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Rajasthan: राजस्थान के स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर घमासान, मंत्री दिलावर के बयान से बढ़ा विवाद

Tue, 18 Aug 2026 05:41 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Tue, 18 Aug 2026 05:41 PM IST
सार

Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री, फोटो-वीडियो, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। सरकार इसे बच्चों की सुरक्षा और निजता से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि सरकार स्कूलों की बदहाली सामने आने से रोकना चाहती है।

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Political Row Over Entry Restrictions in Government Schools, Education Minister Says ‘I Have Heard About It’
शिक्षामंत्री मदन दिलावर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री, फोटो-वीडियो, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों ने प्रदेश की राजनीति गरमा दी है। सरकार की ओर से बच्चों की सुरक्षा और निजता को इन नियमों का आधार बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसे सरकार की जवाबदेही से बचने की कोशिश करार दिया है। इस पूरे विवाद में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है।
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‘कुछ लोगों से सुना’, फिर मंत्री ने दी नियमों पर सफाई
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि उन्होंने कुछ लोगों से सुना है कि सरकार ने विद्यालयों में किसी के जाने और रिकॉर्डिंग करने पर प्रतिबंध लगाया है। हालांकि, इसके बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों में पूरी तरह से किसी के प्रवेश या रिकॉर्डिंग पर रोक नहीं लगाई गई है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और निजता को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए गए हैं।
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स्कूल में एंट्री से पहले संस्था प्रधान की अनुमति जरूरी
माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से 16-17 अगस्त को जारी आदेश में सरकारी विद्यालयों में बाहरी लोगों की गतिविधियों को लेकर कई दिशा-निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, किसी बाहरी व्यक्ति को स्कूल में प्रवेश करने के लिए संस्था प्रधान की पूर्व अनुमति लेनी होगी। फोटो, वीडियो, इंटरव्यू या लाइव स्ट्रीमिंग जैसी गतिविधियों के लिए भी लिखित अनुमति जरूरी होगी।
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विजिटर रजिस्टर में दर्ज होगा पूरा विवरण
स्कूल परिसर में आने वाले बाहरी व्यक्ति का विवरण विजिटर रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। अनुमति मिलने के बाद भी वह स्कूल परिसर में अकेले घूम नहीं सकेगा। उसे संबंधित शिक्षक, स्टाफ सदस्य या संस्था प्रधान के साथ ही रहना होगा। क्लासरूम, लैब, हॉस्टल और अन्य संवेदनशील स्थानों पर बाहरी व्यक्ति के अकेले जाने पर भी रोक रहेगी।

बच्चों की निजता के लिए ‘इन लोको पेरेंटिस’ का हवाला
शिक्षा विभाग ने बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और निजता को प्राथमिकता देते हुए ‘इन लोको पेरेंटिस’ यानी माता-पिता के स्थान पर जिम्मेदारी निभाने के सिद्धांत का भी उल्लेख किया है। सरकार का तर्क है कि नाबालिग बच्चों की फोटो, वीडियो या बाइट लेने से पहले उनकी सुरक्षा और अभिभावकीय सहमति का ध्यान रखा जाना चाहिए।

'बच्चों से बिना अनुमति सवाल-जवाब उचित नहीं'
मदन दिलावर ने कहा कि जब बच्चे स्कूल में होते हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की होती है। उनका कहना है कि बिना अनुमति स्कूल में पहुंचकर बच्चों से अनावश्यक सवाल-जवाब करना या उनकी निजता प्रभावित करना उचित नहीं है। संस्था प्रधान की जिम्मेदारी है कि बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

'स्कूलों की सच्चाई सामने आने से रोक रही सरकार'
वहीं कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने आने से रोकना चाहती है। उनका कहना है कि सरकार को स्कूलों की व्यवस्था सुधारने, शिक्षकों और संसाधनों की कमी दूर करने तथा जर्जर भवनों की समस्या पर ध्यान देना चाहिए।

'तानाशाही वाला फैसला, वापस नहीं लिया तो आंदोलन'
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्कूलों में प्रवेश और रिकॉर्डिंग को लेकर जारी दिशा-निर्देशों को तानाशाही बताया। जूली का आरोप है कि सरकार स्कूलों की जमीनी हकीकत सामने आने से डर रही है। उन्होंने आदेश वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस सविनय अवज्ञा आंदोलन करेगी।

'निगरानी और सवाल पूछने का रास्ता सीमित होगा'
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दे लगातार सामने आते रहे हैं। ऐसे में मीडिया, अभिभावकों और आम लोगों की निगरानी तथा सवाल पूछने की प्रक्रिया को सीमित करना उचित नहीं है। विपक्ष का दावा है कि इन पाबंदियों से स्कूलों की कमियां जनता के सामने आने में बाधा पैदा होगी।

'स्कूल सार्वजनिक खुला परिसर नहीं'
दूसरी ओर सरकार का पक्ष बच्चों की सुरक्षा और निजता पर केंद्रित है। सरकार का कहना है कि स्कूल कोई सार्वजनिक खुला परिसर नहीं है, बल्कि वहां नाबालिग बच्चे रहते और पढ़ते हैं। इसलिए उनकी फोटो, वीडियो और व्यक्तिगत जानकारी के इस्तेमाल को लेकर नियम जरूरी हैं।

मंत्री के बयान ने खड़ा किया सबसे बड़ा सवाल
हालांकि, इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के उस बयान को लेकर उठ रहा है, जिसमें उन्होंने आदेश के बारे में कहा कि उन्होंने ‘कुछ लोगों से सुना है’। सवाल यह है कि जिस विभाग से आदेश जारी हुआ, उसी विभाग के मंत्री को उसके बारे में जानकारी किस स्तर पर दी गई।


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स्कूलों की सुरक्षा बनाम पारदर्शिता पर आमने-सामने सरकार-विपक्ष
फिलहाल सरकार और विपक्ष के बीच स्कूलों में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकार इसे बच्चों की सुरक्षा और निजता से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकारी स्कूलों की बदहाली छिपाने की कोशिश बता रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और सड़क, दोनों जगह राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
 
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