पंचायतीराज आरक्षण लॉटरी स्थगित होने पर सियासत गरमाई; संयम लोढ़ा ने भेजा अवमानना का नोटिस
पंचायतीराज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी स्थगित होने पर संयम लोढ़ा ने मुख्य सचिव समेत अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। उन्होंने इसे हाईकोर्ट आदेश की अवमानना बताते हुए याचिका की चेतावनी दी।
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राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों के आरक्षण की लॉटरी स्थगित किए जाने को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने इसे हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना बताते हुए मुख्य सचिव, राज्य निर्वाचन आयुक्त, पंचायतीराज विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव और पंचायतीराज आयुक्त को कानूनी नोटिस भेजे हैं। लोढ़ा ने कहा है कि तय समय पर लॉटरी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो वह हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेंगे।
दरअसल, पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। लोढ़ा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने चुनाव कार्यक्रम और आरक्षण प्रक्रिया की समयसीमा रखी गई थी।
15 अगस्त तक पूरी होनी थी लॉटरी
हाईकोर्ट के समक्ष पेश कार्यक्रम के अनुसार पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों की आरक्षण लॉटरी 15 अगस्त तक पूरी की जानी थी। प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच और वार्ड पंच के आरक्षण की लॉटरी 17 अगस्त को प्रस्तावित थी।
हालांकि सरकार ने 16 अगस्त की शाम अचानक इस प्रक्रिया को स्थगित कर दिया। अब संशोधित कार्यक्रम के तहत प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के वार्डों की लॉटरी 17 सितंबर को होगी, जबकि सरपंच और वार्ड पंच के वार्डों की लॉटरी 18 सितंबर को कराई जाएगी।
शहरी निकायों और जिला प्रमुखों की लॉटरी पूरी
राजस्थान के 309 शहरी निकायों के प्रमुखों और उनके वार्डों में आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही 41 जिला प्रमुखों के आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है। अब विवाद पंचायतीराज संस्थाओं के बाकी पदों और वार्डों की आरक्षण लॉटरी को लेकर है। लॉटरी स्थगित होने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
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'लॉटरी स्थगित करना हाईकोर्ट की अवमानना'
संयम लोढ़ा ने कहा कि हाईकोर्ट में जब चुनाव कार्यक्रम रखा गया था, तब संबंधित अधिकारी ऑनलाइन मौजूद थे। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय कार्यक्रम के आधार पर ही कोर्ट के सामने समयसीमा रखी गई थी।
लोढ़ा के मुताबिक, कोर्ट को बताया गया था कि 15 अगस्त या उससे पहले आरक्षण की पूरी लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। अब इसे अचानक स्थगित कर नई तारीख तय करना हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना है। उन्होंने कहा कि इसी मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजे गए हैं। यदि तत्काल लॉटरी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो वह हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करेंगे।
OBC आरक्षण को लेकर भी विवाद
पंचायतीराज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी स्थगित किए जाने के पीछे ओबीसी आरक्षण से जुड़ा विवाद और विधानसभा सत्र को भी संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से लॉटरी स्थगित करने के संबंध में विस्तृत कारण सामने नहीं आया है। अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 सितंबर को लॉटरी होने की स्थिति में पंचायत चुनाव की आगे की प्रक्रिया भी उसी के अनुरूप आगे बढ़ेगी। ऐसे में हाईकोर्ट के निर्देशों और चुनाव की समयसीमा के बीच सरकार के सामने समय प्रबंधन की चुनौती बनी हुई है।