Rajasthan News: जयपुर-दिल्ली हाईवे पर पढ़ी गई ईद-उल-फितर की नमाज, बड़ी संख्या में लोगों ने की सामूहिक इबादत
Jaipur Eid al-Fitr Celebration: जयपुर-दिल्ली हाईवे पर ईद-उल-फितर के मौके पर मुस्लिम समुदाय ने सामूहिक नमाज अदा की। बड़ी संख्या में लोग शांतिपूर्ण ढंग से शामिल हुए। वहीं, इस दौरान सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन भी चौकन्ना रहा।
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राजस्थान की राजधानी जयपर में ईद उल फितर के अवसर पर शनिवार को जयपुर-दिल्ली हाईवे पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सामूहिक रूप से नमाज अदा की। नमाज के दौरान बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हुए और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से इबादत की। यह आयोजन राजस्थान में ईद के जश्न का हिस्सा रहा, जहां समुदाय के लोग सुबह से ही नमाज के लिए पहुंचे। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए थे।
फूलों की बारिश से स्वागत, दिखी एकता
ईद के मौके पर खास नजारा तब देखने को मिला जब अन्य समुदाय के लोगों ने नमाजियों पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर उनका स्वागत किया। इस पहल ने सामाजिक सौहार्द और एकता की मिसाल पेश की, जिसे नमाजियों ने सराहा। हिंदू-मुस्लिम एकता समिति से जुड़े राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि समाज में कुछ लोग भेदभाव फैलाने की कोशिश करते हैं, जो सही नहीं है। उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि “राम के बिना रमजान अधूरा है और ईद के बिना दिवाली”, इसलिए सभी धर्मों के लोगों को मिलकर रहना चाहिए और एकता को मजबूत करना चाहिए।
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सादगी के साथ मनाया त्योहार
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कई लोगों ने ईद सादगी से मनाई। न नए कपड़े पहने गए और न ही पारंपरिक व्यंजन बड़े स्तर पर बनाए गए। लोगों ने इसे संवेदनशील समय में जिम्मेदार पहल बताया। पूरे शहर में ईद की नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई और कहीं से कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई। प्रशासन ने इसे लेकर राहत जताई और लोगों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
आमेर में शिया-सुन्नी महिलाओं व बच्चों ने सादगी से मनाई ईद
जयपुर के आमेर क्षेत्र में इस बार ईद का त्योहार पारंपरिक उत्साह के बजाय शोक और सादगी के माहौल में मनाया गया। शिया और सुन्नी समुदाय की महिलाओं व बच्चों ने मिलकर नमाज अदा की और बाजुओं पर काली पट्टी बांधकर दुख प्रकट किया।
आमेर में सामाजिक कार्यकर्ता और शिया महिला प्रवक्ता मैमूना नरगिस के नेतृत्व में महिलाओं और बच्चों ने एक रैली निकाली। यह रैली नगीना मस्जिद से शुरू होकर आमेर किले के सामने स्थित माउटा झील तक पहुंची और पुनः मस्जिद पर आकर समाप्त हुई। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने काले कपड़े पहन रखे थे और हाथों में काले झंडों के साथ भारत का तिरंगा भी लहराया।
रैली में शामिल महिलाओं ने ईरान में कथित रूप से हुई घटनाओं, स्कूल की बच्चियों और गाज़ा-फिलिस्तीन में मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध जताया। कुछ स्थानों पर अमेरिका और इस्राइल के झंडों तथा संबंधित नेताओं के पोस्टर जलाकर आक्रोश व्यक्त किया गया।
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मैमूना नरगिस ने अपने संबोधन में अयातुल्लाह अली खामेनई के जीवन को सादगी और संघर्ष का प्रतीक बताते हुए उनके विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत में लोगों से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में आवाज उठाएं और संबंधित देशों के उत्पादों का बहिष्कार करें।
रैली के दौरान “शिया-सुन्नी भाई-भाई”, “हिन्दुस्तान जिंदाबाद” जैसे नारे भी लगाए गए, जिससे आपसी एकता और देशभक्ति का संदेश देने की कोशिश की गई। महिलाओं और बच्चों ने कहा कि वे इस बार ईद की खुशियां नहीं मना रहे हैं, बल्कि इसे शोक के रूप में मना रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में मैमूना नरगिस ने जयपुर पुलिस और आमेर पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया, जिन्होंने रैली को शांतिपूर्ण और सफल बनाने में सहयोग किया। पूरे आयोजन के दौरान शांति और अहिंसा बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।