{"_id":"6a8422010c5b7e80b906255e","slug":"rajendra-gudha-says-hanuman-beniwal-is-a-leader-who-struggles-on-the-streets-hints-at-changing-social-equations-in-rajasthan-politics-jaipur-news-c-1-1-noi1422-4623528-2026-08-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan: राजेंद्र गुढ़ा का हनुमान बेनीवाल पर बड़ा बयान, बोले- प्रवक्ता नहीं हूं, लेकिन उनका संघर्ष दिखता है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajasthan: राजेंद्र गुढ़ा का हनुमान बेनीवाल पर बड़ा बयान, बोले- प्रवक्ता नहीं हूं, लेकिन उनका संघर्ष दिखता है
Tue, 18 Aug 2026 06:07 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2026 06:07 PM IST
सार
Rajasthan News: राजस्थान के पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने हनुमान बेनीवाल की राजनीति और संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे बेनीवाल के प्रवक्ता नहीं हैं, लेकिन बेनीवाल लगातार संघर्ष कर रहे हैं और लोगों के बीच रहकर राजनीति करते हैं।
विज्ञापन
राजेंद्र गुढ़ा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हनुमान बेनीवाल को लेकर राजस्थान के पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि वे बेनीवाल के प्रवक्ता नहीं हैं, लेकिन इतना जरूर है कि बेनीवाल लगातार संघर्ष कर रहे हैं। गुढ़ा ने कहा कि हनुमान बेनीवाल सड़क पर रहने वाले और अपने लोगों के बीच रहकर संघर्ष करने वाले नेता हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि दोनों की राजनीति अलग-अलग है और उनका बेनीवाल से ज्यादा मेल-जोल नहीं है।
राजस्थान की सियासत में समाजों की भूमिका पर चर्चा
गुढ़ा ने राजस्थान की राजनीति में समाजों की भूमिका पर चर्चा करते हुए पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने हरिसिंह झाला, कुंभाराम आर्य और सुखाड़िया के दौर की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान की राजनीति में कई बार ऐसे मोड़ आए हैं, जब अलग-अलग सामाजिक ताकतों और नेताओं के एक साथ आने से राजनीतिक समीकरण बदले हैं।
1967 का जिक्र, बड़े चौपड़ की घटना भी याद की
उन्होंने वर्ष 1967 के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय बहुमत के बावजूद सरकार गठन को लेकर परिस्थितियां बदलीं और विधानसभा में शक्ति परीक्षण का मामला सामने आया था। गुढ़ा ने उस दौर में बड़ी चौपड़ पर हुई फायरिंग और हरिसिंह झाला की मौत का भी उल्लेख किया।
विज्ञापन
वीपी सिंह से वसुंधरा राजे तक का दिया उदाहरण
गुढ़ा ने आगे कहा कि बाद के दौर में भी राजस्थान और देश की राजनीति में अलग-अलग सामाजिक समूहों के नेताओं के बीच गठजोड़ देखने को मिले। उन्होंने वीपी सिंह और देवीलाल के दौर से लेकर वसुंधरा राजे की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े राजनीतिक बदलावों में समाजों को जोड़ने वाले नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
‘दो बड़े समाज साथ आए तो बदल सकता है सियासी गणित’
गुढ़ा ने कहा कि यदि दो बड़े सामाजिक समूह एक जगह आ जाते हैं और उन्हें साथ लाने वाला कोई प्रभावी नेतृत्व सामने आता है तो उसका असर राजस्थान की राजनीति पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि समाजों को जोड़ने वाले नेता सीमेंट और सरिये की तरह होते हैं, जबकि उसके बाद बनने वाली राजनीतिक संरचना किसी इमारत की तरह सामने आती है।
बयान से संभावित राजनीतिक गठजोड़ की अटकलें तेज
गुढ़ा के बयान को राजस्थान में बदलते सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में अलग-अलग सामाजिक ताकतों के बीच संभावित राजनीतिक तालमेल प्रदेश की सियासत में अहम भूमिका निभा सकता है।
विज्ञापन
राजस्थान की सियासत में समाजों की भूमिका पर चर्चा
गुढ़ा ने राजस्थान की राजनीति में समाजों की भूमिका पर चर्चा करते हुए पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने हरिसिंह झाला, कुंभाराम आर्य और सुखाड़िया के दौर की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान की राजनीति में कई बार ऐसे मोड़ आए हैं, जब अलग-अलग सामाजिक ताकतों और नेताओं के एक साथ आने से राजनीतिक समीकरण बदले हैं।
विज्ञापन
1967 का जिक्र, बड़े चौपड़ की घटना भी याद की
उन्होंने वर्ष 1967 के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय बहुमत के बावजूद सरकार गठन को लेकर परिस्थितियां बदलीं और विधानसभा में शक्ति परीक्षण का मामला सामने आया था। गुढ़ा ने उस दौर में बड़ी चौपड़ पर हुई फायरिंग और हरिसिंह झाला की मौत का भी उल्लेख किया।
विज्ञापन
वीपी सिंह से वसुंधरा राजे तक का दिया उदाहरण
गुढ़ा ने आगे कहा कि बाद के दौर में भी राजस्थान और देश की राजनीति में अलग-अलग सामाजिक समूहों के नेताओं के बीच गठजोड़ देखने को मिले। उन्होंने वीपी सिंह और देवीलाल के दौर से लेकर वसुंधरा राजे की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े राजनीतिक बदलावों में समाजों को जोड़ने वाले नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
‘दो बड़े समाज साथ आए तो बदल सकता है सियासी गणित’
गुढ़ा ने कहा कि यदि दो बड़े सामाजिक समूह एक जगह आ जाते हैं और उन्हें साथ लाने वाला कोई प्रभावी नेतृत्व सामने आता है तो उसका असर राजस्थान की राजनीति पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि समाजों को जोड़ने वाले नेता सीमेंट और सरिये की तरह होते हैं, जबकि उसके बाद बनने वाली राजनीतिक संरचना किसी इमारत की तरह सामने आती है।
बयान से संभावित राजनीतिक गठजोड़ की अटकलें तेज
गुढ़ा के बयान को राजस्थान में बदलते सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में अलग-अलग सामाजिक ताकतों के बीच संभावित राजनीतिक तालमेल प्रदेश की सियासत में अहम भूमिका निभा सकता है।