सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   India will have 2.5 crore gig workers by 2030 economist Rakesh Mohan figures have surprised everyone

Jaipur News: 2030 तक देश में होंगे 2.5 करोड़ गिग वर्कर्स, अर्थशास्त्री राकेश मोहन के आंकड़ों ने सबको चौंकाया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 18 Jan 2026 08:21 PM IST
विज्ञापन
सार

Jaipur News: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के ‘द गिग इकॉनमी’ सत्र में अर्थशास्त्री राकेश मोहन ने कई चौंकाने वाला खुलासा किया। इस दौरान उन्होंने गिग वर्कर्स को होने वाली परेशानियों का भी जिक्र किया।

India will have 2.5 crore gig workers by 2030 economist Rakesh Mohan figures have surprised everyone
अर्थशास्त्री राकेश मोहन - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के ‘द गिग इकॉनमी’ सत्र में शनिवार को गिग वर्कर्स की बढ़ती संख्या और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। सत्र में प्रख्यात अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य राकेश मोहन ने गिग इकॉनमी के वर्तमान परिदृश्य और सुधार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
Trending Videos


अपराध घोषित किया जाए डिलीवरी इन 10 मिनट
राकेश मोहन ने बताया कि 2021 में देश में 77 लाख गिग वर्कर्स थे, जो 2025 में बढ़कर 1.4 करोड़ और 2030 तक 2.5 करोड़ तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि ‘डिलीवरी इन 10 मिनट’ जैसी अवधारणाओं को अपराध घोषित किया जाए और प्रत्येक डिलीवरी पर ऐप के माध्यम से सेस लगाया जाए। इस सेस की राशि सीधे गिग वर्कर्स के खाते में जमा कर राष्ट्रीय पेंशन योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में निवेश की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गिग वर्कर्स के कामकाजी घंटे तय नहीं 
उन्होंने गिग इकॉनमी को देश का प्रमुख रोजगार सृजक क्षेत्र बताया, लेकिन इसके कामगारों के सामने कई समस्याएं हैं। उनके पास न तय कामकाजी घंटे हैं, न कोई शिकायत निवारण तंत्र, न दुर्घटना बीमा और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा। ऐप आधारित सेवाओं के कारण कामगारों की सेवा अस्वीकार करने की स्वतंत्रता भी सीमित हो गई है।

ये भी पढ़ें: बांसवाड़ा में फर्जी रजिस्ट्री का खुलासा: लापता आदमी की जमीन बेचने वाला गिरफ्तार

उपभोक्ताओं को भी करना पड़ता है कठिनाइयों का सामना

सत्र में नीति विश्लेषक वंदना वासुदेवन ने कहा कि शिकायत निवारण तंत्र के अभाव में न केवल गिग वर्कर्स, बल्कि उपभोक्ताओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। केतकी कार्णिक ने कहा कि गिग वर्कर्स को उनके श्रम के अनुपात में उचित वेतन दिया जाना चाहिए। लेखक और ब्रांड रणनीतिकार संतोष देसाई ने कंपनियों के भारी मुनाफे और कामगारों के न्यून वेतन के बीच अंतर उजागर किया। सत्र में नीति निर्माताओं से अपील की गई कि गिग इकॉनमी को अधिक न्यायसंगत और कामगार-हितैषी बनाया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed