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Jaipur: AI और डीपफेक से बढ़ा साइबर ठगी का खतरा, बायोमेट्रिक सुरक्षा को लेकर राजस्थान पुलिस ने एडवाइजरी जारी की
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2026 04:53 PM IST
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सार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए राजस्थान पुलिस ने साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। लोगों को आधार बायोमेट्रिक लॉक करने और संदिग्ध मैसेज से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
राजस्थान पुलिस मुख्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित साइबर अपराधों को लेकर आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी अब Google Gemini AI, ChatGPT, Grok जैसे आधुनिक एआई टूल्स और डीपफेक तकनीकों का इस्तेमाल कर आधार बायोमेट्रिक सुरक्षा प्रणालियों को निशाना बना रहे हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि अपराधी सबसे पहले डेटा लीक, फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों की निजी जानकारी जैसे आधार नंबर, फोटो और मोबाइल नंबर हासिल करते हैं। इसके बाद कॉमन सर्विस सेंटर और अपडेट क्लाइंट लाइट जैसी सेवाओं का दुरुपयोग कर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर को बदलने का प्रयास किया जाता है। मोबाइल नंबर बदलने के बाद ओटीपी अपराधियों तक पहुंचने लगते हैं, जिससे वे बैंकिंग, डिजिलॉकर और अन्य डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बना लेते हैं।
ये भी पढ़ें: Rajasthan: राजस्थान हाईकोर्ट की बड़ी पहल, तीन दिनों तक वर्चुअल होगी सुनवाई, जानें क्यों लिया फैसला?
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पुलिस ने बताया कि एआई आधारित डीपफेक तकनीक के जरिए अपराधी ऐसे नकली वीडियो तैयार कर सकते हैं, जिनमें व्यक्ति के चेहरे के हावभाव और आंखों की गतिविधियां बिल्कुल वास्तविक लगती हैं। कई फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम ऐसे फर्जी वीडियो को असली मान लेते हैं। इसके जरिए अपराधी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर फर्जी बैंक खाते खोल सकते हैं और आर्थिक धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं।
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे mAadhaar ऐप या UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करें। इससे फिंगर प्रिंट और आइरिस डेटा का उपयोग बिना अनुमति नहीं किया जा सकेगा। साथ ही समय-समय पर आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री भी जांचते रहें ताकि आधार के उपयोग की जानकारी मिल सके।
पुलिस ने कहा कि आधार से जुड़े मोबाइल नंबर में बदलाव संबंधी कोई संदिग्ध एसएमएस मिलने पर उसे नजरअंदाज न करें। आधार के साथ सक्रिय ईमेल आईडी लिंक रखना भी जरूरी है ताकि किसी भी अपडेट की सूचना तुरंत मिल सके।
राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि साइबर ठगी या उसके प्रयास की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in या निकटतम साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाएं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि अपराधी सबसे पहले डेटा लीक, फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों की निजी जानकारी जैसे आधार नंबर, फोटो और मोबाइल नंबर हासिल करते हैं। इसके बाद कॉमन सर्विस सेंटर और अपडेट क्लाइंट लाइट जैसी सेवाओं का दुरुपयोग कर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर को बदलने का प्रयास किया जाता है। मोबाइल नंबर बदलने के बाद ओटीपी अपराधियों तक पहुंचने लगते हैं, जिससे वे बैंकिंग, डिजिलॉकर और अन्य डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बना लेते हैं।
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राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे mAadhaar ऐप या UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करें। इससे फिंगर प्रिंट और आइरिस डेटा का उपयोग बिना अनुमति नहीं किया जा सकेगा। साथ ही समय-समय पर आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री भी जांचते रहें ताकि आधार के उपयोग की जानकारी मिल सके।
पुलिस ने कहा कि आधार से जुड़े मोबाइल नंबर में बदलाव संबंधी कोई संदिग्ध एसएमएस मिलने पर उसे नजरअंदाज न करें। आधार के साथ सक्रिय ईमेल आईडी लिंक रखना भी जरूरी है ताकि किसी भी अपडेट की सूचना तुरंत मिल सके।
राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि साइबर ठगी या उसके प्रयास की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in या निकटतम साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाएं।