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अब AI चलाएगा जयपुर का ट्रैफिक: जाम देखकर खुद बदलेंगे सिग्नल, 253 चौराहों पर लागू होगी नई तकनीक

Tue, 14 Jul 2026 07:07 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Tue, 14 Jul 2026 07:07 AM IST
सार

जयपुर में जल्द एआई आधारित स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल शुरू होंगे। सफल ट्रायल के बाद 253 चौराहों पर सिस्टम लागू होगा, जो लाइव ट्रैफिक के अनुसार सिग्नल बदलेगा, जाम, प्रदूषण और इंतजार का समय घटाएगा।

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AI to Control Jaipur Traffic: Smart Signals Will Change in Real Time
राजधानी जयपुर में ट्रैफिक लाइट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 स्मार्ट सिटी जयपुर में ट्रैफिक प्रबंधन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में प्रवेश करने जा रहा है। जल्द ही शहर के प्रमुख चौराहों पर पारंपरिक फिक्स टाइमर वाले ट्रैफिक सिग्नल की जगह AI आधारित इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) काम करेगा, जो सड़क पर वाहनों की वास्तविक संख्या के आधार पर खुद तय करेगा कि किस दिशा में कितनी देर तक ग्रीन सिग्नल रहना चाहिए।

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जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने 'डेटा कोर इन्फोटेक' के सहयोग से रामबाग सर्किल पर 39 दिनों तक इस तकनीक का परीक्षण किया। पुलिस के अनुसार ट्रायल सफल रहने के बाद अब शहर के 423 चौराहों में से 253 प्रमुख चौराहों पर इस सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। इस परियोजना की मॉनिटरिंग ट्रैफिक डीसीपी योगेश गोयल के नेतृत्व में की गई।

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कैसे काम करेगा AI-ITMS?

मौजूदा व्यवस्था में ट्रैफिक सिग्नल तय समय के अनुसार बदलते हैं, चाहे किसी सड़क पर वाहन हों या नहीं। नई AI तकनीक इससे अलग है। चौराहों पर लगाए गए स्मार्ट कैमरे हर लेन में वाहनों की संख्या, कतार की लंबाई और ट्रैफिक दबाव का लगातार विश्लेषण करेंगे। जिस दिशा में ट्रैफिक अधिक होगा, वहां ग्रीन सिग्नल का समय स्वतः बढ़ जाएगा, जबकि कम ट्रैफिक वाली दिशा का समय घट जाएगा। पूरी प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतः संचालित होगी।

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ट्रायल में क्या मिले नतीजे?

3 जून से 11 जुलाई 2026 के बीच रामबाग सर्किल पर हुए परीक्षण के दौरान AI सिस्टम ने 4.88 लाख से अधिक वाहनों का सुचारु संचालन किया। प्रत्येक लेन में वाहन चालकों का 8 से 45 सेकंड तक समय बचा। औसतन ग्रीन सिग्नल का समय 33.63 सेकंड रहा।

कम समय तक वाहनों के रुकने से ईंधन की बचत हुई और 39 दिनों में लगभग 2,535 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का दावा किया गया। यह प्रतिदिन लगभग 65 किलोग्राम उत्सर्जन में कमी के बराबर है।

सिर्फ ट्रैफिक नहीं, नियम तोड़ने वालों पर भी नजर

AI आधारित कैमरे केवल ट्रैफिक का संचालन ही नहीं करेंगे बल्कि यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी स्वतः कार्रवाई करेंगे। ट्रायल के दौरान एक कैमरे ने प्रतिदिन औसतन 4,200 वाहनों को पढ़ा और करीब 450 संभावित चालान योग्य मामलों की पहचान की।

सिस्टम ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और लेन उल्लंघन जैसी गतिविधियों की स्वतः पहचान करेगा। यदि किसी वाहन पर पहले से कोई लंबित चालान होगा तो नंबर प्लेट स्कैन होते ही उसकी जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी।

भविष्य में मिलेगा ऑटोमैटिक ग्रीन कॉरिडोर

परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार अगला चरण मल्टी-जंक्शन सिंक्रोनाइजेशन का होगा, जिसमें एक चौराहे का AI दूसरे चौराहे से संवाद कर पूरे रूट का ट्रैफिक नियंत्रित करेगा। भविष्य में इस सिस्टम को एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं से भी जोड़ा जाएगा, ताकि उनके पहुंचते ही संबंधित मार्ग पर स्वतः ग्रीन कॉरिडोर बन सके।

आम लोगों को क्या होगा फायदा?

AI आधारित ट्रैफिक सिस्टम लागू होने से जाम कम होगा, यात्रा का समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही ट्रैफिक पुलिस को चौराहों पर मैन्युअल संचालन के बजाय दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, स्कूलों, बाजारों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर बेहतर निगरानी का अवसर मिलेगा। जयपुर में यह पहल सफल रही तो भविष्य में इसे राजस्थान के अन्य बड़े शहरों में भी लागू किया जा सकता है।



 

 


 

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