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Rajasthan Politics: कई दावेदारों के बीच नेता प्रतिपक्ष को लेकर असमंजस, कांग्रेस खेल सकती है ब्राह्मण कार्ड?

Thu, 14 Dec 2023 03:36 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 14 Dec 2023 03:36 PM IST
सार

Rajasthan Politics: राजस्थान में बीजेपी की तरफ से भजनलाल शर्मा कल यानी शुक्रवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लेंगे। उनके साथ दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

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Rajasthan Politics Confusion in Congress regarding Leader of Opposition among many contenders
राजस्थान कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं हो सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि आलाकमान जब चाहेगा फैसला हो जाएगा। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद यहां नेता प्रतिपक्ष और प्रदेशाध्यक्ष के पद को लेकर भी गुटबाजी तेज हो गई थी। लेकिन राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने यह कहकर मामला ठंडा करने की कोशिश की कि राजस्थान में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर है। इसलिए फिलहाल किसी तरह के बदलाव की कोई बात नहीं है।

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राजस्थान में कांग्रेस पिछले चार चुनाव में दो बार विपक्ष में रही है और यह पहला मौका है, जब पार्टी के पास विपक्ष के रूप में विधायकों की ठीक-ठाक संख्या है। कई बड़े चेहरे जीतकर विधानसभा में पहुंचे हैं। यही कारण है कि इस बार नेता प्रतिपक्ष के लिए दावेदारों की संख्या काफी ज्यादा है। एक जैसे कद के कई बड़े नेता विपक्ष के विधायक बनकर विधानसभा में पहुंचे हैं। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष को लेकर कांग्रेस के कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन जिस तरह से बीजेपी ने ब्राह्मण चेहरे भजनलाल शर्मा को सीएम बनाया है, इसके जवाब में कांग्रेस भी ब्राह्मण कार्ड खेल सकती है। 
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ये हैं दावेदार
अशोक गहलोत हर बार जीत कर तो आते हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं लेते। इसलिए उनको छोड़ दें तो वरिष्ठता की दृष्टि से चार पांच नाम सामने आ रहे हैं। इनमें शामिल हैं...

  • सचिन पायलट- राजस्थान में पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता हैं। केंद्रीय मंत्री सांसद और प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। युवा चेहरा हैं और पार्टी का भविष्य माने जाते हैं।
  • शांति धारीवाल- गहलोत सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्री रहे हैं। गहलोत सरकार में संसदीय कार्य मंत्री भी रहे हैं। इसलिए विधानसभा की कार्यप्रणाली का बहुत अच्छे ढंग से समझते भी हैं और राजनीतिक समझ में उनका कोई मुकाबला नहीं है।
  • महेंद्रजीत सिंह मालवीय- लगातार जीतने वाले विधायकों में शामिल हैं। गहलोत सरकार में मंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य हैं और बड़ा आदिवासी चेहरा माने जाते हैं। 
  • गोविंद सिंह डोटासरा- पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, लगातार विधायक बन रहे हैं। इसलिए विधानसभा के कार्यप्रणाली को अच्छे से समझते हैं। मुखर होकर बोलते हैं।
  • हरीश चौधरी- विधायक और मंत्री रहे हैं। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हैं और गांधी परिवार के नजदीकी माने जाते हैं।
  • राजेंद्र पारीक- गहलोत के पिछले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं। वरिष्ठ विधायक हैं और निवर्तमान विधानसभा में सभापति पैनल में शामिल थे।
  • हरिमोहन शर्मा- पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक रहे हैं। हालांकि लंबे समय बाद जीत हासिल हुई है। लेकिन संसदीय कार्य प्रणाली को बहुत अच्छे से समझते हैं।


यह है समीकरण
पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष का नाम इन्हीं नेताओं में से किसी एक को चुना जाएगा। लेकिन इसे लेकर अलग-अलग ढंग से लोगों में चर्चा चल रही है। इसमें अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की गुटबाजी भी काफी हद तक हावी है।

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