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Rajasthan Health News: राजस्थान में तीन साल में नकली दवाओं के 58 मामले, कई कंपनियों के लाइसेंस रद्द

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 12 Jun 2026 04:31 PM IST
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सार

बीकानेर और कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत, स्वास्थ्य मंत्री के विवादित बयान और प्रदेश में नकली दवाओं के मामलों ने राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ड्रग विभाग ने तीन साल में दर्जनों मामलों में कार्रवाई की है।

Fake Drugs in Rajasthan: 58 Cases in Three Years, Several Pharma Licences Cancelled
राजस्थान में सरकारी अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बीकानेर और कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बीच राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर अस्पतालों में इलाज और व्यवस्थाओं को लेकर विवाद है, वहीं दूसरी ओर नकली और अवमानक दवाओं के मामलों ने मरीजों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में नकली दवाओं के 58 मामले सामने आए हैं और कई कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने पड़े हैं।


ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के औषधि नियंत्रक ने एक कंपनी की दवा निर्माण गतिविधियों पर 29 मार्च 2025 से रोक लगा दी थी। इसके बावजूद कंपनी ने उत्पादन जारी रखा और अगस्त-सितंबर के दौरान बड़ी मात्रा में दवाएं राजस्थान में पहुंच गईं। इसके बाद प्रदेश में कार्रवाई करते हुए 24 फर्मों का निरीक्षण किया गया और करीब 20 लाख रुपए की दवाएं जब्त की गईं।
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आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में नकली दवाओं के 38 मामले सामने आए। वर्ष 2024-25 में ऐसे 16 मामले दर्ज हुए। वहीं वर्ष 2025-26 में  4 मामले सामने आए जिनमें इसी अवधि में 50 दवाएं अवमानक पाई गईं। कई फार्मा कंपनियों के लाइसेंस भी निरस्त किए गए।सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं, मरीज सुरक्षा और दवा गुणवत्ता से जुड़े इन मामलों ने स्वास्थ्य तंत्र की निगरानी और जवाबदेही को फिर केंद्र में ला दिया है। अब सवाल यह है कि क्या केवल कार्रवाई और बयान पर्याप्त हैं या स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसा बहाल करने के लिए संरचनात्मक बदलाव की जरूरत है।
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गौरतलब है कि राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद हुई पांच प्रसूताओं की मौत की जांच रिपोर्ट भी हाल में सामने आई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं को लगाया गया ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन नकली पाया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि इंजेक्शन में दवा की जगह पानी भरा हुआ था। इसके कारण प्रसव के बाद होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित नहीं किया जा सका, जिससे महिलाओं की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उनकी मौत हो गई।

वहीं बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में से भी 27 दवाओं के सैंपल ड्रंग कंट्रोलर की तरफ से जयपुर भेजे गए हैं। हालांकि इसकी रिपोर्ट कब तक आएगी यह भी बड़ा सवाल है क्योंकि कोटा की रिपोर्ट आने में भी महीने भर से ज्यादा का समय लगा।

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