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Jaipur: TET अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग, शैक्षिक महासंघ बोला- 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को मिले छूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 03:27 PM IST
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सार
टीईटी संबंधी न्यायिक निर्णयों के बाद शिक्षकों में बढ़ती चिंता के बीच शैक्षिक महासंघ ने केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर समाधान की मांग की है। संगठन का कहना है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू नियमों का प्रभाव नहीं डाला जाना चाहिए।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से जुड़े विवाद के समाधान और वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेशचंद्र पुष्करणा और प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने कहा कि टीईटी संबंधी न्यायिक निर्णयों के बाद देशभर में लाखों शिक्षकों के बीच भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है।
महासंघ के अनुसार 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया था। इससे पहले विभिन्न राज्यों में शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों और पात्रता मानदंडों के अनुरूप विधिवत की गई थीं। ऐसे में बाद में लागू किए गए मानकों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
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पुष्करणा ने कहा कि भारतीय विधिक व्यवस्था में सामान्य सिद्धांत यह है कि कोई भी नियम या अधिसूचना लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है। इसलिए पूर्व में वैध रूप से नियुक्त शिक्षकों की सेवाओं और अर्जित अधिकारों को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव और योगदान को देखते हुए उनके हितों की रक्षा सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।
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महेंद्र कुमार लखारा ने कहा कि वर्तमान स्थिति से शिक्षकों और उनके परिवारों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। यदि इस विषय का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो इसका असर विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों के हितों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह केवल सेवा संबंधी मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा विषय है।
महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट दी जाए। साथ ही उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतन निर्धारण और अन्य सभी सेवा लाभों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए।
संगठन ने संसद में आवश्यक विधायी संशोधन कर स्थायी समाधान निकालने, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने तथा पात्रता मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करने की अवधारणा पर पुनर्विचार करने की भी मांग की है।