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Jaipur News: विदेश में नौकरी का झांसा, फिर साइबर स्कैम सेंटर में बंधक बनाकर कराते थे ठगी, 3 और आरोपी गिरफ्तार

Thu, 06 Aug 2026 10:52 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Thu, 06 Aug 2026 10:52 AM IST
सार

विदेश में मोटी सैलरी वाली नौकरी का लालच देकर युवाओं को साइबर स्कैम सेंटरों तक पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह पर राजस्थान पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में तीन और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ कुल गिरफ्तारियां आठ हो गई हैं।
 

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Jaipur News: 3 More Held in Cyber Slavery Racket That Lured Indians Abroad for Online Fraud
गिरफ्तार किए गए आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम थाना ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी, मानव तस्करी और साइबर ठगी से जुड़े संगठित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।

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पुलिस के अनुसार यह गिरोह भारतीय युवाओं को विदेश में मोटी तनख्वाह वाली नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया, म्यांमार सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भेजता था। वहां उन्हें कथित तौर पर साइबर स्कैम सेंटरों में बंधक बनाकर ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता था।
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पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चल रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से प्राप्त सूचनाओं, तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा किया जा रहा है। पुलिस ने आरिफ काठात उर्फ दीपू, कानू सिंह उर्फ पायथन और फिरोज काठात उर्फ माफिया को गिरफ्तार किया है।
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जांच में सामने आया कि फिरोज कंबोडिया में महिला बनकर सोशल मीडिया पर भारतीय नागरिकों से दोस्ती करता था और उन्हें फर्जी क्रिप्टो निवेश योजनाओं में फंसाता था। वहीं कानू सिंह पहले होटल में नौकरी के बहाने कंबोडिया पहुंचा और बाद में कमीशन के लालच में चार अन्य भारतीय युवाओं को भी साइबर स्कैम कंपाउंड तक पहुंचाया। आरिफ पर आरोप है कि वह फर्जी फेसबुक और व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर लोगों को नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश के नाम पर ठगता था और प्रोसेसिंग फीस के जरिए लाखों रुपये वसूलता था।


पुलिस के अनुसार इससे पहले कोलकाता से गिरफ्तार तीन आरोपियों से पूछताछ तथा उनके मोबाइल फोन, पासपोर्ट, व्हाट्सएप चैट, वीपीएन कनेक्शन, विदेशी संपर्कों और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के कई अहम सुराग मिले हैं। अब पुलिस मानव तस्करी, साइबर स्लेवरी और करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि विदेश में नौकरी के किसी भी आकर्षक प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले संबंधित एजेंसी और कंपनी का सत्यापन अवश्य करें। साथ ही सोशल मीडिया पर निवेश, क्रिप्टोकरेंसी या गारंटीड रिटर्न के नाम पर मिलने वाले ऑफरों से सावधान रहें। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

 

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