्थानीय निकायों में आरक्षण तय होगा, जिसका सीधा असर चुनावी समीकरणों और भविष्य के राजनीतिक नेतृत्व पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट तैयार करने के लिए आयोग ने 74.85 लाख ओबीसी परिवारों का सर्वे किया और 19 मानकों पर आंकड़े जुटाए। इसमें यह भी सामने आया कि ओबीसी की 92 जातियों में से केवल 11 जातियां ही ऐसी हैं, जिन्हें अब तक पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है, जबकि अधिकांश जातियां स्थानीय सत्ता में सीमित भागीदारी तक सिमटी हुई हैं।
यही वजह है कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट के अनुरूप आरक्षण तय करने की सिफारिश की है। इस बार केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी आधार बनाया गया है। इससे उन जातियों को भी प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना बढ़ेगी, जो अब तक स्थानीय राजनीति में हाशिए पर रही हैं।
यह भी पढें- छात्रसंघ चुनाव पर सियासत तेज: 15 दिन से अनशन कर रहे शुभम रेवाड़ से मिलने SMS पहुंच गहलोत, सरकार पर साधा निशाना
अब रोटेशन नहीं आबादी और सामाजिक आधार पर तय होगा आरक्षण
सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि कई ऐसे वार्ड और पंचायतें, जहां पहले रोटेशन के आधार पर आरक्षण होता था, अब वहां वास्तविक सामाजिक संरचना के अनुसार आरक्षण तय किया जाएगा। इसका असर टिकट वितरण से लेकर चुनावी रणनीति और स्थानीय नेतृत्व तक दिखाई देगा।
रिपोर्ट के बाद अब सरकार आरक्षण का अंतिम प्रारूप तैयार करेगी। अगले सप्ताह वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और निकाय चुनाव की घोषणा कर सकता है।
रिपोर्ट में लाभार्थी डेटा शामिल
रिपोर्ट के पहले खंड में करीब 450 पन्नों में सर्वे के आंकड़े, पिछले स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का विश्लेषण, राज्य और केंद्र सरकार की ओबीसी कल्याण योजनाओं का विवरण तथा लाभार्थियों का डेटा शामिल है। वहीं दूसरे खंड में जातिवार राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है कि किस जाति के कितने जनप्रतिनिधि स्थानीय निकायों में निर्वाचित हुए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किन वार्डों या पंचायतों को ओबीसी आरक्षित किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय राज्य सरकार और प्रशासन करेंगे।