Rajasthan News: राहुल गांधी पर गहलोत ने ऐसा क्या कहा कि छिड़ गई नई सियासी बहस?
अशोक गहलोत ने राहुल गांधी को विपक्ष का स्वाभाविक नेता बताते हुए कहा कि कांग्रेस से अलग हुई पार्टियां लौटें। उन्होंने दावा किया कि राहुल की राजनीति अब ज्यादा प्रासंगिक साबित हो रही है।
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राहुल गांधी पर गहलोत ने ऐसा क्या कहा कि छिड़ गई नई सियासी बहस?
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल और विपक्षी राजनीति को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। गहलोत ने एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी पर विज्ञापन आधारित राजनीति का आरोप लगाया, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी के नेतृत्व और राजनीतिक दृष्टि की खुलकर पैरवी की।
मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को पंडित जवाहरलाल नेहरू से तुलना कर पेश करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन केवल प्रचार और विज्ञापनों के जरिए राजनीतिक कद तय नहीं होता। उन्होंने कहा कि नेहरू को वर्षों तक राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया, लेकिन उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
गहलोत ने कहा कि आज जो राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे चर्चा में हैं, राहुल गांधी लंबे समय से उन्हें उठा रहे थे और अब उनकी बातों को अधिक गंभीरता से देखा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की सोच और राजनीतिक एजेंडा समय के साथ अधिक प्रासंगिक साबित हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने वर्षों पहले भी सार्वजनिक मंच से कहा था कि एक समय ऐसा आएगा जब राहुल गांधी की आलोचना करने वाले उनके विचारों को अलग नजर से देखेंगे। उन्होंने राहुल गांधी को ईमानदार, प्रतिबद्ध और सामाजिक न्याय की सोच रखने वाला नेता बताया।
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इसके साथ ही गहलोत ने विपक्षी एकता पर भी बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से अलग होकर बनी क्षेत्रीय पार्टियों को फिर से साथ आने पर विचार करना चाहिए और राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करना चाहिए।
गहलोत ने कहा कि यदि INDIA गठबंधन को स्पष्ट नेतृत्व के साथ जनता के सामने पेश किया जाता है तो इसका राजनीतिक असर दिखाई दे सकता है। उनके मुताबिक विपक्ष को नेतृत्व को लेकर अस्पष्टता से बचना चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दल ऐतिहासिक रूप से स्वतंत्र राजनीतिक पहचान रखते हैं और उनके लिए अलग परिस्थितियां हैं। लेकिन कांग्रेस से अलग होकर बने दलों को व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करना चाहिए।
युवा पीढ़ी से राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए गहलोत ने कहा कि विचारधारा आधारित राजनीति में युवाओं की भागीदारी लोकतंत्र के लिए जरूरी है।