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Rajasthan: हार्ट अटैक के बाद दिल में बनी 13 सेंटीमीटर की जानलेवा थैली, एसएमएस में दुर्लभ सर्जरी से बची जान

Sun, 12 Jul 2026 03:17 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 12 Jul 2026 03:17 PM IST
सार

सर्जरी के दौरान मरीज को हार्ट-लंग मशीन पर रखा गया। चिकित्सकों ने प्रभावित हिस्से को हटाकर हृदय की प्राकृतिक संरचना और कार्यक्षमता को सुरक्षित रखते हुए उसका पुनर्निर्माण किया।

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Rajasthan: Life-threatening 13-cm sac formed in heart after heart attack life saved via rare surgery at SMS
एसएमएस अस्पताल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग ने एक बेहद दुर्लभ और जटिल हृदय सर्जरी कर 58 वर्षीय मरीज को नया जीवन दिया है। हार्ट अटैक के बाद मरीज के हृदय के बाएं निलय (लेफ्ट वेंट्रिकल) में करीब 13.4×11.5 सेंटीमीटर की विशाल गुब्बारेनुमा थैली (जायंट लेफ्ट वेंट्रिकुलर एन्यूरिज्म) बन गई थी, जिसे पांच घंटे चली जटिल सर्जरी के जरिए सफलतापूर्वक हटाया गया।
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झुंझुनूं निवासी श्रीराम सहाय लीबिया में काम करते थे, जहां उन्हें हार्ट अटैक आया था। वहां उनकी एंजियोप्लास्टी कर दो स्टेंट लगाए गए, लेकिन जांच में हृदय की सर्जरी की आवश्यकता बताई गई। इसके बाद वे भारत लौटे और एसएमएस अस्पताल में वरिष्ठ हृदय शल्य चिकित्सक डॉ. संजीव देवगढ़ा से परामर्श लिया। मरीज को लगातार सीने में दर्द और सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो रही थी।
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इकोकार्डियोग्राफी (ईको) और सीटी स्कैन में पता चला कि हार्ट अटैक के कारण उनके हृदय के बाएं निलय की दीवार पर विशाल एन्यूरिज्म बन गया है। 27 मई 2026 को मरीज को ऑपरेशन के लिए भर्ती किया गया और 5 जून को विशेषज्ञ टीम ने करीब पांच घंटे तक चली जटिल सर्जरी कर एन्यूरिज्म को निकाल दिया।


सर्जरी के दौरान मरीज को हार्ट-लंग मशीन पर रखा गया। चिकित्सकों ने प्रभावित हिस्से को हटाकर हृदय की प्राकृतिक संरचना और कार्यक्षमता को सुरक्षित रखते हुए उसका पुनर्निर्माण किया। ऑपरेशन के दौरान सात यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ी। सर्जरी के बाद मरीज को पांच दिन आईसीयू में रखा गया और स्वास्थ्य में सुधार होने पर 10 जून को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

चिकित्सकों के अनुसार, 13 सेंटीमीटर से अधिक आकार का लेफ्ट वेंट्रिकुलर एन्यूरिज्म बेहद दुर्लभ होता है और ऐसे मामलों में सफल सर्जरी के उदाहरण चिकित्सा साहित्य में बहुत कम मिलते हैं। इस उपलब्धि को देखते हुए इस केस को International Journal of Cardiovascular and Thoracic Surgery में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है, जो एसएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह जटिल सर्जरी वरिष्ठ प्रोफेसर एवं इकाई प्रभारी डॉ. संजीव देवगढ़ा के नेतृत्व में कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, एनेस्थीसिया, नर्सिंग और परफ्यूजनिस्ट की विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न की।
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