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Jaipur: 'राजपूत होने पर गर्व, हमने मुस्लिम राष्ट्र नहीं बनने दिया', JLF में ऐसा क्यों बोले गज सिंह?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Fri, 16 Jan 2026 05:45 PM IST
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सार

Jaipur: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में जोधपुर राजपरिवार के सदस्य गज सिंह ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने राजपरिवारों के योगदान पर चर्चा करते हुए 1960 और 1970 के दशक को याद किया। उन्होंने कहा कि यह समय देश और समाज के लिए बड़े बदलावों का दौर था।
 

Proud to be Rajput we did not allow India to become Muslim nation why did Gaj Singh say this at JLF Jaipur
जोधपुर राजपरिवार के सदस्य गज सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जयपुर: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में जोधपुर राजपरिवार के सदस्य गज सिंह पर लिखी गई पुस्तक ‘बापजी, महाराजा ऑफ मारवाड़–जोधपुर: द किंग हू वुड बी मैन’ पर अहम चर्चा आयोजित की गई। इस पुस्तक को लेखक अमन नाथ और योगी वैद्य ने लिखा है। सत्र के दौरान गज सिंह ने अपने जीवन, परिवार, राजघरानों की भूमिका और भारतीय इतिहास के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर खुलकर विचार साझा किए।
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भारत में राजपरिवारों को समझने के लिए है यह किताब
गज सिंह ने बताया कि उनका मानना था कि उनके जीवन पर एक पुस्तक अवश्य होनी चाहिए। इसी सोच के साथ लेखक अमन नाथ उनके पास आए और पुस्तक लिखने का प्रस्ताव रखा। गज सिंह के अनुसार, यह किताब केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत के निर्माण और विकास में राजघरानों के योगदान को भी उजागर करती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद बदलते भारत में राजपरिवारों की भूमिका को नए सिरे से समझना जरूरी है, और यह पुस्तक उसी प्रयास का हिस्सा है।
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गज सिंह ने मां को किया याद
अपने निजी जीवन को साझा करते हुए गज सिंह ने अपनी मां का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता के निधन के बाद उनकी मां ने पूरे परिवार का पालन-पोषण किया और वह समय बेहद कठिन था। उनकी मां ने न केवल उन्हें जीवन जीने की सीख दी, बल्कि यह भी समझाया कि वे कौन हैं और जोधपुर की जनता राजपरिवार से क्या अपेक्षा रखती है। गज सिंह ने कहा कि उनकी मां ने ही उन्हें और उनके भाई-बहनों को शिक्षा के लिए इंग्लैंड भेजा। इसके साथ ही उन्हें प्यार से “बापजी” कहकर बुलाना शुरू किया, और धीरे-धीरे यह नाम सभी की जुबान पर चढ़ गया।

इस वजह से मुस्लिम राष्ट्र नहीं बना भारत
राजपरिवारों के योगदान पर चर्चा करते हुए गज सिंह ने 1960 और 1970 के दशक को याद किया। उन्होंने कहा कि यह समय देश और समाज के लिए बड़े बदलावों का दौर था। इस दौरान राजघरानों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित किया गया। गज सिंह ने कहा कि राजघरानों ने इतिहास में युद्ध लड़े और उनके बलिदानों के कारण ही भारत मुस्लिम राष्ट्र नहीं बना। उन्होंने कहा, “हमने अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा की है और यह योगदान इतिहास में दर्ज है।”

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राजा की कोई जाति नहीं होती: गज सिंह
जातिवाद के मुद्दे पर गज सिंह ने स्पष्ट किया कि वे राजपूत हैं, लेकिन उनके पिता कहते थे कि राजा की कोई जाति नहीं होती। राजा सबका होता है और सच्चा राजधर्म विभिन्न जातियों के बीच सामंजस्य और संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें दोबारा जन्म लेने का अवसर मिले, तो वे अपने दादा के जमाने में जन्म लेना पसंद करेंगे, जहां नाम के साथ सत्ता की ताकत भी जुड़ी होती।
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