जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल से जुड़ा विवाद अब केवल छात्रा अमायरा की मौत तक सीमित नहीं रह गया है। अब स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति, उनकी शैक्षणिक योग्यता, स्टाफिंग व्यवस्था और नियामकीय अनुपालन को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। संयुक्त अभिभावक संघ ने दावा किया है कि सीबीएसई निरीक्षण अभिलेखों और न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान विद्यालय में शिक्षकों की संख्या और नियुक्तियों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति पर उठे सवाल
संघ के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कई शिक्षकों के नियुक्ति पत्र, शैक्षणिक योग्यता और अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे विद्यालय की प्रशासनिक पारदर्शिता और शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। दावा किया गया है कि वर्ष 2024-26 में नियुक्त 102 नए शिक्षकों में केवल 17 शिक्षक ही निर्धारित योग्यता के अनुरूप पाए गए, जबकि 85 शिक्षक यानी लगभग 83 प्रतिशत नॉन-कंप्लायंस श्रेणी में बताए गए। वहीं, प्राथमिक शिक्षक (पीआरटी) श्रेणी के 52 में से सभी 52 शिक्षकों के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने का भी दावा किया गया है। इसके अलावा वर्तमान में कार्यरत 151 शिक्षकों में से 115 शिक्षकों (करीब 76 प्रतिशत) की योग्यता अनुपालन को लेकर भी प्रश्न उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने सीबीएसई को दिए अहम निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने 25 मई 2026 को पारित आदेश में सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह निरीक्षण रिपोर्ट और शो-कॉज नोटिस की प्रति सात दिनों के भीतर याचिकाकर्ता विद्यालय को उपलब्ध कराए। साथ ही विद्यालय को 21 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
अभिभावक संघ ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि यदि इतने बड़े स्तर पर शिक्षक योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया और स्टाफिंग से जुड़ी अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि अभिभावकों के विश्वास और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने राज्य सरकार, सीबीएसई और शिक्षा विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अमायरा के पिता ने क्या कहा?
दिवंगत छात्रा अमायरा के पिता विजय मीणा ने कहा कि उनकी बेटी के साथ हुई घटना के बाद लगातार सामने आ रही जानकारियां बेहद चिंताजनक हैं। यदि विद्यालय में शिक्षक नियुक्ति, योग्यता, स्टाफिंग और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका परिवार केवल अमायरा के लिए नहीं, बल्कि हर बच्चे की सुरक्षा और न्याय के लिए यह लड़ाई लड़ रहा है।
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1200 से ज्यादा छात्रों ने छोड़ा स्कूल?
संयुक्त अभिभावक संघ ने यह भी दावा किया कि अमायरा प्रकरण के बाद विद्यालय पर अभिभावकों का भरोसा प्रभावित हुआ है। संघ के अनुसार, घटना के समय स्कूल में करीब 5500 विद्यार्थी अध्ययनरत थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 4300 रह गई है। यानी पिछले एक वर्ष में 1200 से अधिक विद्यार्थियों ने विद्यालय छोड़ दिया। संघ का कहना है कि यह आंकड़ा अभिभावकों के घटते विश्वास का संकेत है और पूरे मामले की स्वतंत्र, पारदर्शी तथा सार्वजनिक जांच की जानी चाहिए।