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Rajasthan News: 'वन नेशन-वन इलेक्शन जरूरी'...बार-बार चुनाव होने से देश की गति बाधित होती है': सुनील बंसल

Tue, 25 Mar 2025 03:06 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 25 Mar 2025 03:06 PM IST
सार

Rajasthan: भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन भारत के लिए स्पीड ब्रेकर हटाने जैसा है। उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

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Rajasthan: BJP's National General Secretary Sunil Bansal said that One Nation-One Election is necessary
सुनील बंसल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (एक देश, एक चुनाव) को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से देश की विकास गति बाधित होती है और आर्थिक संसाधनों पर भारी बोझ पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर पूरे देश में एक साथ चुनाव होते हैं, तो इससे राजनीतिक स्थिरता बढ़ेगी और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी।
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चुनावों पर खर्च और आर्थिक प्रभाव
बंसल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में भारत में एक लोकसभा चुनाव पर करीब 1,35,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि पूरे चुनावी चक्र में यह राशि 4-5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि यदि विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ हों, तो खर्च में भारी कटौती की जा सकती है। "एक वोट डालने पर सरकार 1400 रुपये खर्च करती है। जब हर साल कोई न कोई चुनाव होता है, तो यह खर्च कई गुना बढ़ जाता है। राजनीतिक पार्टियों के अपने चुनावी खर्चे अलग होते हैं, जिससे संसाधनों पर और भी अधिक दबाव पड़ता है। 
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विकास की गति पर असर
सुनील बंसल ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारों को हर छह महीने में यह साबित करना पड़ता है कि वे अस्तित्व में हैं। इससे नीति-निर्माण और विकास कार्यों पर नकारात्मक असर पड़ता है। "मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री लगातार चुनावी अभियानों में व्यस्त रहते हैं, जिससे योजनाएं जमीनी स्तर तक सही ढंग से नहीं पहुंच पातीं। इस बार के लोकसभा चुनाव में 1 करोड़ से अधिक लोगों की ड्यूटी लगी और इसमें 3 महीने का समय खर्च हुआ। यह प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ी चुनौती बन गया है।

वन नेशन, वन इलेक्शन से राजनीतिक स्थिरता
भाजपा नेता ने तर्क दिया कि यदि देश में एक साथ चुनाव होते हैं, तो सरकारें अपने पूरे कार्यकाल में ठोस नीतिगत फैसले ले सकेंगी। बार-बार चुनाव होने से कई बार कठोर निर्णय लेने की स्थिति नहीं बन पाती। "बार-बार चुनाव से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, जिससे कई बार व्यक्तिगत हमले और जातिगत राजनीति को बढ़ावा मिलता है। अगर चुनाव एक साथ होंगे, तो राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी और नीतिगत फैसले अधिक प्रभावी होंगे।"


भ्रष्टाचार और पारदर्शिता पर प्रभाव
बंसल ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भ्रष्टाचार के कोई बड़े मामले सामने नहीं आए, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार की नीतियां सही दिशा में हैं। वन नेशन, वन इलेक्शन से राजनीतिक स्थिरता बढ़ेगी, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता भी मजबूत होगी। "जब कोई चुनाव लड़ता है, तो उसकी जन्म कुंडली सार्वजनिक हो जाती है। लोग खुद-ब-खुद उसकी संपत्तियों, मुकदमों और राजनीतिक गतिविधियों की जांच करने लगते हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और भ्रष्टाचार कम होता है।"

2024 से 2047: मजबूत भारत की दिशा में
भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन भारत के लिए स्पीड ब्रेकर हटाने जैसा है। उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। "हम सभी को इस जन अभियान को आगे बढ़ाना होगा। यदि चुनाव एक साथ होंगे, तो प्रशासन और व्यापार दोनों को अधिक समय मिलेगा। इससे देश में विकास की गति तेज होगी और आर्थिक संसाधनों का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा।"

 
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