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Hindi News ›   Rajasthan ›   Churu News: Woman Injured as Ceiling Plaster Falls in Government Hospital, PWD Was Warned a Day Earlier

Churu: जनाना अस्पताल में भरभराकर महिला ऊपर गिरा छत का प्लास्टर, मची अफरा-तफरी, एक दिन पहले ही दी थी शिकायत

Thu, 06 Aug 2026 11:38 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चुरू Published by: प्रिया वर्मा Updated Thu, 06 Aug 2026 11:38 AM IST
सार

सुजानगढ़ के जनाना अस्पताल में छत का प्लास्टर गिरने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे में एक महिला घायल हो गई, जबकि अस्पताल प्रशासन ने एक दिन पहले ही भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पीडब्ल्यूडी को चेतावनी दी थी।
 

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Churu News: Woman Injured as Ceiling Plaster Falls in Government Hospital, PWD Was Warned a Day Earlier
महिला के सिर पर गिरा छत का प्लास्टर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले के सुजानगढ़ के राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल (जनाना अस्पताल) में बुधवार दोपहर अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के बरामदे की जर्जर छत का भारी प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। उसी समय वहां से गुजर रही एक महिला इसकी चपेट में आ गई। प्लास्टर सीधे महिला के सिर पर गिरा, जिससे वह घायल हो गई। घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई है।

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घटना बुधवार दोपहर करीब 1:18 बजे की बताई जा रही है। हादसे के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षा गार्ड ने तत्काल महिला को संभालकर अस्पताल के अंदर पहुंचाया, जहां उसका इलाज किया गया।
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अस्पताल प्रभारी डॉ. बंशीधर के अनुसार घायल महिला किरण मेघवाल (25) निवासी गुलेरिया (सुजानगढ़) है। वह किसी काम से अस्पताल आई थी। जैसे ही वह मुख्य गेट से बाहर निकलकर बरामदे में पहुंची, उसी समय छत का प्लास्टर सीमेंट सहित भरभराकर उसके सिर पर गिर गया। हादसे में महिला के सिर में गंभीर चोट आई, जिसके चलते डॉक्टरों ने दो टांके लगाए। प्राथमिक उपचार के बाद महिला को छुट्टी दे दी गई। जानकारी के अनुसार किरण अस्पताल के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर पर काम करती है।
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हादसे के तुरंत बाद बंद कराया गया गेट
प्लास्टर गिरते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा गार्ड ने तुरंत मुख्य गेट बंद कर दिया ताकि कोई अन्य व्यक्ति खतरे वाले हिस्से में न जाए। आसपास मौजूद लोगों ने घायल महिला को अस्पताल के अंदर पहुंचाया और इलाज शुरू कराया।
 
एक दिन पहले ही PWD को भेजा था चेतावनी पत्र
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रशासन ने इस खतरे को पहले ही भांप लिया था। अस्पताल प्रभारी डॉ. बंशीधर ने बताया कि लगातार बारिश के कारण छत में सीलन आ गई थी और बरामदे सहित कई हिस्सों की हालत बेहद खराब हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि 4 अगस्त को ही लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखकर भवन की जर्जर स्थिति और संभावित हादसे की आशंका से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद समय रहते कोई मरम्मत नहीं कराई गई और अगले ही दिन यह हादसा हो गया।

 
अस्पताल के कई हिस्से बने 'खतरे का जोन'
अस्पताल प्रशासन के अनुसार केवल बरामदा ही नहीं, बल्कि रूम नंबर-1, टीकाकरण कक्ष और कई अन्य कमरों में भी छतों में भारी सीलन है। रूम नंबर-1 की छत का बड़ा हिस्सा पहले ही गिर चुका है। इसके बावजूद मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।
 
जिम्मेदार कौन?
यह हादसा एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की जर्जर इमारतों और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि हादसे के समय वहां अधिक मरीज या गर्भवती महिलाएं मौजूद होतीं तो यह घटना कहीं अधिक भयावह रूप ले सकती थी। अब देखना होगा कि चेतावनी के बावजूद मरम्मत नहीं कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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