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राजस्थान विधानसभा सत्र: BJP विधायक के सवाल पर हंगामा, फर्जी डिग्री मामले पर पूछा- दो साल निकल गए, कार्रवाई कब?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Fri, 13 Feb 2026 04:42 PM IST
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सार
Rajasthan Assembly Question Hour: राजस्थान विधानसभा में फर्जी डिग्री प्रकरण पर हंगामा हुआ। बीजेपी विधायक के सवाल पर सरकार ने नियामक आयोग गठन और 10 निजी विश्वविद्यालयों की जांच की जानकारी दी। ओपीजेएस यूनिवर्सिटी परिसमापन में भेजी गई है, अन्य मामलों की जांच जारी है।
विधायक कालीचरण सराफ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को बीजेपी विधायक के सवाल पर सदन में हंगामा हो गया। सरकार की ओर से जवाब देते हुए डिप्टी सीएम प्रेम चंद बैरवा ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर विधायक ने पलटकर सवाल किया कि दो साल निकल गए, कार्रवाई कब की जाएगी। मामला प्रश्नकाल के दौरान उठा और इस पर तीखी बहस देखने को मिली।
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निजी विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं पर मांगी जानकारी
बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ ने प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में फर्जी डिग्री के प्रकरणों में अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी। जवाब में डिप्टी सीएम प्रेम चंद बैरवा ने सदन को बताया कि राज्य सरकार निजी विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं और फर्जी डिग्री मामलों पर अंकुश लगाने के लिए एक नियामक आयोग गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। प्रस्तावित आयोग का उद्देश्य फर्जी डिग्री रैकेट पर रोक लगाना और निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली की प्रभावी निगरानी करना है।
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10 विश्वविद्यालयों के खिलाफ जांच, एक परिसमापन में
मंत्री ने बताया कि फर्जी डिग्री और प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतों के बाद 10 निजी विश्वविद्यालयों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। गंभीर आरोप सामने आने पर ओपीजेएस यूनिवर्सिटी को 7 जनवरी 2026 को परिसमापन में भेज दिया गया है। बीकानेर संभागीय आयुक्त को इसका प्रशासक नियुक्त किया गया है। अनियमितताओं में शामिल कर्मचारियों और कथित दलालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। मेवाड़ यूनिवर्सिटी में भी धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तारियां हुई हैं।
नियामक ढांचा और नई समिति का गठन
उन्होंने बताया कि अन्य विश्वविद्यालयों की जांच जारी है और नया नियामक ढांचा तैयार किया जा रहा है। आयोग के गठन का ड्राफ्ट प्रस्ताव शीघ्र ही विधि विभाग को परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। नया ढांचा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किया जाएगा, ताकि शैक्षणिक मानकों और जवाबदेही को मजबूत किया जा सके। बैरवा ने कहा कि राजस्थान प्राइवेट हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेटरी अथॉरिटी बिल को और सशक्त बनाने के लिए एक नई समिति गठित की गई है, जो संशोधित मसौदा तैयार करेगी। विभागीय स्तर पर निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन से संबंधित दिशा-निर्देशों में भी संशोधन किया जा रहा है।
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53 निजी विश्वविद्यालयों पर निगरानी
राज्य में वर्तमान में 53 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं। जिन संस्थानों की जांच चल रही है, उनमें सिंगानिया यूनिवर्सिटी, सनराइज यूनिवर्सिटी, श्रीधर यूनिवर्सिटी, माधव यूनिवर्सिटी, रैफल्स यूनिवर्सिटी, निर्वाण यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर और जेजेटी यूनिवर्सिटी शामिल हैं। विशेष अभियान दल की सिफारिश पर कई मामलों में व्यापक जांच की जा रही है। सरकार ने मई और अक्तूबर 2024 में सार्वजनिक नोटिस और आदेश जारी कर निगरानी सख्त की थी।
सरकार ने क्या पक्ष रखा?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि नियामक आयोग का गठन उच्च शिक्षा में भविष्य में होने वाली धोखाधड़ी रोकने और प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से एक नीतिगत निर्णय है। जांच और दोषियों की भूमिका की पड़ताल अभी जारी है।
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